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प्रवीण नारायण चौधरी

वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

वेद अनन्त अछि यदि सम्पूर्ण सृष्टि आ सृष्टि सँ पहिने या बाद के जेहो किछु अछि, से सबटा स्पन्दनक जगत मे समाहित अछि, त एकर परिणाम अवश्ये विशाल होयत । अतः, सवाल उठैत अछि जे कि वेद मंत्र सब मे समस्त विविध सार्वभौमिक क्रिया केना समाहित अछि । ई बुझय पड़त जे वेद विशाल अछि वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

जप केर त्रुटिरहित विधि  अपन पूर्वज लोकनि वेद मे छोटो टाक त्रुटि सँ परहेज लेल लेखनक सहारा लेनहिये बिना अनेकों उपाय निकालि लेने छलथि । वैदिक मंत्र केर पूर्ण लाभ तखनहि प्राप्त भ’ सकैछ जखन कोनो शब्द मे कोनो तरहक परिवर्तन (हेरफेर) नहि कयल जाय; पाठक समय स्वर (आवाज) मे कोनो प्रकारक अनाधिकृत तर-उपर बहकाव जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)

वेद पर शोध ई खेदक विषय थिक जे भारत मे हमरा सब मे सँ बेसीतर लोकक लेल वेदक ज्ञान केर मुख्य स्रोत प्राच्यविद् कहेनिहार विदेशी लोक आर ओकर पदचिन्ह सब पर चलिकय शोध करयवला हमरा लोकनिक विद्वान् सब द्वारा कयल गेल शोध अछि । हम एहि बात सँ सहमत छी जे वेदक ज्ञान केर सम्बन्ध वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)

ध्वनि आ सृजन – सृष्टि एवं वेद केर वैज्ञानिक प्रमाण

ध्वनि आ सृजन ध्वनि कि अछि ? आधुनिक विज्ञान एकरा कम्पन रूप मे परिभाषित करैत छथि । परमाणु विज्ञान आर आइंस्टीनक सिद्धान्त यैह निष्कर्ष प्रस्तुत कयलनि अछि जे परमाणुक स्तर पर सब पदार्थ एक्कहि होइछ – (वेदांतक अद्वैत सिद्धान्त) । लेकिन वस्तु सब आँखि केँ अलग-अलग देखाय दैत अछि कियैक तँ ऊर्जा विभिन्न बिन्दु पर ध्वनि आ सृजन – सृष्टि एवं वेद केर वैज्ञानिक प्रमाण

वेद – भूमिका

वेद वेदक कोनो आदि नहि छैक । ई सामान्य बुद्धिक विरुद्ध भ’ सकैछ । हमरा सभक आधुनिक वैज्ञानिक मन कोनो ऐतिहासिक घटनाक स्रोत, कारण आ तिथिक खोज मे रहैछ । आर वेद जेहेन जटिल रचनाक सेहो निश्चित रूप सँ कोनो आरम्भ रहल होयत । अनन्तकाल, अनादि, असीमता जेहेन अवधारणा सब कोनो वैज्ञानिक अध्ययन लेल वर्जित वेद – भूमिका

वर्तमान डबल इंजिन सरकारक मिथिला पर दहिन दृष्टि

मिथिला लेल ‘अच्छे दिन’ आ ‘बुरे दिन’ पूर्णिया हवाई अड्डा सेहो किछुए दिन मे आम यात्री लेल हवाई सेवा आरम्भ करय जा रहल अछि । रेलवे लाइन आ सड़क संजाल केर विकासक बात त विगत २-३ दशक सँ निरन्तरता मे अछि, परञ्च कतेको रास नया फोर लेन आ रेलवे लाइन विस्तार कयल गेल अछि । वर्तमान डबल इंजिन सरकारक मिथिला पर दहिन दृष्टि

सीकेडी – क्रोनिक किडनी डिजीज – खतरनाक रोग थिकः प्रवीण संस्मरण

कठिन समय सँ उबरबाक क्रम मे…. जीवन मे एहेन दुरुह पहर लगभग ३० साल बाद आयल । १९९५ मे पिताक देहावसान, २०२५ मे छोट भाइक देहावसान – जखन-जखन अपन कियो बिछुड़ैत छथि त बुझू अजीब हालत मे हम सब पड़ि जाइत छी । एक-एक क्षण मे पूरा जीवनक फ्लैश बैक (पूर्वघटित अनेकों प्रकरण) सब आँखिक सीकेडी – क्रोनिक किडनी डिजीज – खतरनाक रोग थिकः प्रवीण संस्मरण

मैथिली मिथिला हित मिथ्याचार सँ या मिथ्याचारी सँ कहियो सम्भव नहि होयत

असली तबला बजाउ तखन हेतय खरखांही (वाहवाही) लूटय लेल नहि, वास्तविक परिवर्तन लेल प्रयास करबय तखन मैथिली आ मिथिलाक हित हेतैक । ई उक्तिक प्रासंगिकता अछि ‘सामाजिक संजाल मे मैथिली-मिथिला पर गरमागरम चर्चा-वर्चा केर’ । कतेको रास चिन्तक, वैज्ञानिक, मर्मज्ञ, अभियन्ता आ विद्वान् लोकनि भाँति-भाँति केर चिन्तनयुक्त बात सब ‘सामाजिक संजाल’ मे ‘मैथिली विमर्श’ लेल मैथिली मिथिला हित मिथ्याचार सँ या मिथ्याचारी सँ कहियो सम्भव नहि होयत

वेदसारशिवस्तोत्र – स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा

स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा – शिवस्तवन् सावन मास २०८२ विक्रम संवत् साल – श्री श्री १०८ श्री आदिगुरु शंकराचार्य केँ बेर-बेर प्रणाम अर्पित करैत हुनकहि द्वारा कयल गेल ई सुन्दर रचना – ॥ वेदसारशिवस्तवः ॥ पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम । जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम ॥१॥ हे समस्त जीव वेदसारशिवस्तोत्र – स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा

मिथिला लोकसंस्कृति आ मधुश्रावणी पाबनिक गाथा-महत्ता

मिथिला लोकसंस्कृति मधुश्रावणी मिथिला के इतिहास संस्कृति, परम्परा, रीति रिवाज आ जीवन शैली के लेल जानल जाइत अछि । एहि क्षेत्रक नवविवाहिता विवाह के बाद आबएबाला पहिल साउन के कृष्णपक्षक पञ्चमी तिथि ( मौना पञ्चमी ) सँ शुरू कऽ शुक्ल पक्षक तृतीया धरि करीब तेरह सँ पन्द्रह दिन तक मधुश्रावणी पूजा करैत छथि । मधुश्रावणी मिथिला लोकसंस्कृति आ मधुश्रावणी पाबनिक गाथा-महत्ता