सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला
सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला ‘संजाल कि जंजाल?’ – विषय पर गम्भीर विमर्श कयल गेल छल हालहि आयोजित जनकपुर साहित्य कला आ नाट्य महोत्सव मे। संजाल सँ सार्थकता-सकारात्मकताक भान होइत छैक, जंजाल सँ निरर्थकता या नकारात्मकताक। २००७ सँ संजालक सक्रिय उपयोग करैत हमर अनुभव संजालहि केर रहल, जंजाल किन्नहुं नहि बुझायल। अति सर्वत्र वर्जयेत – … सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला








