प्रवीणक किछु रचना संग्रह
१. ११ अप्रैल २०१३ः अनमोल जीवन जीवन धन बड मूल्यकेँ, देलनि अछि भगवान्! सच्चरित्र शिष्टा-सुन्दर, बनियौ बस इनसान!! हमर वृत्ति जे हमहि करी, देखबय लेल नहि धर्म! जीवन साफल बनल ओकर, कयलक जे निज कर्म!! देखू न आवरण देह के, पाबू निज मति दाम! अपन-अपन स्वभावसँ, बनबू मिथिला गाम!! रहल ई पावन देश सदा, अयला … प्रवीणक किछु रचना संग्रह









