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प्रवीण नारायण चौधरी

नेपाली युवा आशीर्वाद राज झा संयुक्त राष्ट्रसंघक विश्व खाद्य मंच २०२५ मे सहभागी

काठमांडू २६ असोज : नेपालक युवा आशीर्वाद राज झा केँ संयुक्त राष्ट्रसंघक खाद्य आ कृषि संगठन (एफएओ) अन्तर्गत आयोजित विश्व खाद्य मंच (डब्लुएफएफ) २०२५ मे सहभागी होबाक लेल नेपाल सँ एकमात्र आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त भेल अछि । नेपाल सँ प्रतिनिधित्व करबाक लेल आधिकारिक निमंत्रण भेटल काठमांडू वन विज्ञान कलेजक स्नातक विद्यार्थी आशीर्वाद राज झा कार्यक्रम नेपाली युवा आशीर्वाद राज झा संयुक्त राष्ट्रसंघक विश्व खाद्य मंच २०२५ मे सहभागी

वेदांगः छन्द – वेदक पैर

वेदांग छन्द – वेदक पैर वेदक छह अंग मे सँ एकटा छन्द केँ वेदपुरुषक चरण (पैर) मानल जाइछ । ‘छन्द’ केर एकटा आरो अर्थ अछि । ई स्वयं वेद केँ सन्दर्भित करैत अछि । भगवान कृष्ण वेद केँ सृष्टिक गाछ केर पत्ता कहैत छथि – छन्दांसि यस्य पर्णानि । एतय हम ‘छन्द’ केर एकटा अलग वेदांगः छन्द – वेदक पैर

वेदांगः व्याकरण – वेदक मुँह

वेदांग: व्याकरण वेदपुरुषक दोसर अंग हुनक मुख अछि । व्याकरण यैह अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग थिक । व्याकरण पर अनेक ग्रंथ अछि । एहि मे सँ सर्वाधिक प्रचलित ऋषि पाणिनिक व्याकरण अछि । पाणिनिक व्याकरण सूत्र रूप मे अछि । हुनक व्याकरण सूत्र पर वररुचि द्वारा एकटा विस्तृत भाष्य या ‘वार्तिक’ लिखल गेल अछि । ऋषि वेदांगः व्याकरण – वेदक मुँह

नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

लेख – मौलिक इतिहास श्री गणेशाय नमः नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर – हिरालाल कर्ण नेपालमें लिच्छविकाल सौँ परम्परागत रुपमें हिन्दू धर्मशास्त्र, स्मृतिग्रन्थ सभपर आधारित न्यायप्रणाली आ कानुनी व्यवस्था सञ्चालनमें रहल बात इतिहासमें भेटैत अछि । एहि तथ्यके पुष्टि अनन्तलिंगेश्वर महादेव मन्दिरमें रहल मानदेव सम्वत ८० के राजा नरेन्द्रदेवक अभिलेखके अड़तीसम् पंक्तिमें नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी चन्द्रकवि विरचित मिथिलाभाषा रामयण सुन्दरकाण्ड – दोसर अध्याय सीताक खोज मे निकलल हनुमानजीक लंका मे रावणक महल घुमबाक प्रकरण ।षट्पद। मारुत-नन्दन तखन सूक्ष्म-तन, निशिमे धय कहुँ ॥१॥ लङ्का कयल प्रवेश भ्रमित अतिगुप्त भय कहुँ ॥२॥ सीता तकयित ततय दशानन-मन्दिर गेला ॥३॥ देखि विभव-विन्यास बहुत मन विस्मित भेला ॥४॥ देखल लङ्का मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा वेदक छः अंग मे सँ सब सँ प्रथम (मुख्य) अंग शिक्षा अछि । एकरा वेदक नाक (नासिका) कहल जा सकैत अछि । नासिकाक कार्य केवल गन्ध चिन्हबाक, जे कि एकटा छोट भूमिका थिक, ततबे धरि नहि अछि । बेसी महत्वपूर्ण (भूमिका) श्वास क्रिया सेहो एहि अंग (नासिका) केर वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा

अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

काल्हिक दरभंगा ‘अथक अविराम’ पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम मे प्रवीण बहुत समय बीति गेल छल । अहु बेर परिस्थिति विपरीते छल । तथापि भास्कर भाइक प्रेम, किसलयजीक जिद्द आ मैथिली-मिथिला लेल निजी समर्पण-संकल्प – ई तीनू ततबे जोर कय देलक जे किछु विलम्बे सही मुदा पहुँच गेल रही दरभंगा । सभागार खचाखच भरल छल । गर्मी अथक अविराम – मैथिली पोथीक लोकार्पण समारोह मे हम प्रवीण

मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

२२ सितम्बर २०२५, विराटनगर । मैथिली जिन्दाबाद !! काल्हि २१ सितम्बर २०२५ दरभंगा (मिथिला) मे डा. भास्कर ज्योति लिखित पुस्तक ‘अथक अविराम’ केर लोकार्पण समारोहपूर्वक कयल गेल । युवा पुस्ता मे अपन प्रखर बौद्धिकता लेल जानल-मानल व्यक्तित्व, अपन बहुप्रतिभाशाली क्षमता सँ छात्र जीवन सँ लैत हाल बिहार लोक सेवा आयोग (बिपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कय हाल मिथिलाक आदर्श युवा डा. भास्कर ज्योतिक मैथिली साहित्य केँ ‘प्रथम पुष्प’ – अथक-अविराम लोकार्पित

नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

नेपाल मे एखन धरि कतेको रास क्रान्ति भ’ गेल अछि । विकास सभक मुख्य एजेन्डा मे रहैछ । लेकिन पड़ोसहि मे स्थित भूटान जे कि नेपाल सँ काफी छोट रहितो आर्थिक प्रगतिक मामिला मे काफी आगू अछि – से कियैक अछि एहि पर अध्ययन जरूरी छैक । आउ, एक बेर नेपाल आ भुटानक अर्थतंत्र बारे नेपाल आ भूटान बीच तुलना – अर्थतंत्रक आधार पर

वेद शाखा

वेदक शाखा  वेद ‘अनन्त’ अछि – अन्तहीन । वेदान्त केर अर्थ अछि वेदक अन्त । ‘अनन्त वेद केर अन्त’ केर कि अर्थ भेल ? एकरा ‘वेदान्त’ एहि लेल कहल जाइत छैक जे एहि मे विभिन्न आध्यात्मिक सत्य सभक निष्कर्ष निहित छैक, अर्थात् आत्मसाक्षात्कार, जे वेद सभक तात्पर्य छैक । दोसर शब्द मे, ई वेदक खोज वेद शाखा