मिथिला भाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड प्रथम अध्याय
कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण ॥अयोध्याकाण्ड॥ ।श्लोक। ।शार्दूलविक्रोडित छन्दः। भाले बालकलाकरं गलगरं वामाङ्गवामाधरं चञ्चन्मौलिसरिद्वरं वृषचरं सर्व्वप्रदं निर्द्दरम्। वन्दे पिङ्गजटं मनाहरनटं विश्रान्तिभूसद्वटं श्रीमन्निष्कपटं सुकृत्तिकपटं भ्राजद्विभूतिच्छटम् ॥१॥ भावार्थः शिवजीक हम वन्दना करैत छी, जिनकर माथा पर बालचन्द्र छथि, गला मे विष छन्हि, बामा अंग मे गौरी विराजमान छथि, सिर पर चञ्चल वेगवती गंगा छथि, जे बसहा … मिथिला भाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड प्रथम अध्याय








