रामचरितमानस मोतीः श्री राम-भरतादिक संवाद
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-भरतादिक संवाद १. पहिने भरतक विनती आदरपूर्वक सुनि लिअ, फेर ओहि पर विचार करू। तखन साधुमत, लोकमत, राजनीति आर वेद केर निचोड़ (सार) निकालिकय ओहि मुताबिक कयल जाउ। गुरु वशिष्ठजी श्री रामजी केँ बुझबैत ई बात कहलखिन। २. भरतजी पर गुरुजीक स्नेह देखिकय श्री रामचन्द्रजीक हृदय मे … रामचरितमानस मोतीः श्री राम-भरतादिक संवाद





