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प्रवीण नारायण चौधरी

वेदक उपांग – धर्मशास्त्र – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख

उपांग: धर्मशास्त्र – चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती ‘शंकराचार्य’ – अपन पुस्तक ‘द वेदाज’ मे पौराणिक लक्ष्य प्राप्तिक मार्ग ई देखल गेल अछि जे पुराण केर पात्र हमरा सभक आदर्श व मार्गदर्शक होइत छथि । हुनका लोकनिक कथा सब पढ़िकय हमरा लोकनि हुनक सद्गुण सभक अनुकरण करबाक लेल प्रेरित भेल करैत छी । यद्यपि ई इच्छा उत्पन्न होइत वेदक उपांग – धर्मशास्त्र – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख

चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अद्भुत व्याख्या – काव्य (कविता) – अत्यन्त पठनीय व मननीय लेख

काव्य – कविता – चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती “शंकराचार्य” जँ कोनो नीक कार्य पूरा करबाक अछि, तँ ओकरा तीन तरीका सँ व्यवस्थित कयल जा सकैछ । पहिल, सरकार द्वारा कानून बनेबाक जेकाँ आदेश पारित करब होइछ । एकरा “प्रभु सम्मिति” कहल जाइत छैक, एहि मे स्वामी सेवक केँ आदेश दैत छथि । एतय, चाहे ओ पसिन करय चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक अद्भुत व्याख्या – काव्य (कविता) – अत्यन्त पठनीय व मननीय लेख

एक परमात्माक अनेक रूपः शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक शानदार विश्लेषण

एक्के भेला अनेक एक्के टा परमात्मा विभिन्न देवताक रूप मे प्रकट होइत छथि । प्रत्येक भक्त ईश्वर केर कोनो विशेष रूप केर प्रति एकटा विशेष आसक्ति विकसित करैत अछि । प्रत्येक भक्त केर एहि आसक्ति केँ आर प्रबल बनेबाक लेल, परमात्मा कोनो समय कोनो विशेष गुण केँ दोसरक तुलना मे गौण कय दैत छथि तथा एक परमात्माक अनेक रूपः शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक शानदार विश्लेषण

नेपालक भाषानीति – भाषा आयोगक सिफारिश केँ राजनीतिक शक्ति द्वारा अवहेलना महग पड़त

नेपालक भाषानीति – सरकारी कामकाजक भाषा लेल भाषा आयोगक अनुशंसा भाषाविज्ञक समूह – भाषा आयोग द्वारा सिफारिशक बादो नेपालक विभिन्न प्रदेश (राज्य) मे हाल धरि एकल भाषा नीति मात्र कायम रहब कि संकेत करैत अछि ? मधेशी उत्पीड़न-दमन संगहि अनेकों उत्पीड़ित-दमित-शोषित वर्गक संघर्ष आ नेपाल मे राजतंत्र केँ निरंकुश कहिकय उखाड़ि फेकबाक दावी करनिहार – नेपालक भाषानीति – भाषा आयोगक सिफारिश केँ राजनीतिक शक्ति द्वारा अवहेलना महग पड़त

देवयानीक विवाह – महाभारतक एक प्रेरणास्पद कथा

साहित्य – महाभारतक एक कथा – सी. राजगोपालाचारी देवयानीक विवाह एक बेर गर्मीक दुपहरिया दिन, वन मे खेल-कुद सँ थाकल देवयानी आ असुर सभक राजा वृषपर्वाक बेटी सब एकटा जंगली पोखरिक ठंढ़ा पानि मे नहाय गेलिह, आर पानि मे पैसय सँ पहिने ओ सब अपन माला केँ महाड़ (किनार) पर राखि देलिह । तेज हवा देवयानीक विवाह – महाभारतक एक प्रेरणास्पद कथा

देवयानी आ कच – अद्भुत प्रेम प्रसंग – अंग्रेजी, हिन्दी आ मैथिली मे

Devyani and Kacha (A Beautiful Story from Mahabharat – by C. Rajagopalachari) In ancient times, there was a bitter struggle between the devas or gods and the asuras or demons for the lordship of the three worlds. Both belligerents had illustrious preceptors – Brihaspati who was pre-eminent in the knowledge of the Vedas was the देवयानी आ कच – अद्भुत प्रेम प्रसंग – अंग्रेजी, हिन्दी आ मैथिली मे

जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल सफलता क्षणभंगुर

जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ भेटल सफलता आ दुष्परिणाम वर्ष १९८४ ई. । मैट्रिक परीक्षा लेल सेन्टर ग्रामीण क्षेत्रक विद्यालय मे । शिक्षामंत्री नागेन्द्र झाक कार्यकाल । हमर उमेर ११ वर्षक । हमर गामक विद्यालय केर सेन्टर नारायणपुर मे छल । जहिया-जहिया परीक्षा होइक, गाम सँ हेंजक हेंज लोक सब साइकिल पर जाइत छल, परीक्षा देखय लेल जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल सफलता क्षणभंगुर

स्वयं केँ पवित्र बनाकय राखब सहज नहि छैक – स्वामी चिदानन्द जीक लिखल एक अति पठनीय लेख

NOT A ROSY PATH : (This article is a chapter from the book The Divine Destination.) – Swami Chidananda Gurudev says, “There is no royal road in spirituality. Adversity develops the power of endurance and will-force. Adversity develops fortitude and forbearance. All the prophets, saints, Bhaktas and Yogins of yore had to struggle hard against स्वयं केँ पवित्र बनाकय राखब सहज नहि छैक – स्वामी चिदानन्द जीक लिखल एक अति पठनीय लेख

लेखक ओ जे पाठकक हित बुझिकय लेखन कार्य करय

लेखक वैह जिनकर पाठक अछि मैथिली हमर मातृभाषा थिक । एहि मे लिखैत छी त अपन मिथिलाक लोक – अपन घर-परिवारक लोक – हिनका सभक हितचिन्तक बनिकय लिखब अन्तरात्मा मे सेवा करबाक भाव प्रदान करैत अछि । एहि सँ लोक त लोक, परलोक आ खासकय जगजननी जानकी जी सेहो प्रसन्न होइत छथि ई अन्तर्भाव मे लेखक ओ जे पाठकक हित बुझिकय लेखन कार्य करय

मिथिलाभाषा रामायणः सप्तम् अध्याय – मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या घुरब

स्वाध्याय कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण  अध्याय सातम्  मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या वापसी  ।मिथिला संगीतानुसारेण पार्व्वतीयबराड़ी नाम छन्दः। ओतय अयोध्या मन्त्रि सुमन्त्र । पहुचि सरथ भेल दिवसक अन्त ॥१॥ वसनहि सौँ मुह कय लेल ओट। राम-वियोग दुःख बड़ गोट ॥२॥ नोरक लेल गेल तन तीति । पुर-प्रवेश मे हो बड़ भीति ॥३॥ रथ छोड़ल बाहर नृप-द्वार । मिथिलाभाषा रामायणः सप्तम् अध्याय – मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या घुरब