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नेपालक भाषानीति – भाषा आयोगक सिफारिश केँ राजनीतिक शक्ति द्वारा अवहेलना महग पड़त

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नेपालक भाषानीति – सरकारी कामकाजक भाषा लेल भाषा आयोगक अनुशंसा

भाषाविज्ञक समूह – भाषा आयोग द्वारा सिफारिशक बादो नेपालक विभिन्न प्रदेश (राज्य) मे हाल धरि एकल भाषा नीति मात्र कायम रहब कि संकेत करैत अछि ?

मधेशी उत्पीड़न-दमन संगहि अनेकों उत्पीड़ित-दमित-शोषित वर्गक संघर्ष आ नेपाल मे राजतंत्र केँ निरंकुश कहिकय उखाड़ि फेकबाक दावी करनिहार – संघीयता आ गणतंत्र रूप मे परिणति दिएबाक – लेकिन आब १० वर्षक नव संविधान एवं लगभग २० वर्षक राजतंत्र समाप्तिक बादो ‘एकल भाषा’ केर यथास्थिति बनल रहबाक कि संकेत करैत अछि ?

नेपालक दुइ प्रदेश ‘कोशी प्रदेश’ एवं ‘मधेश प्रदेश’ मे नेपाली बाद दोसर ‘सरकारी कामकाजक भाषा’ रूप मे मैथिली, लिम्बू, भोजपुरी एवं बज्जिका केँ संविधानप्रदत्त अधिकार एवं भाषा आयोगक वृहत् विश्लेषण सहितक ‘सिफारिश’ जे एहि भाषा सब केँ ‘सरकारी कामकाजक भाषा’ बनाउ, मुदा प्रदेशक सत्तासीन एवं विपक्षी राजनीतिक दल सभक चुप्पी – कि संकेत करैत अछि ?

विदित हो –

१. नेपाल मे राष्ट्रीयताक सबलीकरण लेल बहुभाषिकता केँ सुप्रतिष्ठित करबाक सहमति बनल ।

२. नेपाल मे प्रथम राष्ट्रभाषा नेपाली आ १२४ मातृभाषा (२०७८ जनगणना अनुसार) केँ राष्ट्रभाषा मानल गेल अछि ।

३. परञ्च – नेपाली वाहेक आन कोनो भाषा केँ (सिवाये तमाङ्ग आ नेवारी भाषा – बागमती प्रदेश मे) एखन धरि ‘सरकारी कामकाजक भाषा’ रूप मे मान्यता देबाक विधान नहि बनायल जा सकल अछि ।

४. संविधान द्वारा निर्देशित आ गठित भाषा आयोग केर सिफारिश उपर नेपालक राजनीतिक दल व नेता अपन ठेंठ-अवैज्ञानिक समझ सँ एखन धरि अंकुश लगौने अछि ।

५. नेता सब अपन भाषण मे कतेको बेर गछियो कय एखन धरि नेपालक सर्वथा प्राचीन भाषा मैथिली केँ कोनो तरहक राजकीय मान्यता सिवाये संविधानक अलंकारिक ‘राष्ट्रभाषा’ केँ किछु आर सुविधा या संरक्षण-सम्मान नहि प्रदान कएने अछि ।

सरकारी कामकाजक भाषा बनबाक लाभ

सरकारी कामकाजक भाषा बनबाक कतेको रास लाभ होइत छैक । एहि सँ आम लोक केँ सरकारी योजना आ सेवा-सुविधा सब केँ बुझबाक आ ओतय धरि पहुँच बनेबा मे सहजता होइत छैक । संगहि, एहि सँ देशक एकता आर सांस्कृतिक पहिचान केँ सेहो सबलता भेटैत छैक । एकलभाषाक तुलना मे बहुभाषाक मान्यता सँ आरो भाषाभाषीक मोन मे देशभक्तिक भावना दृढ़ता प्राप्त करैत छैक ।

आम जनताक भागीदारी: जखन सरकारी कामकाज अपन भाषा मे होइत छैक, त आम लोक सरकारी नीति आर कार्यक्रम सब केँ नीक जेकाँ बुझि पबैत छैक आ ओहि मे सक्रिय रूप सँ भाग लय पबैत छैक ।

सरकारी योजना सभक प्रभावी कार्यान्वयन: सरकारी योजना सभक लाभ अन्तिम व्यक्ति धरि पहुँचाबय लेल ई जरूरी छैक जे कामकाज आम लोकक भाषा मे हो ।

न्याय धरि पहुंच: अदाल व कानूनी प्रक्रिया सब मे अपन भाषाक उपयोग कयला सँ न्याय धरि पहुंच आसान भ’ जाइत छैक । आन भाषा मे शाब्दिक-भाषिक पेंच या लोकक अल्प-साक्षरता (कम बुझबाक) केर सीमाक दुरुपयोग कम भ’ जाइत छैक ।

सांस्कृतिक एकता: राजभाषाक रूप मे एकटा भाषाक उपयोग देशक सांस्कृतिक एकता केँ बढ़ावा दैत अछि आर राष्ट्रीय पहचान केँ मजबूत बनबैत अछि । नेपाल मे ‘नेपाली’ राष्ट्रभाषा पहिनहिं सँ सम्पर्क भाषाक रूप मे स्थापित छैक, लेकिन आर मातृभाषा जेकर प्रयोगकर्ताक संख्या उल्लेख्य छैक, जेना नेपाली बाद मैथिली सर्वाधिक छैक – तेकरो सम्मान देला सँ राष्ट्रीय एकता सुदृढ़ होयत – एकर निरादर कयला सँ लोकभावना आहत हेबाक हालात मे राष्ट्रिय एकता घटैत जायत जे राष्ट्रहित मे नहि मानल जा सकैछ ।

आत्मनिर्भरता: सरकारी कामकाज अपन भाषा मे भेला सँ देश आत्मनिर्भर बनैछ आर विदेशी भाषा पर निर्भरता कम भ’ जाइत छैक ।

प्रशासनिक दक्षता: अपन भाषा मे कामकाज भेला सँ प्रशासनिक दक्षता मे सेहो सुधार होइत छैक, कियैक तँ एहि सँ शंका-सन्देह आ त्रुटिक संभावना कम भ’ जाइत छैक ।

जनताक विश्वास: जखन सरकार अपनहि भाषा मे संवाद करैछ त एहि सँ जनताक सरकार पर विश्वास बढ़ैत छैक ।

भाषाक विकास: राजभाषाक रूप मे उपयोग भेला सँ भाषाक विकास सेहो होइत छैक । कियैक तँ एकर उपयोग विभिन्न क्षेत्र मे होइछ आ नव शब्द आ शब्दावली विकसित होइत छैक ।

साक्षरता मे वृद्धिक सर्वोपरि माध्यमः शिक्षाक माध्यम – कम सँ कम प्राथमिक शिक्षाक माध्यम मातृभाषा मे होयत त साक्षरता मे वृद्धि अवश्यम्भावी होयत । शिक्षक केर नियुक्ति सँ रोजगार सेहो भेटत । उपरोक्त समस्त लाभ शिक्षाक सदुपयोग सँ मात्र सम्भव होयत । लोकमानस मे स्वत्व प्रति जागरुकता बढ़त ।

मतदान एवं नेतृत्व चयन मे सहजताः एखन नेपाल मे सर्वाधिक मत गैर-नेपालीभाषी मे बदर हेबाक दुरावस्था छैक, लगभग ५-१०% देल मत नियम-कायदा नहि बुझि पेबाक कारण ‘बदर’ (रद्द) भ’ रहल छैक । एकर रोकथाम लेल मातृभाषा मे मतदाता जागरुकता सँ मात्र सम्भव हेतैक ।

संचार एवं कलाकर्मक संरक्षण आ विकासः मातृभाषा मे परम्परागत सँ आबि रहल संचार व कलाकर्म केर संरक्षण आ विकास सेहो तखनहिं सम्भव हेतैक जखन सरकारी कामकाजक भाषा बनतैक ।

निष्कर्षः

भाषा आयोग द्वारा कयल गेल सिफारिश अनुरूप सब प्रदेश मे बहुभाषिकताक परिकल्पना मान्यता पाबय । स्थानीय निकाय मे प्रदेश सरकार व स्थानीय सरकार द्वारा अपन परिसिमन भीतरक भाषा (मातृभाषा) केँ मान्यता प्रदान करय ।

सरकारी कामकाजक भाषा भेला सँ नहि केवल प्रशासनिक दक्षता आ आम जनताक भागीदारी बढ़ैत अछि, बल्कि ई देशक एकता, सांस्कृतिक पहचान और आत्मनिर्भरता केँ सेहो बढ़ावा दैत अछि ।

कोनो भाषा केँ विखण्डित करबाक आ उपेक्षा करबाक सोच भविष्य लेल अनेकों भयावह दुष्परिणाम आनयवला होयत – से सावधानी समय पर बरतल जाय । अस्तु !

हरिः हरः!!

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