बाढि आ काव्य – कमला नदीक ओ जबानीकाल
साहित्य – सत्य नारायण झा हमरा गामक पूब कमलाक धार छैक । आब त एहि धारक कोनो अस्तित्व नहि छैक मुदा हम जखन नेना रही तखन एहि धारक बाढ़ि सँ लोक त्रस्त रहैत छल । ओ भीषण क्षण एखनो केखनो कय मोन परि जाइत अछि त देह सिहरि जाइत अछि । चारि मास लोक एहि … बाढि आ काव्य – कमला नदीक ओ जबानीकाल









