रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्जीक समुद्र पार जायब
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुन्दरकाण्ड आरम्भ – पंचम सोपान-मंगलाचरण श्लोक : शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥१॥ शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाण सब सँ परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देनिहार, ब्रह्मा, शम्भु आर शेषजी सँ निरन्तर सेवित, वेदान्त द्वारा जानय योग्य, सर्वव्यापक, देवता लोकनि मे सबसँ … रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्जीक समुद्र पार जायब





