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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्‌जीक समुद्र पार जायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुन्दरकाण्ड आरम्भ – पंचम सोपान-मंगलाचरण श्लोक : शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्‌। रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्‌॥१॥ शान्त, सनातन, अप्रमेय (प्रमाण सब सँ परे), निष्पाप, मोक्षरूप परमशान्ति देनिहार, ब्रह्मा, शम्भु आर शेषजी सँ निरन्तर सेवित, वेदान्त द्वारा जानय योग्य, सर्वव्यापक, देवता लोकनि मे सबसँ रामचरितमानस मोतीः सुन्दरकाण्ड मंगलाचरण आ हनुमान्‌जीक समुद्र पार जायब

पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका

लेख – अखिलेश कुमार मिश्र पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका हम अपन मंच “दहेजमुक्त मिथिला” पर श्रीमती संगीता मिश्रा जीक लिखल दू तीन टा लेख पढ़लहुँ अछि जाहि मे “महिले महिलाक दुश्मन”, “सिंगल मदर के आंतरिक पीड़ा आ संघर्षक कथा” आ “गृहस्थीक अवलंबा स्त्री शक्ति: दुराचारिणी सं सावधान” आदि अछि। संगीता जी पति-पत्नीक सम्बन्धविक्षेद मे दोसर स्त्री (ओ) के भूमिका

रामचरितमानस मोतीः समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य १. सम्पाती सँ समुद्र कछेर पर भेटि रहल बानर सब केँ ओ बतेलनि – “हम हुनका (सीताकेँ) देखि रहल छी, अहाँ सब नहि देखि सकैत छी, कियैक त गिधक दृष्टि अपार (बड रामचरितमानस मोतीः समुद्र लँघबाक परामर्श, जाम्बवन्त केर हनुमान्‌जी केँ बल याद दियाकय उत्साहित करब, श्री राम-गुण केर माहात्म्य

स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन

लेख – संगीता मिश्र स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन (महिला सच मे दोसर महिलाक दोस्त होइत छथि आ कि दुश्मन? हमर कटु अनुभव) आइ जतेक टूटल-बिखड़ल परिवार देखाइत अछि तेकर जड़ि मे महिलाक भूमिका रहिते टा छैक। आ सब सँ दुखद बात ई जे बेसी केस मे कोनो महिले दोसर महिलाक हक-अधिकार आ इच्छा-मनोरथ विपरीत स्त्री विमर्शः महिले महिलाक दुश्मन

विमर्शः जनकपुर मे ३ दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सवः स्त्री आ दलित विमर्शक आकर्षण

६ जून २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! विमर्श फाउन्डेशन द्वारा यैह ९ जून २०२३ शुक्र दिन सँ ११ जून २०२३ रवि दिन धरि तीन दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सव ‘विमर्श’ केर आयोजन होमय जा रहल अछि। ई आयोजन मिथिला यात्री निवास, जनकपुरधाम, नेपाल मे होयत। विमर्श कार्यक्रमक आरम्भ शुक्र दिन ९ जून २०२३ केँ सन्ध्या ४ बजे सँ विमर्शः जनकपुर मे ३ दिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सवः स्त्री आ दलित विमर्शक आकर्षण

समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार

कष्ट ई ‘कष्ट’ शब्द बजितो या सुनितो, अथवा सोचितो मोन केँ भयभीत करैत अछि, हृदयक धड़कन बढ़ा दैत अछि आ पूरे सिस्टम केँ एलर्ट पर दय दैत अछि। कष्ट शरीर मे सेहो होइत छैक आ मोन-मस्तिष्क मे सेहो। सामान्य सँ अधिक शारीरिक तापक्रम केँ बुखार कहल जाइछ, आ बुखार मे मोन बौएनाय, माथ औनेनाय, शरीर समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार

रामचरितमानस मोतीः गुफा मे तपस्विनी सँ भेंट उपरान्त बानर सभक समु्द्रक कछेर पर पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती गुफा मे तपस्विनीक दर्शन, वानर सभक समुद्र तट पर आयब, सम्पाती सँ भेंट आर बातचीत १. ताकैत-ताकैत बानर सब केँ बड जोर सँ प्यास लागि गेलैक। ओ सब बहुते व्याकुल भ’ गेल। कतहु जल नहि भेटि रहल छलैक। घनगर जंगल मे सब कियो रस्तो बिसरि गेल छल। हनुमान्‌जी रामचरितमानस मोतीः गुफा मे तपस्विनी सँ भेंट उपरान्त बानर सभक समु्द्रक कछेर पर पहुँचब

सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक आत्मकथा

लेख – संगीता मिश्र सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक कथा आजुक स्थिति-परिस्थिति मे गामक शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा भारी सवाल ठाढ़ भेल छैक । एहेन नहि छैक जे गाम-घर मे पढाई करबाक माहौल नहि छैक, लेकिन शहरी परिवेश संग शहरी विद्यालयक एडवान्स्ड शिक्षा प्राप्त कयल लोक लेल करियर बनबय सँ लयकय शहरहि मे सिंगल मदर के आन्तरिक पीड़ा आ संघर्षक आत्मकथा

हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग १३ आ १४

मैथिली धारावाहिक – हम आबि रहल छी – रबीन्द्र नारायण मिश्र हम आबि रहल छी भाग- तेरह/चौदह 13 गंगा आ दीपेंदु चलि जाइत छथि । हम दलानपर ओछाओल पटिआपर ओहिना बैसल रहि जाइत छी । हमर हाथमे दीपेंदुक देल लिफाफा अखनो ओहिना अछि । लिफाफा नीकसँ साटि देल गेल अछि । ओहिमे बेस मोट किछु हम आबि रहल छी – मैथिली धारावाहिक भाग १३ आ १४

रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान १. लक्ष्मणजी द्वारा सुग्रीव, अंगद, तारा ओ हनुमान संग भेंट कय श्री रामजीक काज करबाक खोज-खबरि लेला उपरान्त अंगद आदि बानर सब केँ संग लयकय श्री रामजीक छोट भाइ लक्ष्मणजी केँ आगू करैत हुनकर पाछू-पाछू सुग्रीव हर्षित होइत रामचरितमानस मोतीः श्रीराम-सुग्रीव संवाद आ सीताजी केँ तकबाक लेल बन्दर सभक प्रस्थान