मनन करय योग्य बातः गीताक यथार्थ पाठ
स्वाध्याय मनन करय योग्य बात गीता पाठ केर सत्य स्वरूप – गोलोकवासी सन्त श्री प्रभुदत्तजी ब्रह्मचारी (मैथिली अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) श्री चैतन्य महाप्रभु साँझक समय जंगल दिश घुमय गेल करथि। एक दिन ओ एकटा बगीचा मे गेलाह। ओतय ओ देखलथि जे एक गोट ब्राह्मण आसन लगेने बड़ा प्रेम आ गदगद कंठ सँ गीताक पाठ … मनन करय योग्य बातः गीताक यथार्थ पाठ





