रिंकीक भाग आ भाग्य
लघुकथा – रूबी झा रिंकी के भाइ सब ओकर विवाह सोना टुकड़ी खेत बेचिकय कयलनि। कहलैथ हुनकर बड़का भाइ जे ईहो जँ बेटा रहितय तऽ कि हिस्सा नहि लीतय! सैह सोचि एकरा हिस्साक खेत बेच देलियैक। बहुत धूमधाम सँ विवाह सम्पन्न भेलैक। भरि साल पावैन-तिहार होइत सोझे साले दुरागमन भेलैन रिंकी के। जतेक ओरियान रहैन … रिंकीक भाग आ भाग्य








