मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अरण्यकाण्ड – चारिम अध्याय रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश ।चौपाइ। शैलशृङ्ग सम सन एकटा गृद्ध । देखलनि राम बाट पर वृद्ध ॥१॥ मुनि-भक्षक राक्षस सन लाग । असुआयल अछि तैँ नहि जाग ॥२॥ लक्ष्मण धनुष हाथ कय देब । चटपट प्राण हिनक हम … मिथिलाभाषा रामायणः अरण्यकाण्ड चारिम अध्याय – रामजीक जटायु सँ भेंट तथा लक्ष्मणजी केँ ज्ञानोपदेश






