रामचरितमानस मोतीः राममय जगत केर वन्दना
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ५. रामरूप सँ जीवमात्र केर वंदना रामचरितमानस मोती अन्तर्गत मंगल आचरण माने कोनो कार्यारम्भ पूर्व विनीत स्वर (वचन) सँ अपन इष्टदेव, गुरुदेव, श्रेष्ठजन आदि केँ प्रणाम करबाक क्रम मे छी। तुलसीदासजी सर्वप्रथम परमपिता परमात्मा केँ विनय करैत गुरुजन, ब्राह्मण, संत, असंत आदि केँ प्रणाम कयलनि अछि। आर … रामचरितमानस मोतीः राममय जगत केर वन्दना





