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प्रवीण नारायण चौधरी

गीताः सृष्टिक आदि सँ परंपरा सँ आबि रहल अछि ई गूढतम् ज्ञान

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे…. कर्मयोग केर समस्त सिद्धान्त बतबैत भगवान् द्वारा मनुष्यक मूल शत्रु काम आर क्रोध कहल गेल, निश्चयपूर्वक एहि दुइ केँ मारबाक संपूर्ण प्रक्रिया बतबैत मारबाक लेल कहल गेल…. आर आगू चारिम अध्याय मे संन्यास योग पर विवेचना आरम्भ…) भगवान् कहलनि, इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्। विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्॥४-१॥ एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो गीताः सृष्टिक आदि सँ परंपरा सँ आबि रहल अछि ई गूढतम् ज्ञान

डा. चन्द्रमणिक टटका रचना “मिथिला राज”

मिथिला राज ********** – डा. चन्द्रमणि झा हिम गंगा गंडकी बंग के मध्यक अछि जे भाग रहय देब ने बन्हकी चाही हमरा मिथिला राज। अपन राज्य उद्योग लगायब भेटत सबके काज होयत मैथिली राजक भाषा अपन जोगायब पाग। सात दशक बीतल आज़ादी के नहि टूटल निन्न कहाँ गेल प्रस्ताव केंद्र केँ मिथिला राज्य हो भिन्न। डा. चन्द्रमणिक टटका रचना “मिथिला राज”

युवा कवि – गीतकार रौशन मिश्राक दुइ लेटेस्ट रचना

विशिष्ट युवाः परिचय युवा कवि, गीतकार, लेखक तथा अभियानी रोशन मिश्रा, दहेज मुक्त मिथिला – महाराष्ट्र सचिव – प्रकाश कमती, मुम्बई। जनबरी २४, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! (१) किछ नव त किछ पुराण होइ छै किछ नीच त किछ महान होइ छै सब किछ बुझितो में लोक आइ एहन किया अज्ञान होइ छै जिनगी के खेल युवा कवि – गीतकार रौशन मिश्राक दुइ लेटेस्ट रचना

करुणा झा द्वारा आन्दोलन मे गंभीर घायल बेलचन केँ आर्थिक मदद

बिद्यानन्द बिक्की, राजविराज। जनबरी २४, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! २ सौ ५० वरिषसँ राज्य पक्षक नीति आ दमन सँ पीडित रहल मधेश आ मधेशी समुदाय केर अधिकार प्राप्तिक हेतु जारी मधेश आन्दोलन मे पुलिसक गोली लागि गम्भीर घायल भेल सप्तरीक राजविराज नगरपालिका–७ रहनिहार भुवनेश्वर मण्डल ‘बेलचन’ तथा पीडित परिवारकेँ शनिदिन साहित्यकार तथा समाजसेवी करुणा झा द्वारा करुणा झा द्वारा आन्दोलन मे गंभीर घायल बेलचन केँ आर्थिक मदद

बेचन महतोक मैथिली कविता – सीधे कतार सँ लिखि पठौला

नै स्वागत नै बिदाई (कविता) परम्परा केर अकास मे नियति के सुशासनक चक्की मे पिसबैत आँटा ब्यस्त समय के बेलना स’ बेला रहल ई मनक रोटी मानव धर्म के ताबा मे सेका रहल ई तन बोली के नमक पसिना के तेल पित्तक मिरचाई नियतिक शिलापर रगड़ा रहल बिचारक चटनी केर स्वाद अनुपम लाइग रहल अछि एहि मरुभूमि मे! ओमहर बेचन महतोक मैथिली कविता – सीधे कतार सँ लिखि पठौला

भगवान् केर पूजा करब-करायब छोड़ि बन्दूक आर हिंसा मे ब्राह्मण समाज

मैथिल ब्राह्मण समाज – हथियार आ अपराधिक गतिविधि किछु दिन पूर्वे जखन दरभंगा मे दुइ जन इन्जिनियर केर हत्याक बात सोझाँ आयल तऽ राजनीति कएनिहार अपना तरहें ओकरा ‘जंगलराज’ केर वापसीक बात कहैत मुख्य मुद्दा सँ दोसरे दिशा मे लऽ जेबाक काज कएने छल। बाद मे छानबीन सँ उजागर तथ्य सँ पता चलल जे संतोष भगवान् केर पूजा करब-करायब छोड़ि बन्दूक आर हिंसा मे ब्राह्मण समाज

नेपालक संविधान मे संशोधन, मात्र दुइ मुख्य मांग केर संबोधन

घोषणा भेलाक चारि महिना मे संविधान संशोधन तराई/मधेशमे निर्वाचन क्षेत्र ८० पहुँचत राज्यक निकायमे समानुपातिक समावेशी समाचार साभारः कान्तिपुर दैनिक, बालकृष्ण बस्नेत माघ ९, २०७२- संविधानसभा द्वारा बनायल गेल नव संविधान ४ महिना बाद पहिल बेर काल्हि शनि दिन संशोधन भेल अछि । आन्दोलनरत मधेशी आर थारु समुदायक माँग सम्बोधन करबाक लेल सरकार द्वारा प्रस्तुत कैल समानुपातिक समावेशी तथा निर्वाचन नेपालक संविधान मे संशोधन, मात्र दुइ मुख्य मांग केर संबोधन

बघवा गाम – सहरसा टा नहि सौंसे मिथिलाक एक विलक्षण गाम

परिचयः विशिष्ट गाम ‘बघवा’ केर – भारत भूषण राय बघवा हमर सबहक जान, एकरा बिना हमरा सबहक कोनो अस्तित्व नहि अछि। बिहार राज्य केर मिथिला क्षेत्र मे कोसी नदीक बेसिन मे बसल बघवा गाम सहरसा जिला मुख्यालय सँ २२ किलोमीटर केर दूरी पर अवस्थित अछि। ई गाम अपन शिक्षा संस्कार आ विद्वान सबहक कारण सँ पुरे बघवा गाम – सहरसा टा नहि सौंसे मिथिलाक एक विलक्षण गाम

मिथिलाक माटि सँ बालीवुड सिने सह हास्य अभिनेता ‘गोविन्द पाठक’

साक्षात्कारः कलासंपन्न बालीवुड कलाकार तथा लाफ्टर शो हिरो ‘गोविन्द पाठक’ सँ हालहि मुम्बई मे संपन्न अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनक ऐतिहासिक मंच पर प्रस्तुत कलासंपन्न मैथिल कलाकार – अभिनेता गोविन्द पाठक केर हास्य सँ उपस्थित दसों हजार मैथिल जनमानस सँ आनन्दविभोर भऽ गेल छलाह। श्री पाठक केर कलाकारी केर चर्चा चौतर्फा चलि रहल अछि। एहि बीच हिनका मिथिलाक माटि सँ बालीवुड सिने सह हास्य अभिनेता ‘गोविन्द पाठक’

गीताः आत्मारूप आत्मामे अवस्थित मूल शत्रु काम केँ मारू

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे… भगवान् ओहि बलक वर्णन कएलनि जे मनुष्यक मुख्य शत्रु थीक आर यैह सब पर हावी रहैत अछि, कोनो तरहें मानयवला नहि होइछ…. काम आर क्रोध केँ ओ बल कहि ज्ञानीजन पर्यन्त केँ एकर चाप मे होयबाक बात कहलैन, मूढक तऽ बाते छोड़ू। संगहि इन्द्रिय, मन आर बुद्धि एहि शत्रुक गीताः आत्मारूप आत्मामे अवस्थित मूल शत्रु काम केँ मारू