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प्रवीण नारायण चौधरी

किरण आ गुड्डू: रूबी झाक लोकप्रिय लघुकथा

लघुकथा – रूबी झा किरण बेर-बेर अपन माता-पिता सँ कहि रहल छलखिन्ह, माँ-बाबूजी बौआ केँ लऽ जेबैइ तँ लँ जइयौ, लेकिन अहाँ सब राखि नहि पेबइ । असल मे किरण केर माँ-बाबूजी किरण ओतय गेल रहथिन्ह, गुड्डु (किरण केर बेटा)क गर्मी छुट्टी रहनि। आ गुड्डु अपन ईच्छा जतेलखिन्ह मात्रिक जाय केँ नाना-नानीक संग। गुड्डु सात किरण आ गुड्डू: रूबी झाक लोकप्रिय लघुकथा

मृत्युक बाद लोह आ पाथर छुबाक मानवीय मर्म पर वाणीक आवाज

विचार-विमर्श – वाणी भारद्वाज जेना कहल गेल छैक जे कोनो तरहक अनुभव अपना पर बीतत तखने होयत. पिताजीक अचानक मृत्यु हमरा सब केँ शून्य क देने छल. एकदम हस्तप्रत छलहुँ. ऐतेक जिन्दादिल इन्सान एना कोना जा सकैत छैथ? प्रकृति के नियम छैक. तथापि, संस्कार मे जाय सं पहिने गामक काका सब कहि गेलाह, जखन कर्त्ता मृत्युक बाद लोह आ पाथर छुबाक मानवीय मर्म पर वाणीक आवाज

योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार

दृष्टि-विचार – योग्यता आ शुचिता – प्रवीण नारायण चौधरी   कर्मकांड मे कोनो निश्चित कर्म लेल के योग्य आ के अयोग्य होइछ तेकर कय तरहक सीमांकन-पृष्ठांकन आदिक बात जेठ-श्रेष्ठ-विद्वान् कर्मकांडी लोकनि केर मुंहे सुनैत छी। स्वयं सेहो कर्त्ता बनि पिताक मृत्योपरान्त श्राद्धकर्म सँ लैत एकोदिष्ट कर्म, पारवन कर्म, तर्पण, आदि करैत छी।   दरभंगा उर्दू योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार

घरक बरेड़ी शकुन्तला देवी

लघुकथा – रूबी झा मोहनबाबू मात्र पाँच वर्षक छलाह आ हुनक भाय चुनचुन बाबू तेरह वर्षक और शकुन्तला देवी (चुनचुन बाबूक कनियाँ) ग्यारह वर्षक । गाम में हैजाक प्रकोप एलैक आ कतेको घर सून-मसान भऽ गेलैक । कियैक तँ आइ जेकाँ एतेक मेडिकल सांइस ओहि दिन में तरक्की नहि कएने छल । चुनचुन बाबू सेहो घरक बरेड़ी शकुन्तला देवी

मिथिलाक इतिहासः डा. उपेन्द्र ठाकुर (धारावाहिक लेख)

मिथिलाः उत्पत्ति एवं नाम   – डा. उपेन्द्र ठाकुर (प्रसिद्ध इतिहासकार)   प्राचीन भारतक राजनीतिक तथा सांस्कृतिक जीवनमे मिथिलाक महत्त्वपूर्ण भूमिका रहलैक अछि। ई भूमि महान् राजतन्त्र तथा गणतन्त्र सभक उत्थान-पतन देखैत आबि रहल अछि। मानव-चिन्तनक इतिहासमे एकर विलक्षण स्थान छैक। ई भूमि जनक, याज्ञवल्क्य, न्यायसूत्रक प्रणेता गौतम, वैशेषिक दर्शनक जनक कणाद, मीमांसाक प्रस्तोता जैमिनि मिथिलाक इतिहासः डा. उपेन्द्र ठाकुर (धारावाहिक लेख)

एक कर्मठ सुपुत्री द्वारा कर्मठ पिता प्रति कर्मठ संस्मरणः पठनीय आ मननीय लेख

लेख – स्नेहा प्रकाश ठाकुर हमर पिता : एक प्रेरणा पिता त हर बच्चा लेल बरगदक छाहरि समान होइत छथि, लेकिन हमर पिता त सब सँ खास छथि । कियाक त ओ सम्पूर्ण समाज लेल बरगदक छाहरि समान अपना केँ सिद्ध कयलनि आर हुनका प्रति लोक-आस्था सेहो एहि तरहक स्थापित भेल अछि । ओ अपन एक कर्मठ सुपुत्री द्वारा कर्मठ पिता प्रति कर्मठ संस्मरणः पठनीय आ मननीय लेख

किछु प्रश्न जे हर बेटीक मोन मे व्यथा रूप मे विकसित होइत अछि

साहित्य – वाणी भारद्वाज बेटीक मोनक व्यथा ‘हम कोन गाम के छी?’ महिला के सामने सरल आ जटिल प्रश्न. ओतय के जतय हमर वा ओतय के जतय हम विवाह क गेलहुँ, ओतहि के जतय जन्म के बाद लाड प्यार मे राखल गेल वा ओतय जतय बेसी उलहन भेटल, ओतहि के जतय मोनक बात बुझय लेल किछु प्रश्न जे हर बेटीक मोन मे व्यथा रूप मे विकसित होइत अछि

मोटरसाइकिल जे लेब ताहि सँ नीक पारी लिअ दहेज मेः रूबी झाक रोचक लघुकथा

लघुकथा – रूबी झा दलानपर मणिकांत जी केर घटक आयल छलैन बेटा के प्रति। बेटा नौकरी तँ नहि करैत छलखिन्ह, एखन कालेज में पैढते छलखिन्ह। एकटा जमाना रहैक जे बेटाक विवाह बाप आ घर-खनदान के नाम पर भऽ जाइक, ओहि जमानाक कहानी हम बता रहल छी अहाँ लोकनि केँ। आर, ओहि कारण बहुत कन्या आ मोटरसाइकिल जे लेब ताहि सँ नीक पारी लिअ दहेज मेः रूबी झाक रोचक लघुकथा

सोनदाइ केर विवाह

लघुकथा – वाणी भारद्वाज सोनदाइ केर विवाह पिताजीक अचानक देहान्त भ गेलन्हि। आब सोन दाइ केर विवाह कोना होयत? कतय सं खर्च लेल पाइ आयत? पिताजी छलखिन्ह त अफसर मुदा पाइ जमा नहि कय गेलथिन्ह. घरक जिम्मेदारी भाइ पर आबि गेल. माँ केँ पेन्सन आ भाइ केर वकालत मे कनी-मनी भेल पाइ सं घर चलैत सोनदाइ केर विवाह

विद्यापतिक कर्मभूमि देवकुली मे बनतनि महाकविक प्रतिमा, समिति गठन कयल गेल

मुरारीकुमार झा ‘पुरातत्व’, देवकुली, दरभंगा। २५ अगस्त २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! देवकुली में कवि कोकिल विद्यापति प्रतिमा अनावरण समिति केर भेल गठन आइ दिनांक 25/08/2019 केँ “कवि कोकिल विद्यापति प्रतिमा अनावरण समिति” केर प्रथम बैठक कवि कोकिल विद्यापति केर कर्मभूमि और मिथिला केर राजधानी देवकुली स्थित वर्धमानेश्वर नाथ महादेव मंदिर प्रांगण मे श्री संतोष कुमार झा विद्यापतिक कर्मभूमि देवकुली मे बनतनि महाकविक प्रतिमा, समिति गठन कयल गेल