रामचरितमानस मोतीः भरत केर आगमन आ शोक
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक १. बाजार आ रास्ता देखल नहि जाइछ, मानू नगर मे दसों दिशा मे दावाग्नि लागल रहय! पुत्रक अबाय सुनिकय सूर्यकुलरूपी कमल लेल चाँदनीरूपी कैकेइ बहुत हर्षित भेलीह। ओ आरती सजा आनन्द सँ भरल उठिकय दौड़लीह आ दरबज्जे पर भेटिकय भरत-शत्रुघ्न केँ महल … रामचरितमानस मोतीः भरत केर आगमन आ शोक




