कर्म-कर्तव्य प्रति सब केँ सजग होयब अत्यावश्यक
आइ जे दुइ गोट श्लोक ‘सुभाषितानि’ सँ अपने सभक बीच रखबाक मोन भेल अछि ताहि दुनू मे हमरा सब केँ पुनः अपना-अपना वास्ते एकटा नीक कर्तव्यबोध भेटैत अछि। देखू – यः पठति लिखति पश्यति परिपृच्छति पंडितान् उपाश्रयति। तस्य दिवाकरकिरणैः नलिनी दलं इव विस्तारिता बुद्धिः॥ भावार्थ : जे पढ़ैत अछि, लिखैत अछि, देखैत अछि, … कर्म-कर्तव्य प्रति सब केँ सजग होयब अत्यावश्यक








