समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार
कष्ट ई ‘कष्ट’ शब्द बजितो या सुनितो, अथवा सोचितो मोन केँ भयभीत करैत अछि, हृदयक धड़कन बढ़ा दैत अछि आ पूरे सिस्टम केँ एलर्ट पर दय दैत अछि। कष्ट शरीर मे सेहो होइत छैक आ मोन-मस्तिष्क मे सेहो। सामान्य सँ अधिक शारीरिक तापक्रम केँ बुखार कहल जाइछ, आ बुखार मे मोन बौएनाय, माथ औनेनाय, शरीर … समाजक लोक मे दोहरा चरित्रः दोसरक कष्ट प्रति असंवेदनाक विचित्र अमानवीय व्यवहार




