कतय जा रहल अछि मानव
विचार – प्रवीण नारायण चौधरी आदरणीय माय! अहाँक ई कविता मानव संसारक अधुनातन अवस्था मे पुरान संस्कृति केँ जियल लोकक वितृष्णा केँ जहिनाक तहिना राखि रहल अछि। एक बेर हमरो पाठक लेल डा. शेफालिका वर्माक ई कविता केँ पढबाक लेल कौपी कय केँ अपन विचारक संग सम्प्रेषित कय रहल छी – नहि जानि … कतय जा रहल अछि मानव









