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प्रवीण नारायण चौधरी

नकारात्मक शक्ति केँ दंडित करू, ‘इग्नोर करू’ कहबाक दिन लैद गेल

सम्पादकीय, मई १७, २०१७.  …से हमरा कोनो कि कुत्ता कटने अछि?….   एकटा अति-प्रचलित गाथा सुनबाक लेल भेटैत अछि – अपना सभक मिथिला समाज मे गोटेक लोक अत्यन्त विचित्र स्वभावक मालिक होएत अछि। अहाँ उपकारो करैत रहबैक त १०० तरहक प्रश्न अहींपर ठाढ करत। ओ स्वयं सेहो ओतेक उपकार अहाँ सँ बेसी नीक ढंग सँ नकारात्मक शक्ति केँ दंडित करू, ‘इग्नोर करू’ कहबाक दिन लैद गेल

कथाः ठकविद्या

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी ठकविद्या   मास्टर साहेबक आदति छलन्हि जे कक्षा मे अबिते देरी चपरासी बिकाउ केँ कहथिन जे छड़ी लेने आबे। एक त छात्र सब हुनका सँ ओहिना डराएत छल, ताहि पर सँ ओ जानि-बुझि कक्षा मे प्रवेश सँ ठीक पहिने चिकैरकय कहथिन, “ऐ बिकाउ, छड़ी लेने आउ!” हुनकर छड़ियो अयली-बयली नहि कथाः ठकविद्या

कबिलपुर गामक यथार्थ कबिलताइः २० मिनट मे हेडफोन निर्माण सँ विश्व रेकर्ड ठाढ

आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी सुकर्मे नाम या कुकर्मे नामः सन्दर्भ गाम ‘कबिलपुर, लहेरियासराय’   हरेक गाम केर मर्यादा विख्यात आ कुख्यात दुनू तरहक लोक सँ होएत छैक। गामक इतिहास आर ऐतिहासिक पुरुष सँ प्रतिष्ठाक मापन अथवा अन्दाज (कल्पना) कएल जाएछ। यदि बेसी नकारात्मक लोक भेटत त निश्चिते गामहुँ केर पहिचान नकारात्मक रूप सँ मन-मस्तिष्क कबिलपुर गामक यथार्थ कबिलताइः २० मिनट मे हेडफोन निर्माण सँ विश्व रेकर्ड ठाढ

मिथिला निर्माणक सूत्रः कर्मठता, मर्दक बेटा ओ जे बाजय से कय केँ देखाबय

सम्पादकीय, मई १६, २०१७. दहेज मुक्त मिथिला – माँगरूपी दहेजक प्रतिकार करू, स्वयं दहेज मुक्त बनू, अपने स्वच्छ त दुनिया स्वच्छ, बेटा-बेटी दुनू केँ एक्के सम्मान करू आदि नाराक संग विगत ६ वर्ष सँ गतिमान अभियान मिथिलाक वैह मौलिक स्वरूप केँ देखय चाहैत अछि जे यथार्थतः किछुए दसक पूर्व धरि रहल छल। जेना-जेना भौतिक युगक मिथिला निर्माणक सूत्रः कर्मठता, मर्दक बेटा ओ जे बाजय से कय केँ देखाबय

दहेज मुक्त मिथिलाक चिन्तन शिविर बिठौली मे, राष्ट्रीय अधिवेशन २७ अगस्त केँ सहरसा मे होयत

रजनीश शेखर, बेनीपूर । मई १५, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! दहेज मुक्त मिथिलाक राष्ट्रीय अधिवेशन अगस्तमे सहरसामे दहेज मुक्ति लेल समर्पित संगहि भारत ओ नेपालमे मैथिली भाषा संस्कृति संरक्षण आ संवर्धन लेल कार्यरत संस्था दहेज मुक्त मिथिलाक वृहत् शिविरक आयोजन दरभंगा जिलाक बिठौली स्थित माहेश्वरनाथ मंदिर प्रांगणमे भेल । प्रसिद्ध गीतकार श्याम बिहारी राय सरसक अध्यक्षता दहेज मुक्त मिथिलाक चिन्तन शिविर बिठौली मे, राष्ट्रीय अधिवेशन २७ अगस्त केँ सहरसा मे होयत

हैरदाबाद मे मिथिला विभूति पर्व संपन्न, स्मृति मे आनल गेला धूमकेतु ओ भोला लाल दास

विकाश वत्सनाभ, हैदराबाद । मई १५, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! हैदराबाद-सिकन्दराबाद नगर द्वय मे मैथिली साहित्यिक चेतनाक प्रतिनिधि मंच ‘देसिल बयना’क मैथिली दधीचि भोला लाल दास तथा मैथिली साहित्यक जाज्वल्यमान नक्षत्र धूमकेतु पर केंद्रित एहि वर्ष तेसर बेरुक मिथिला विभूति पर्व दिनांक १४/०५/२०१७ केँ हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालकय सभागार मे भव्यताक संग संपन्न कएल गेल अछि ।   हैरदाबाद मे मिथिला विभूति पर्व संपन्न, स्मृति मे आनल गेला धूमकेतु ओ भोला लाल दास

मैथिली संचारकर्म मे नव क्रान्ति, यूट्युब मार्फत विषयपर मंथन, जेएम न्युज आकर्षक डेग

संपादकीय, मई १५, २०१७. मैथिली-मिथिला आन्दोलन सार्थक रूप सँ गतिशील   पैछला ८ वर्ष मे सोशल मीडिया मार्फत मैथिली भाषा व मिथिलाक ऐतिहासिक-पौराणिक-सांस्कृतिक पहिचान प्रति जागरुकता दिन ब दिन नव-नव रूप मे प्रगतिक मार्ग पर अग्रसर देखाएत अछि। परंपरावादी मीडिया आ संचारकर्म मे एकर घोर उपेक्षाक कारण पूर्व मे कएल गेल बहुत रास महत्वपूर्ण प्रयास मैथिली संचारकर्म मे नव क्रान्ति, यूट्युब मार्फत विषयपर मंथन, जेएम न्युज आकर्षक डेग

नारी आ समाजः मिथिलाक युवा विचारक राजनक मत

विचार – मायानन्द झा ‘राजन’, गोलमा, सहरसा (हालः गुआहाटी सँ) हालहि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली गैंग रेप केर आरोपी केँ फाँसीक सजा सुनाओल गेल । ओकर पक्ष आ विपक्ष में लोक सब अपन-अपन तर्क दैत अछि । विपक्षक अनुसार ई फैसला जनभावनाक दबाव में लेल गेल अछि । दोषी केँ फाँसी द देने कि रेपक नारी आ समाजः मिथिलाक युवा विचारक राजनक मत

पर्यावरण रक्षा हरेक मानवक प्रमुख जिम्मेवारी

विचार – राज कुमार झा, मुम्बई “पर्यावरण रक्षार्थ संकल्पित होइ” अनेकों प्रकारक वातावरणीय परिवर्तनसँ पर्यावरणक रक्षा करब मानव समाजक अनिवार्य दायित्व बनैत अछि । एक समय होइत छल जखन ऋतु परिवर्तनक उपरांत प्रकृति प्रदत्त वातावरणक सुखद आनंद स्वतः मानव समाज प्राप्त करैत छलाह । शनैः- शनैः मानव अप्पन भौतिक सुखेच्छाक पूर्ति निमित्त प्रकृति प्रदत्त अलौकिक पर्यावरण रक्षा हरेक मानवक प्रमुख जिम्मेवारी

महाकवि विद्यापति सँ भेटल प्रेरणा

संपादकीय – मई १०, २०१७. सबसँ पहिने त ई कहि दी जे महाकवि कोकिल विद्यापतिक नामहि सुमिरन एतेक सुखदायी अछि जेना हम हिनका स्मरण नहि कय स्वयं परमपिता परमेश्वरक ध्यान कय रहल छी, सचमे भगवान् समान विद्यापतिक ध्यान काज हमर मानसपटल मे काज करैत अछि। अपन नित्य दैनन्दिनी मे करदर्शन, विष्णुप्रिया (धरती माता) केँ प्रणाम महाकवि विद्यापति सँ भेटल प्रेरणा