अन्न बिना सब सुन्न-मशान!!
हमहुँ रोपब धान – प्रवीण नारायण चौधरी बाबु! तूँ खेत पर काज करैत छह, हमहुँ तोरा संग दैत छियह! अन्न उपजि तऽ भूख मरैत छह दुनियाक पेट किसान भरैत छह! बाबु! तूँ खेत पर …. थाल पाइन मे धानक बिहैन रोपि-रोपि जे सपना देखैत छह बरखा पानी खाद कमौनी बड मेहनति सँ धान … अन्न बिना सब सुन्न-मशान!!









