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प्रवीण नारायण चौधरी

दिल्‍ली मे मैथिल पत्रकार स्‍नेह मिलन कार्यक्रम संपन्‍न

मैथिली जिन्दाबाद ब्युरो, दिल्ली। अक्टुबर १२, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि दुपहर मे नव दिल्ली स्थित प्रेस क्लब मे मैथिल पत्रकारक सपरिवार जुटानी भेल। अवसर छल – मैथिल पत्रकार स्ने‍ह मिलन। एहि मे नीक संख्या मे प्रिंट, इलेक्टॉनिक आ वेब माध्यमक नामचीन आ युवा पत्रकारक उपस्थिति उल्लेखनीय रहल। कहबी अछि जे मैथिल बुद्धिजीवी आ भोजनभट्ट होइ दिल्‍ली मे मैथिल पत्रकार स्‍नेह मिलन कार्यक्रम संपन्‍न

पटनाक अकास तर बैसकी – ‘साहित्यिक चौपाड़ि’ पर ‘नवलश्री’ केर संस्मरण-रिपोर्ट

!!!बुद्धक प्रतिमा बनल गवाह “साहित्यिक चौपाड़ि”क तेसर बैसारक!!! – पंकज चौधरी, पटना काल्हि (रवि दिन, तिथि ११-१०-२०१५) पटना टीशनसं सटल बुद्धा स्मृति पार्कमे “साहित्यिक चौपाड़ि”क तेसर बैसार सफलतापूर्वक संपन्न भेल (विदित हो कि ई बैसार अगस्त २०१५ सं मासे-मास कएल जा रहल अछि). पछिला दुनु बैसार जतय गांधीजीक प्रतिमा लग कएल गेल छल ओतहि एहि पटनाक अकास तर बैसकी – ‘साहित्यिक चौपाड़ि’ पर ‘नवलश्री’ केर संस्मरण-रिपोर्ट

साहित्यिक चौपाड़ि केर तेसर बैसकी पटना मे संपन्न

बालमुकुन्द पाठक, पटना। अक्टुबर १२, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! बुद्धा स्मृति पार्क पटनामे ‘साहित्यिक चौपाड़ि’क तेसर बैसकी काल्हि रवि दिन ११ अक्टुबर केँ समपन्न भेल. एहि बैसकी मे कथाकार अशोक, श्याम दरिहरे, नवलश्री पंकज, नितेश मिश्र, रघुनाथ मुखिया, गुंजनश्री, संजय झा उपस्थित छलाह. बैसकीक आरंभमे नवलश्री पंकज अपन गजल ‘धऽ जे नांगरि चलल अगुआयल जाय छै..छलै साहित्यिक चौपाड़ि केर तेसर बैसकी पटना मे संपन्न

दुर्गा शक्ति केर देवी: हुनका लेल पशुबलि देनाइ कतेक उचित?

आलेख  – करुणा झा फूल केँ फूलाय मे, सुर्योदय मे, नदि केर प्रवाह मे, बरखा केर बुन्द मे, दुभि पर मोती जकाँ ओ, चिडै चुनमुनी केर चुनमुन मे, बाल-पशु केर उछल-कूद मे, मेनाक बच्चा केर किलोल मे, सब मे जीवन अछि । सब मे प्रकृति द्धारा देल गेल वरदान अछि । सब मे भगवान् अछि, सब दुर्गा शक्ति केर देवी: हुनका लेल पशुबलि देनाइ कतेक उचित?

मैथिलीक बाजार पर भोजपुरी-हिन्दीक अतिक्रमण

कोइ काहू मगन – कोइ काहू मगन!! प्रसंग: यह मैथिली नहीं, भोजपुरी है जी – एकटा मैथिली गीत सुनि रहल लोकक मुंहे सुनल बात…… नीक-नीक लोकक यैह अछि हाल। मैथिली केँ टाँग-हाथ तोड़िकय अपना केँ भोजपुरी प्रमाणित करबाक कुत्सित कार्यक वृत्तान्त कतेको भेटैत अछि। बाजार मूल्य भोजपुरीक बेसी छैक, सहारा नंगापन-फूहरता जे किछु हो। मैथिली मैथिलीक बाजार पर भोजपुरी-हिन्दीक अतिक्रमण

काज करबाक आनन्द: वर्क इज फन

काज करबाक आनन्द (नैतिक कथा) – प्रवीण नारायण चौधरी बहुत पहिनहि एकटा धिया-पुता केँ पढयवला कथा पढने रही ‘वर्क इज फन’ – आइ विशेष स्थिति मे एहि कथाक सार केँ लिखि रहल छी। डेविड नामक एकटा बालक अपन आन्टीक परिवार मे रहैत पढाई कय रहल छल कोनो शहर मे, जेना होएत आयल छैक जे कोनो-कोनो काज करबाक आनन्द: वर्क इज फन

मैथिली बिहार केर मातृभाषा नहि वरन् मृतभाषाक रूप मे गानल जाएछ

अखिल भारतीय मिथिला पार्टीक महासचिव रत्नेश्वर झा द्वारा मिथिला क्षेत्र मे भोजपुरी भाषा मे देल गेल भारतीय चुनाव आयोग केर प्रचारवला होर्डिंग पर सख्त ऐतराज केर संग मैथिली एवं मिथिला अभियान सहित आम मैथिलीभाषी प्रति आक्रोश प्रकट कैल गेल जे आखिर मिथिलहि केर बेटी शारदा सिन्हा केर फोटो आ कैप्सन अपील मे भोजपुरी भाषा केर मैथिली बिहार केर मातृभाषा नहि वरन् मृतभाषाक रूप मे गानल जाएछ

चैनपुर आइडोल केर अडिसन भेल संपन्न: कुल १४० मे सँ २१ प्रतियोगीक चुनाव फाइनल लेल भेल

कुमुदानन्द झा ‘प्रियवर’, चैनपुर (सहरसा)। अक्टुबर ११, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ क्रान्तिभूमि सहरसाक आदर्श गाम मे ‘चैनपुर आइडोल’ वास्ते राखल गेल अडिसन संपन्न भेल। चैनपुर केर उच्च विद्यालय आ वरिष्ठ नागरिक क्लब मे अडिसन शो राखल गेल छल। चैनपुर २००५ मैट्रीक बैच केर युवा लोकनि एहि प्रतियोगिताक आयोजन कएने छलाह। एहि प्रतियोगिता मे कुल १४० चैनपुर आइडोल केर अडिसन भेल संपन्न: कुल १४० मे सँ २१ प्रतियोगीक चुनाव फाइनल लेल भेल

गाय माता आ वेदान्त: कूव्याख्या सँ बहुचर्चित विषय ‘गोवध’ पर पाण्डित्य दर्शन

गाय माता आ वेदान्त – पं. भवनाथ झा (मैथिली अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) भारत मे प्राचीन काल सँ गाय माता मानल गेल अछि। ऋग्वेद केर प्रथम मण्डल केर 110म सूक्त मे ऋभुदेव केर बड़ाइ करैत कहल गेल अछि जे “हे ऋभुदेव! अहाँ एहेन गाय केँ हृष्टपुष्ट बना देलहुँ जेकर शरीर पर चाम टा बचि गेल छल। अहाँ एकटा बच्छा गाय माता आ वेदान्त: कूव्याख्या सँ बहुचर्चित विषय ‘गोवध’ पर पाण्डित्य दर्शन

मिथिला चौक – दिल्ली: देशक राजधानी मे मैथिल केर असेम्बली हाउस केर परिचय

दिल्लीक मिथिला चौक – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला आ भारतदेशक राजधानी मे अदौकाल सँ गहिंर संबंध रहल अछि। जहिया देशक राजधानी कलकत्ता छल तहियो, ताहि सँ पूर्व मुगलकाल मे आगरा आ बाद मे फेर दिल्ली, मैथिल जनमानस केर आवश्यकता कुशल व्यवस्थापन हेतु सब दिन राज्य संचालक केँ पड़ल आ अपन कुशाग्रता, गंभीरता आ वैचारिक पूर्णताक कारणे मिथिला चौक – दिल्ली: देशक राजधानी मे मैथिल केर असेम्बली हाउस केर परिचय