विजयादशमी संग जुड़ल रहैछ बहुते रास अन्तर्भावना: बचपनक संस्मरण
बचपन आ दुर्गा पूजा अन्हर भोरे उठि संगी-संङोर के उठबैत दौड़ा-दौड़ी शुरू! बाबी-काकी-माय-बहिन सभ अपन फूलबारीके रक्षा करैत छथि आ छौंड़ा-मांरड़ि सभ दौड़ि पड़ैछ सार्वजनिक फूलबारी सँ विभिन्न तरहक फूल तोड़ि फूलडाली भरि-भरि भगवती घर केँ पूर्ण सुवासित राखय लेल। जेना जीवनक सभ सँ पैघ लक्ष्य के प्राप्तिसँ केकरो खुशी होइत छैक, किछु तहिना धिया-पुता … विजयादशमी संग जुड़ल रहैछ बहुते रास अन्तर्भावना: बचपनक संस्मरण









