Search

प्रवीण नारायण चौधरी

विजयादशमी संग जुड़ल रहैछ बहुते रास अन्तर्भावना: बचपनक संस्मरण

बचपन आ दुर्गा पूजा अन्हर भोरे उठि संगी-संङोर के उठबैत दौड़ा-दौड़ी शुरू! बाबी-काकी-माय-बहिन सभ अपन फूलबारीके रक्षा करैत छथि आ छौंड़ा-मांरड़ि सभ दौड़ि पड़ैछ सार्वजनिक फूलबारी सँ विभिन्न तरहक फूल तोड़ि फूलडाली भरि-भरि भगवती घर केँ पूर्ण सुवासित राखय लेल। जेना जीवनक सभ सँ पैघ लक्ष्य के प्राप्तिसँ केकरो खुशी होइत छैक, किछु तहिना धिया-पुता विजयादशमी संग जुड़ल रहैछ बहुते रास अन्तर्भावना: बचपनक संस्मरण

कर्म-योग तथा ज्ञान-योग केर भेद: गीता

(कर्म-योग तथा ज्ञान-योग केर भेद) अर्जुन उवाच ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन। तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥ (१) भावार्थ : अर्जुन कहलखिन – हे जनार्दन! हे केशव! जखन अहाँ निष्काम-कर्म मार्ग केर अपेक्षा ज्ञान-मार्ग केँ श्रेष्ठ कहैत छी तखन फेर हमरा एहि भयंकर कर्म (युद्ध) मे कियैक लगाबय चाहैत छी? (१) व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे । तदेकं वद निश्चित्य कर्म-योग तथा ज्ञान-योग केर भेद: गीता

ईंग्लिश पुतोहु आ पाठक मालिक

नैतिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी पाठक परिवार ओहि गामक शान छलैक। पूरा इलाका मे जँ केकरो कोनो तरहक आवश्यकता होइत छल तऽ लोक पाठक परिवार केर बड़का मालिक लंग आबि हुनका सँ अपन पीड़ाक वर्णन कय समाधान लैत छल। अपन गाम केर लोकक समस्या केँ तऽ सहजहि बड़का मालिक पाठकजी अपन प्रतिदिनक रूटीन मुताबिक ईंग्लिश पुतोहु आ पाठक मालिक

घुरपिच्ची राजनीतिक ड्रामा आ नेपाली जनमानसक दु:खक दिन

विशेष संपादकीय आइ सँ नवरात्रा प्रारंभ भऽ गेल अछि। नेपाली जनमानस शायदे एहेन उदासीक माहौल मे कहियो दशैं-तिहार-छैठ मनेने होयत। हमरा होश मे पिछला ३० वर्षक अनुभव मे एहेन अवस्था नहि देखल गेल छल। मेहनत-मजदूरीक भरोसे जीवन-यापन कएनिहार कतेको परिवार केर आय पर प्रतिकूल असर पड़ल, उद्योग-व्यापार पर अत्यन्त नकारात्मक असर पड़ल, कतहु खुशियाली नहि घुरपिच्ची राजनीतिक ड्रामा आ नेपाली जनमानसक दु:खक दिन

काटि लेलकय मैथिली के कीड़ा

मैथिली कीड़ा (गीति कविता) – प्रवीण नारायण चौधरी काटि लेलकय – काटि लेलकय – काटि लेलकय भैया हौ मैथिली के कीड़ा देखहक काटि लेलकय भैया हौ!! गेल रहियै नोकरी करय – दिल्ली भदोही भेटल नहि मैथिल कतहु – बाट न बटोही सुनिकय विदापति उत्सव होऽऽऽ-२ गाम भेटल मिथिला हौ!! मैथिली के कीड़ा देखहक काटि लेलकय काटि लेलकय मैथिली के कीड़ा

मानवीय सहयोग केर अपील: मैथिली स्रजक डा. कुमार पद्मनाभ

बंगलौर, अक्टुबर १३, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! एकटा मर्मस्पर्शी अपील काल्हि सँ फेसबुक पर वायरल भऽ रहल अछि। आइआइटियन डा. कुमार पद्मनाभ जिनक बहुत रास योगदान मैथिली भाषा एवं साहित्य प्रति कैल गेल अछि, ओ पत्नीक स्वास्थ्य गंभीर अवस्था मे रहबाक जानकारी करबैत ‘शीघ्रातिशीघ्र मानवीय सहयोग’ केर अपील केलनि अछि। हुनकर पोस्ट जे अंग्रेजी मे निम्न मानवीय सहयोग केर अपील: मैथिली स्रजक डा. कुमार पद्मनाभ

दुर्गा पूजाक पहिल दिन: आध्यात्मिक एवं लौकिक संकल्प हेतु कलशस्थापना

नवरात्राक शुभकामना: कलशस्थापनाक विशेष दिवस पर कलशस्थापनाक दिन आइ समस्त मैथिल एकताक कलश केर स्थापना करैत आपसी खण्डी-बुद्धिरूपी दानवक संहार केर संकल्प लैत आगामी समय में शक्तिस्वरूपा बेटी लेल कहियो किनको सौदाबाजी केँ मंजूर नहि करबाक वचनबद्ध बनी, केओ किनको बेटी केँ अपन घर केर बधुक रूप मे गृहप्रवेश करेबाक लेल कहियो माँगिकय कोनो द्रव्य ग्रहण नहि करब दुर्गा पूजाक पहिल दिन: आध्यात्मिक एवं लौकिक संकल्प हेतु कलशस्थापना

गीता स्वाध्याय सर्वोत्तम: व्यस्त लोकक वास्ते स्वामी शिवानन्द रचित संछिप्त गीता (अंग्रेजी)

BHAGAVAD GITA FOR BUSY PEOPLE By SRI SWAMI SIVANANDA A DIVINE LIFE SOCIETY PUBLICATION First Edition: 1996 (61,000 copies) World Wide Web (WWW) Edition : 1998 WWW site: http://www.dlshq.org/   This WWW reprint is for free distribution (c) The Divine Life Trust Society   Published By THE DIVINE LIFE SOCIETY P.O. Shivanandanagar—249 192 Distt. Tehri-Garhwal, गीता स्वाध्याय सर्वोत्तम: व्यस्त लोकक वास्ते स्वामी शिवानन्द रचित संछिप्त गीता (अंग्रेजी)

संपन्न भेल पहिल चरणक बिहार विधानसभा चुनाव, ५७% मतदान रिकार्ड कैल गेल: चुनाव आयोग

पटना, अक्टुबर १२, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! संपन्न भेल पहिल चरणक बिहार विधानसभा चुनाव आइ १२ अक्टुबर, २०१५ केँ बिहारक कुल १० जिला मे पहिल चरणक बिहार विधानसभा चुनाव शान्तिपूर्ण ढंग सँ संपन्न होयबाक विज्ञप्ति बिहार चुनाव आयोग द्वारा जारी कैल गेल अछि। कुल ४९ विधानसभा क्षेत्र मे कुल ९३०१ मतदान केन्द्रस्थल पर कुल १३२१२ मतदान संपन्न भेल पहिल चरणक बिहार विधानसभा चुनाव, ५७% मतदान रिकार्ड कैल गेल: चुनाव आयोग

मैथिलीपुत्र प्रदीप आर मैथिली आन्दोलनक क्रान्तिक आरंभ

विशिष्ट व्यक्तित्व ‘मैथिलीपुत्र’ आर हुनक अविस्मरणीय योगदान – उदय शंकर मिश्र, दरभंगा। वर्तमान समय भारतक किछु नामी-गिरामी साहित्यकार लोकनि साहित्य अकादमीक सम्मान लौटेबाक प्रकरण अत्यन्त चर्चा मे देखैत हमहु सहमत छी जे हिनका लोकनि केँ अकादमीक पुरस्कार वापस नहि करबाक चाही। ई सब तथाकथित वामपंथी साहित्यकार बुद्धिजीबी लोकनि छथि। हिनके धारा केर साहित्यकार लोकनि मैथिली मे विद्यापतिक मैथिलीपुत्र प्रदीप आर मैथिली आन्दोलनक क्रान्तिक आरंभ