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प्रवीण नारायण चौधरी

राम-सिया के दूत सुनू हनुमानजी (मैथिली भजन)

मैथिली भजन – विमलजी मिश्र, मैथिली गीतकार ॥जय श्री सीता राम ॥ जय हनुमान॥   राम सिया के दूत, सुनु हनुमान जी, द्वार अहीं कें ठाढ, करै गुणगान छी!!   मंगल मुरत रुप, करू कल्याण जी, चारू जुग मे नाथ, अहीं बलबान छी, हे अंजनी पुत महान, कियै नहि सुनै छी, भक्ति रस के ज्ञान, राम-सिया के दूत सुनू हनुमानजी (मैथिली भजन)

सुच्चा मैथिल केर दिल्ली बैसारः मैथिली-मिथिला प्रति चिन्तन

सुच्चा मैथिल केर बढ़ैत डेग – प्रकाश कमती दिनांक – 03/01/2016 दिन – रविवार, दिल्ली सुच्चा मैथिल टीमक बैसार दिल्लीक साकेत में सम्पन भेल जाहि में मिथिला आ मैथिलक विकास केर विभिन्न पहलू पर विचार-विमर्श भेल संगहि मिथिलाक युगपुरुष जिनका हम सब कियो कुनो ने कुनो रूपे अखनो याद करै छी जेना राजा सलहेस, कारीख महाराज, सुच्चा मैथिल केर दिल्ली बैसारः मैथिली-मिथिला प्रति चिन्तन

मिथिला मखान – मैथिली सिनेमाक नवका आशा

विश्लेषण – सुनीत ठाकुर, एडमिन, हम सब मैथिल छी (फेसबुक ग्रुप) “मिथिला मखान” के ट्रेलर देखलहुँ , बहुत नीक मैथिली सिनेमा के झलक दअ रहल अछि ! मैथिली सिनेमा के एक टा नया ऊंचाई प्रदान करेवाला, एहि मैथिली फिल्म के हृदय सँ स्वागत करबाक चाही ! निर्मात्री बॉलीवुड अभिनेत्री नीतू चंद्रा जी और हुनक भाइ मिथिला मखान – मैथिली सिनेमाक नवका आशा

जियाउ फेर सँ सेना केँ – बनाउ हैसियत मिथिला केर!

“हेलो भैया! हेलो…. हेलो…. हेल्लो!! अरे आवाज नहि सुनाइ छह कि?” “हँ-हँ! आवाज एलौ रोशन आब। बाज न? गाम मे सब ठीक छौक न?” “कपार ठीक रहतऽ! ओ जे सेना तू सब बनेने छलह से कि भेलह?” “कोन सेना?” “अरे वैह… मिथिला राज निर्माण सेना?” “अच्छा! अच्छा! ओ तऽ बच्चे मे बाप बनि गेलैक आ जियाउ फेर सँ सेना केँ – बनाउ हैसियत मिथिला केर!

सिद्ध भूमि पर गिद्ध केर राज

मिथिला पहिने सँ एखन धरि – बस एक नजरि! मिथिलाक लोक-संस्कृति सनातन सभ्य ओ संपन्न रहल अछि। पौराणिक इतिहास मे वर्णित एहि स्थानक चौहद्दी प्रकृति निर्मित आ अडिग-अमिट चिह्न रहल अछि। उत्तर मे हिमालय, दक्षिण सुरसरि गंगा, पूब मे कौसिकी तऽ पच्छिम मे गंडकी धारा। हाल ई मिथिला मैथिलीभाषीक बसोबासक क्षेत्र मुताबिक नेपालक ११ जिल्ला सिद्ध भूमि पर गिद्ध केर राज

दहेज मुक्त मिथिलाक महाराष्ट्र कार्यकारिणीक पुनर्गठन

प्रकाश कमती, मुम्बई। जनबरी ४, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि रवि दिन जनबरी ३ तारीख – दहेज मुक्त मिथिलाक राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज झा केर अध्यक्षता मे संपन्न आम बैसार द्वारा संस्थाक महाराष्ट्र कार्यकारिणीक पुनर्गठन कैल गेल अछि। ई बैसार अपराह्न २ बजे सँ संध्या ५ बजे धैर चलल छल। संस्थाक महाराष्ट्र युनिट केर पूर्व कार्यसमिति द्वारा कैल गेल दहेज मुक्त मिथिलाक महाराष्ट्र कार्यकारिणीक पुनर्गठन

दोहा-कतार मे ‘साँझक चौपारि पर’ केर पाँचम बैसार संपन्न

बिन्देश्वर ठाकुर, दोहा। दिसम्बर ४, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!! दोहा-कतारमे साँझक चौपारि पर केर पाँचम बैसार सम्पन्न भेल अछि। “मातृभाषाक जगेर्णा हमरा सबहक प्रेरणा” मूल नाराक संग बिगत ५ मास सँ निरन्तर रुपमे आयोजना होइत आबि रहल मैथिली काव्य-सन्ध्या अन्तर्गतक कार्यक्रम साँझक चौपारि पर केर पाँचम मासक बैसार १ जनवरी २०१६ बितल शुक्र दिन दोहाक मुन्ताजा दोहा-कतार मे ‘साँझक चौपारि पर’ केर पाँचम बैसार संपन्न

गीताः स्थिरबुद्धि व स्थितप्रज्ञ कोना बनब, ब्रह्मानंद कोना भेटत

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे…. कर्मयोग अर्थात् बंधनहीन कर्म करबाक तौर-तरीका – सर्वोत्तम अभीष्ट पर भगवान् कृष्ण केर सुस्पष्ट संदेश उपरान्त) चूँकि अध्याय दुइ मे गूढ सँ गूढतम् उपदेश आ समस्त गीताक निचोड़ कहल गेल अछि, बेर-बेर पढलो पर बहुत बात अस्पष्ट रहि जाएत अछि, हम एक बेर फेर मात्र अन्वय पर कार्य करब। गीताः स्थिरबुद्धि व स्थितप्रज्ञ कोना बनब, ब्रह्मानंद कोना भेटत

डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन जन्म जयन्ति मधुबनी मे ७ जनबरी केँ

विशिष्ट व्यक्तित्वः मिथिला-मैथिली केँ विश्व पटल पर पहुँचेनिहार डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन  मैथिली भाषा ओ साहित्यक प्रख्यात अभियानी भाइ अजित आजाद हाल मधुबनी मे रहि रहल छथि। अपन पटना प्रवास सँ मिथिलाक मूल धरती पर हुनका एलाक बाद सँ मैथिली भाषा ओ मिथिला संस्कृतिक उत्थान निरंतर प्रगतिशील बनि रहल अछि। एहि क्रम मे आगामी ७ डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन जन्म जयन्ति मधुबनी मे ७ जनबरी केँ

गीताः कर्मयोग आर सर्वोत्तम अभीष्ट पर श्रीकृष्णक स्पष्टोक्ति

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे – भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा सांख्य योग यानि जीव-जीवात्मा केर परिचय आदिक ज्ञानोपदेश करैत जीवलोक मे स्वधर्म प्रति जिम्मेवारी बोध करैत बंधनहीन कर्म करबाक निर्देशनक संग आब ‘योग’ केर ज्ञान देबाक बात कहलैन। कर्म योग केर ज्ञान भेला सँ कर्मबन्धन सँ मुक्ति भेटैत छैक, संगहि कोनो अधूरा प्रयास सेहो व्यर्थ गीताः कर्मयोग आर सर्वोत्तम अभीष्ट पर श्रीकृष्णक स्पष्टोक्ति