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प्रवीण नारायण चौधरी

विश्व कविता दिवस पर अमर कवि व हुनक कविताक स्मरण

संस्मरणः मैथिली कवि सुन्दर झा शास्त्री आ कवि धीरेन्द्र (नेपाल) काल्हि विश्व कविता दिवस थीक। विराटनगर (नेपाल) मे सिर्जनविन्दु द्वारा एहि अवसर पर एक साहित्यिक आयोजन राखल गेल अछि। नेपाली, नेवारी, मैथिली, उर्दू, मारवाड़ी आदि विभिन्न भाषाक दिवंगत कवि लोकनिक कालजयी रचना सबहक प्रस्तुति वर्तमान समयक कवि लोकनि द्वारा कैल जेबाक अछि। एहि आयोजन मे विश्व कविता दिवस पर अमर कवि व हुनक कविताक स्मरण

जनकपुर मे मिनाप करत होरी महोत्सव आ महामूर्ख सम्मेलन

मनीष कर्ण, जनकपुर, चैत ६ गते, २०७२. मैथिली जिन्दाबाद!! प्राचीन मिथिलाक राजधानी जनकपुरधाम मे विगत सऽ चलैत आबि रहल होरीक अवसर पर मिनाप “होरी महोत्सव” आ “महामुर्ख सम्मेलन” आयोजना कऽ रहल अछि।   जनकपुरक धार्मिक आ साँस्कृतिक क्षेत्रमे महत्त्वपूर्ण योगदान देनिहार बहुचर्चित नाट्य संस्था मिथिला नाट्य कला परिषद् “मिनाप” द्वारा दु दिवसीय कार्यक्रमक आयोजना कऽ जनकपुर मे मिनाप करत होरी महोत्सव आ महामूर्ख सम्मेलन

मैथिली जिन्दाबाद द्वारा मिथिलाक गीतनाद चिन्मयक फोटोमे

विराटनगर, १९ मार्च, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! सुश्री शैली सिंह एवं गुरुजन अमर नाथ झा, कुमार गिरिजानन्द सिंह तथा कुमार उदयानन्द सिंह द्वारा प्रस्तुत ‘मिथिलाक गीतनाद सह शास्त्रीय गीत-संगीत साँझ’ विराटनगर केर आरोहण गुरुकुल मे १३ मार्च केँ भव्यतापूर्वक आयोजित कैल गेल छल। एहि महत्वपूर्ण कार्यक्रम मे दैनिक भास्कर केर पुर्णिया रिपोर्टर एवं गायिका शैली सिंह मैथिली जिन्दाबाद द्वारा मिथिलाक गीतनाद चिन्मयक फोटोमे

ग्रह शान्ति केर नीक उपाय

साभारः राम बाबु सिंह, मधेपुर, मधुबनी हिन्दू संस्कार में ग्रह नक्षत्र के विशेष महत्व होयत अछि संगहि एकर जीवन में निक आ बेजा दुनु तरहक प्रभाव होयत अछि जाहि हेतु हमरा सब पूजा अनुष्ठान करैत छी आ जीवन में असामयिक घटना दुर्घटना स मुक्त भ जायत छी। आशा करै छी अपने सभक जीवन भय मुक्त ग्रह शान्ति केर नीक उपाय

दक्षिण भारतवर्षक कैलाशः श्रीलंकाक कोनेश्वरम महादेव मन्दिर

श्रीलंकाक कोनेश्वरम महादेवक दर्शन । दक्षिणक कैलाश। – आशुतोष चौधरी, नदियामी, दरभंगा। (हालः श्रीलंका सँ) श्रीलंकाक पूर्वी प्रान्त में पूर्वी तट पर स्थित छैथ कोनेश्वरम महादेव । कोलोम्बो सँ करीब २५० किलीमीटर पूर्व म स्थित त्रिंकोमाली शहर, लगैत अछि जेना शिव स्वयं एकर रचना अपन हाथ सँ केने रहैथ। एहि शहरक प्राकृतिक छटाक वर्णन कतेक दक्षिण भारतवर्षक कैलाशः श्रीलंकाक कोनेश्वरम महादेव मन्दिर

इनार नीक कि समुद्र नीकः दृष्टिकोण आ विचारधारा

एकटा खिस्साः इनार नीक कि समुद्र नीक – प्रवीण नारायण चौधरी    आइ एकटा खिस्सा फेर मोन पड़ि गेल अछि…. ओ रामकृष्ण परमहंस द्वारा अपन शिष्य सबकेँ बेसीकाल सुनाओल जायवला टेल्स आ पाराबल्स मे या फेर स्वामी विवेकानन्द द्वारा अनुकरणीय उदाहरण देल जायवला कथा मे कतहु पढने रही। एहि कथा सँ हमरा जे किछु सीख इनार नीक कि समुद्र नीकः दृष्टिकोण आ विचारधारा

गीताः योगारूढ कोना बनब – सहज उपाय

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय   (निरंतरता मे अध्याय ५ मे ब्रह्म अनुभूति आर जीवन मे रहितो मुक्त होयबाक उपाय कृष्ण द्वारा बतेबाक बाद….. अध्याय ६)   ॥ॐ श्रीपरमात्मने नम:॥   श्रीमद्भगवद्गीता   अथ षष्ठोऽध्याय:   छठम् अध्याय   श्रीभगवानुवाच   अनाश्रित: कर्मफलं कार्यं कर्म करोति य:। स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रिय:॥ १॥ गीताः योगारूढ कोना बनब – सहज उपाय

होली पर रंगारंग आयोजन सउदी अरब मेः मिथिला एकता समाज

रियाध, सउदी अरब। मार्च १७, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला एकता समाज – सउदी अरब द्वारा एहि वर्ष होलीक शुभ अवसर पर सेहो शुभकामना आदान-प्रदान करबाक लेल एकटा समारोह केर आयोजन करबाक नियार कैल गेल अछि। २५ मार्च केँ रियाध एक्जिट-१८ – पूर्व कार्यक्रम स्थल – पेट्रोल पम्प केर पाछू मे विभिन्न प्रतिभावान् कलाकार लोकनि द्वारा सामूहिक होली पर रंगारंग आयोजन सउदी अरब मेः मिथिला एकता समाज

विद्यावारिधि पं. वाचस्पति मिश्रक प्रतिमा अनावरण ठाढी मे

ठाढी, मधुबनी। मार्च १७, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि १६ मार्च, २०१६ संपूर्ण मिथिलाक संग विश्व भरि लेल एकटा अत्यन्त उच्च मूल्यक ऐतिहासिक दिवस केर रूप मे सोझाँ आयल अछि। ९मी-१०मी सदीक प्रसिद्ध विद्वान् एवं ब्रह्मसूत्र टीकाकार पंडित वाचस्पति मिश्र केर मूर्तिक स्थापना हुनकहि निज गाम मधुबनी जिलाक ठाढी मे कैल गेल अछि, जेकर अनावरण कार्यक्रम विद्यावारिधि पं. वाचस्पति मिश्रक प्रतिमा अनावरण ठाढी मे

भामति-वाचस्पति पर ओशोक एक प्रेरक प्रवचन

वाचस्‍पति और भामति   – ओशो केर प्रवचन पर आधारित ताओ उपनिषद् सँ (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   एक बहुत अद्भुत घटना हम अहाँ सँ कहैत छी।   वाचस्‍पति मिश्र केर विवाह भेलनि। पिता आग्रह केलखिन, वाचस्‍पति केँ किछुओ बुझबा मे नहीं एलनि। तैँ ओ हां कहि देला। सोचला, पिता कहैत छथि, ठीके कहि रहल भामति-वाचस्पति पर ओशोक एक प्रेरक प्रवचन