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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः दशरथ-सुमंत्र संवाद – दशरथ मरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती दशरथ-सुमन्त्र संवाद, दशरथ मरण १. महारानी कौसल्याक दरबार मे मंत्री सुमंत्र राजा दशरथ केँ देखि ‘जयजीव’ कहिकय दण्डवत्‌ प्रणाम कयलनि। सुनिते राजा व्याकुल भ’ कय उठलथि आ कहला – “सुमंत्र! कहू, राम कतय छथि?” राजा सुमंत्र केँ हृदय सँ लगा लेलनि। मानू डूबैत आदमी केँ किछु सहारा भेटि रामचरितमानस मोतीः दशरथ-सुमंत्र संवाद – दशरथ मरण

मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुरक एगारहम् वार्षिकोत्सव सम्पन्न

जनकपुरधाम, २३ जनवरी २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा-साहित्य लेल समर्पित संस्था मैथिली साहित्यकार सभा, जनकपुर केर एगारहम् वार्षिकोत्सव समारोह काल्हि २२ जनवरी २०२३ (२०७९ माघ ७ गते शनिदिन) जनकपुरधामक अधिकृत संगमक सभाकक्षमे सम्पन्न भेल अछि। एहि आयोजनक प्रमुख अतिथि राजर्षि विश्वविद्यालयक पूर्व उपकुलपति प्रा. भरत झा एवम् विशिष्ट अतिथिद्वय पूर्व राष्ट्रीय सभा सदस्य/साहित्यकार श्री मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुरक एगारहम् वार्षिकोत्सव सम्पन्न

रामचरितमानस मोतीः सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ जहिं-तहिं शोक के नजारा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ सर्वत्र शोक देखब १. मंत्री आर घोड़ाक ओहेन दशा देखि निषादराज विषादक वश भ’ गेलाह। तखन ओ अपन चारि उत्तम सेवक केँ बजाकय सारथीक संग कय देलनि। निषादराज गुह सारथी (सुमंत्रजी) केँ विदा कयकेँ घुरि गेलाह। हुनक विरह आर दुःख केर वर्णन नहि कयल रामचरितमानस मोतीः सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ जहिं-तहिं शोक के नजारा

रामचरितमानस मोतीः चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा १. महामुनि वाल्मीकिजी चित्रकूट केर अपरिमित महिमा बखान करैत कहलनि। तखन सीताजी सहित दुनू भाइ ओतय आबि श्रेष्ठ नदी मंदाकिनी मे स्नान कयलनि। श्री रामचन्द्रजी कहला – लक्ष्मण! बड नीक घाट छैक। आब एतहि कतहु रुकबाक इन्तजाम करू। २. तखन लक्ष्मणजी पयस्विनी रामचरितमानस मोतीः चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वाल्मीकि संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-वाल्मीकि संवाद १. सुन्दर वन, पोखरि आ पर्वत सब देखिते प्रभु श्री रामचन्द्रजी वाल्मीकिजीक आश्रम मे एलाह। श्री रामचन्द्रजी देखलनि जे मुनिक निवास स्थान बहुत सुन्दर अछि, जतय सुन्दर पर्वत, वन आ पवित्र जल सेहो उपलब्ध अछि। सरोवर सब मे कमल आर वन सब मे गाछ सब रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वाल्मीकि संवाद

मिथिलाक लोक मे मातृभाषा मैथिली प्रति उदासीनता कियैक आ एकर निदान कोना

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक लोक मे मातृभाषा प्रति उदासीनता कियैक आ एकर निदान कोना सच छैक जे अपन मातृभाषा ‘मैथिली’ प्रति ओहेन आकर्षण आ जुड़ाव मिथिलाक्षेत्रक लोक मे नहि अछि जेहेन आन क्षेत्रक लोक मे देखल जाइछ। ई एक रहस्यपूर्ण विषय थिक हमरा बुझाइ मे। जे भाषाक इतिहास आ साहित्य एतेक सम्पन्न अछि मिथिलाक लोक मे मातृभाषा मैथिली प्रति उदासीनता कियैक आ एकर निदान कोना

समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

सामाजिक संजाल मे मैथिली-मिथिला प्रति समर्पित गतिविधि – कीर्तिनारायण झा दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह केर साप्ताहिक समीक्षा – ७ जनवरी २०२३ । फोन उठेलहुं, उठा कहलियैन, खोलु दरबाजा आबि गेलौं। हमर हाथ दुनु बाझल अइ, पकड़ू झोरा यै, भरि अनलौं॥ “दुनू प्राणी गाम में” शीर्षक सँ उदय शंकर झा केर सुंदर पांती सँ आजुक समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

एक विशुद्ध मैथिली कथा जेकर भाव शायद सब बुझि सकी!!

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी हूलन तहिया आ आइ (कथा) भोरे-भोरे भरि देह माटि-गर्दा सँ लेटायल, मात्र एकटा विष्ठी पहिरने हुलना केँ बेर-बेर उठैत, बरबराइत आ ओंघराइत देखि लोक सब क्षुब्ध अवस्था मे छल। हुलना या त भगता के भगल कय रहल छल, या ओ कोनो नशा मे पागल भ’ गेल छल, या फेर आरे एक विशुद्ध मैथिली कथा जेकर भाव शायद सब बुझि सकी!!

अहाँ ई करू – अहाँ ओ करू

अहाँ ई करू – अहाँ ओ करू समाज बदलबाक काज जखन असामाजिक लोक करत त समाज मे केहेन परिवर्तन आओत ई स्वतः बुझय योग्य प्रश्न भेल। मनन करू। तहिना भाषा आ साहित्यक अर्थ तक नहि बुझनिहार जखन भाषा-साहित्य पर विमर्श करत त ओहेन समाज मे भाषा-साहित्यक केहेन स्थिति रहत सेहो स्वतः बुझय योग्य प्रश्न भेल। अहाँ ई करू – अहाँ ओ करू

रामचरितमानस मोतीः यमुना केँ प्रणाम, वनवासी लोकनिक प्रेम

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती यमुना केँ प्रणाम, वनवासी लोकनिक प्रेम १. श्री रामचन्द्रजी सखा गुह केँ अनेकों तरहें बुझेलनि आ घर घुरबाक आग्रह-आदेश कयलनि। तखन श्री रामचन्द्रजीक आज्ञा मानि ओ घर लेल प्रस्थान कयलाह। फेर सीताजी, श्री रामजी और लक्ष्मणजी हाथ जोड़िकय यमुनाजी केँ पुनः प्रणाम कयलनि आर सूर्यकन्या यमुनाजीक बड़ाई करिते रामचरितमानस मोतीः यमुना केँ प्रणाम, वनवासी लोकनिक प्रेम