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प्रवीण नारायण चौधरी

दहेज मुक्त मिथिला द्वारा शपथ समारोहः सतीघाट – कुशेश्वरस्थान मे जोरदार ग्रामीण सहभागिता

हिरणी, दरभंगा। १८ नवम्बर, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! आम ग्रामीण जनमानस द्वारा दहेज मुक्त मिथिला निर्माणार्थ सामूहिक शपथ ग्रहण दहेज मुक्त मिथिलाक दरभंगा संयोजक मनोज शर्माक अध्यक्षता एवं अन्तर्राष्ट्रीय धावक आर के दीपक केर प्रमुख आतिथ्य मे सम्पन्न ग्रामीण सभागोष्ठी मे दहेजक कूरीति सँ अपन समाज केँ बचेबाक वास्ते सामूहिक शपथ ग्रहण करबाक समाचार आयल अछि। दहेज मुक्त मिथिला द्वारा शपथ समारोहः सतीघाट – कुशेश्वरस्थान मे जोरदार ग्रामीण सहभागिता

आउ किछु सुनबैत छीः किसलय

गजल – किसलय कृष्ण घोघ तरक ओ चौअन्नियाँ मुस्कान कतय । करिया बादर तरमे चमकैत चान कतय । वीरान बना गेल अन्हर ई मजरल गाछीकेँ, आंगनमे पसरल ओ गमकैत धान कतय । गामे सगर मतंग भेल डिस्को सँ डीजे धरि, साँझ पराती वा चैता केर सुर तान कतय । हेंजक हेंज पलायन सभ दिन नियति आउ किछु सुनबैत छीः किसलय

महादुर्गाक समष्टि एवं व्यष्टि उपासनाक पद्धतिः वैकृतिकं रहस्यम्

नवम्बर १७, २०१७. आध्यात्मिक परिचर्चाः वैकृतिकं रहस्यम् ॐ श्री दुर्गायै नमः!! आस्थावान् भक्त हेतु विगत किछु समय सँ आदिशक्ति जगदम्बाक विभिन्न स्वरूपक रहस्य आदिक बारे दुर्गा सप्तशतीक पूर्वार्घ मे उल्लेखित स्तोत्र सभक अनुवाद रखैत आबि रहल छी। वैकृितिकं रहस्यम् अन्तर्गत ऋषि द्वारा जिज्ञासू राजन सँ भगवतीक पूजाक विधान केर वर्णन कयल गेल अछि।    इत्युक्तानि महादुर्गाक समष्टि एवं व्यष्टि उपासनाक पद्धतिः वैकृतिकं रहस्यम्

मिथिला मे सेहो क्रान्ति संभव अछि, साबित केलक मिथिला स्टुडेन्ट यूनियनक एकजुट छात्र

दरभंगा, नवम्बर १६, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला स्टुडेन्ट युनियन केर छात्र-छात्रा द्वारा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रक सर्वथा प्राचीन आ दोसर अति महत्वपूर्ण विश्वविद्यालय मे शैक्षणिक ओ प्रशासनिक अराजकताक विरुद्ध काल्हि १५ नवम्बर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय मे मिथिला स्टुडेन्ट युनियन केर छात्र नेता ओ सदस्य लोकनि विशाल धरना-प्रदर्शन कयलक। मिथिला मे सेहो क्रान्ति संभव अछि, साबित केलक मिथिला स्टुडेन्ट यूनियनक एकजुट छात्र

मैथिली कविता लेखन शिविरक दोसर दिन

साभारः हिन्दुस्तान समाचार पत्र मे प्रकाशित समाद  अभिव्यक्तिक सबसँ सफल माध्यम थिक कविताः मधुबनी कार्यशाला साहित्य अकादमी आ मैथिली बाल पत्रिका बाल-बन्धु द्वारा संयुक्त रूप सँ आयोजित मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक दोसर दिन मैथिलीक प्रसिद्ध कवि डा. नारायणजी आर युवा कवि प्रणव नार्मदेय द्वारा कविता लिखबाक तौर-तरीका आ दृष्टि फलक केँ विस्तारपूर्वक प्रशिक्षु लोकनि केँ मैथिली कविता लेखन शिविरक दोसर दिन

ऐतिहासिक महापुरुषः विद्यापति, एक महान क्रान्तिपुरुष 

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी क्रान्तिपुरुष विद्यापति पूर्वकाल मे मिथिलाक विभिन्न श्रमजीवी जाति-समुदायक बीच अगुआ वर्ग मे ब्राह्मण एवम् अन्य सुशिक्षित समुदायक उपस्थिति रहल छल। ताहि समय शिक्षा ग्रहण करबाक एकमात्र उपाय संस्कृत भाषा मे उपलब्ध शास्त्र आदि उपलब्ध होयबाक यथार्थ सँ सेहो हम सब परिचिते छी। विद्वान् लोकनिक संचारभाषा सेहो संस्कृत रहल। भगवत्भजन आ ऐतिहासिक महापुरुषः विद्यापति, एक महान क्रान्तिपुरुष 

मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक आयोजन मधुबनी मे ३ दिन लेल आरम्भ

नवम्बर १५, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!! संसारक एक सर्वथा प्राचीन आ समृद्ध भाषा मैथिली केर काव्य साहित्यक वर्तमान रुग्ण होयबाक कारण साहित्य अकादमी दिल्ली तथा नवोदित बाल पत्रिका ‘बाल-बंधु’ द्वारा संयुक्त रूप सँ मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक शुरुआत मधुबनी मे काल्हि १४ नवम्बर सँ १६ नवम्बर – कुल तीन दिल लेल आरम्भ कयल गेल अछि। एहि मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक आयोजन मधुबनी मे ३ दिन लेल आरम्भ

झारखंड मैथिली मंच आ विद्यापति दलान राँची केर अपीलः मैथिलीप्रेमी लोकनिक ध्यानाकर्षण

साभारः फेसबुक ग्रुप – झारखंड मैथिली मंच पर अभय कुमार झा केर पोस्ट सँ निवेदन 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 झारखण्डक समस्त मैथिली भाषी-प्रेमी समर्थक-सहयोगी लोकनि ई बात जनैत छथि जे “झारखण्ड मैथिली मंच”, अपन विभिन्न कार्यक्रमक माध्यमसँ अनवरत मैथिली भाषा, साहित्य एवं संस्कृतिक संवर्धन, संरक्षण एवं प्रसार सँ प्रतिबद्ध रहैत झारखण्ड प्रदेशक एकटा सक्रिय अग्रणी संस्थाक रूपमें प्रसिद्ध झारखंड मैथिली मंच आ विद्यापति दलान राँची केर अपीलः मैथिलीप्रेमी लोकनिक ध्यानाकर्षण

मिथिलाक जीवन पद्धति पूर्णरूपे वेदानुसारः कातिक मासक धात्रीक गाछ तरक भोजनक संस्मरण

आदरणीय काकी, भौजी आ सम्पूर्ण परिजन,   आजुक दिवस पैछला साल कातिक मासक पुनीत धार्मिक गार्हस्थ संस्कार जे धात्रीक गाछ तर ब्राह्मण-भोजन सह स्वजन्य भोजक आयोजन अपने लोकनिक स्वपाक, सुरुचि, स्वादिष्ट, सुन्दर भोजनक संग भेल छल से आइ फेसबुक मेमोरी मार्फत फेरो याद करा देल गेल अछि। जतबा आनन्द आयल रहय पोरकाँ एहि भोज मे मिथिलाक जीवन पद्धति पूर्णरूपे वेदानुसारः कातिक मासक धात्रीक गाछ तरक भोजनक संस्मरण

समकालीन कविता आ डा. चन्द्रमणि झा केर रचना – मुक्त-उन्मुक्त सँ

आदिकवि   – डा. चन्द्रमणि   निर्दोषकेँ उत्पीड़ित केनिहार छीना-झपटी, लूटि-मारिकेँ आजीविकाक साधन बनौनिहार रत्नाकर! अहाँ कोना बनि गेलौं आदिकवि वाल्मीकि कोना बहल अहाँक हृदयसँ काव्य-रसाल कोना भेल ई कमाल? एतय तऽ लोकक कसाइ प्रवृत्ति बढले जा रहल अछि अहाँसँ एक डेग बढिकऽ निज कुटम्बहु पर करैछ अत्याचार राजनीतिक आड़िमे दुराचार-अनाचार समाजमे घृणाक पसाही लगा समकालीन कविता आ डा. चन्द्रमणि झा केर रचना – मुक्त-उन्मुक्त सँ