मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक आयोजन मधुबनी मे ३ दिन लेल आरम्भ

नवम्बर १५, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

संसारक एक सर्वथा प्राचीन आ समृद्ध भाषा मैथिली केर काव्य साहित्यक वर्तमान रुग्ण होयबाक कारण साहित्य अकादमी दिल्ली तथा नवोदित बाल पत्रिका ‘बाल-बंधु’ द्वारा संयुक्त रूप सँ मैथिली कविता लेखन कार्यशालाक शुरुआत मधुबनी मे काल्हि १४ नवम्बर सँ १६ नवम्बर – कुल तीन दिल लेल आरम्भ कयल गेल अछि।

एहि तरहक ई पहिल आयोजन थिक। वर्तमान समय सोशल मीडियाक संसार मे पर्यन्त मैथिली लेखनक प्रचूरता देखाएतो लेखन शैली मे परिपक्वता नहि रहबाक समस्याक कारण एहि तरहक आयोजन राखल जेबाक बात परिकल्पक सह संयोजक अजित आजाद कहलनि।

वर्तमान त्रिदिवसीय कार्यशाला मे विभिन्न स्कूल-कालेजक नवोदित काव्य प्रतिभा सब भाग लय रहल छथि। उद्घाटन साहित्य अकादमीक मैथिली भाषाक संयोजिका डा. वीणा ठाकुर तथा उप-सचिव डा. देवेन्द्र देवेश द्वारा संयुक्त रूप सँ कयल गेल। एहि उद्घाटन सत्र मे उपस्थित अतिथि लोकनिक स्वागत बाल-बन्धु पत्रिकाक संपादक तथा संयोजक अजित आजाद कयलनि। ओ कहलनि जे एहि तरहक कार्यशाला मैथिली मे पहिल बेर कयल जा रहल अछि जाहि मे मधुबनी आ आसपासक नव-प्रवेशी कविगण भाग लय रहला अछि। कक्षा छठा सँ महाविद्यालय स्तरक प्रशिक्षु एहि आयोजन मे प्रतिभागी छथि। आर सी नंदन, कृष्णकांत मंडल, पंकज कुमार, सूरज चौधरी, शंकर कुमार झा, सदरे आलम गौहर, शिवेश्वर चौधरी, अभिषेक कुमार, गुलाम रसुल, अवधेश झा सहित कुल ३० प्रतिभागी एहि कार्यशाला मे भाग लेबाक जनतब भेटल अछि।

साहित्य अकादमीक विशेष कार्य पदाधिकारी डा. देवेन्द्र देवेश द्वारा अकादमीक विभिन्न योजना जाहि सँ भाषाक संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धन सुनिश्चित होयत ताहि सब पर प्रकाश देलनि। नव कवि सब केँ अपन भाषा मे श्रेष्ठ रचना करय मे एहि तरहक आयोजन सँ निश्चित लाभ भेटत, ओ कहलनि।

अकादमीक मैथिली भाषा संयोजिका डा. वीणा ठाकुर कहलनि जे एहि आयोजन सँ नवोदित कवि सब केँ मैथिलीक स्थापित काव्य शैलीक संग विभिन्न तकनीकी पक्षक जनतब भेटतनि आर एहि सँ नव रचनाक स्तर मे उल्लेखनीय सुधार आओत।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि उदयचन्द्र झा विनोद एक विशेषज्ञ कविक तौर पर मैथिली कविताक इतिहास आ समकालीन प्रवृत्ति पर विस्तार सँ चर्चा कयलनि। कार्यशालाक आरम्भ मे नवीन जायसवाल आर सुखदेव राउत द्वारा अतिथि सब केँ पाग-दोपटा सँ सम्मानित सेहो कयल गेल। एहि सुअवसर पर डा. दमन कुमार झा, रामेश्वर निशान्त, ऋषि वशिष्ठ, प्रणव नार्मदेय, प्रो. केदारनाथ झा सहित दर्जनों विज्ञ कवि, साहित्यकार एवं सामाजिक अभियन्ताक उपस्थिति छल।