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प्रवीण नारायण चौधरी

मातृभाषा, मातृभूमि ओ मातृअस्मिताक संरक्षण-संवर्धन तथा प्रवर्धनक सर्वश्रेष्ठ सिपाही

विशिष्ट व्यक्तित्व आ विद्वानक संस्मरण मे ‘डा. जयकान्त मिश्र’ सन्दर्भः डा. महेन्द्र नारायण राम ‘नीलकमल’ द्वारा डा. जयकान्त मिश्रक बारे संस्मरण आलेख ई सब कहेता देवता, याद करत भविष्यक पीढी भविष्यक पीढी केँ मैथिली भाषा-साहित्यक संग मैथिल पहिचान केँ बचौनिहार गोटेक व्यक्तित्व साक्षात् देवता समान स्मृति मे औतनि, तेहने गोटेक व्यक्तित्व बीच एकटा प्रखर सूर्य मातृभाषा, मातृभूमि ओ मातृअस्मिताक संरक्षण-संवर्धन तथा प्रवर्धनक सर्वश्रेष्ठ सिपाही

उगना शंकर केर किछु सनेश

साहित्य जनकपुर सँ उगना शंकर – युवा कवि अपन किछु रचना पठौलनि अछि।  1. मिथिलाक रीत अनमोल छै संगहि मिठगर एतहके बोल छै नहि बातमे ककरो झोल छै भेटैत बारी तिलकोर , ओल छै !! तें मिथिला हमर महान छै !!   सभ लोक अपन नहि आन छै सभ ठाँ दूरा दलान छै पग पग उगना शंकर केर किछु सनेश

मैथिली भाषा मे पत्रकारिता संरक्षणार्थ प्रज्ञा प्रतिष्ठानक उपक्रमः आङन वार्षिक पत्रिकाक प्रकाशन

पत्रिका परिचयः आङन आङन – मैथिली भाषाक वार्षिक पत्रिका (नेपाल)   नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, कमलादि, काठमाण्डू सँ प्रकाशित आङन (मैथिली भाषाक वार्षिक पत्रिका) वर्ष – ७ अङ्क – ७ माघ २०७२ मे प्रकाशित श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षिजीक कार्यकारी सम्पादकत्व मे निकलल पत्रिका हाथ मे अछि। ७ गोट महत्वपूर्ण लेख, भक्तपुर-नरेश जगत्प्रकाशमल्ल विरचित (प्रा. डा. रामावतार यादव), मैथिली भाषा मे पत्रकारिता संरक्षणार्थ प्रज्ञा प्रतिष्ठानक उपक्रमः आङन वार्षिक पत्रिकाक प्रकाशन

भगवान् शिव आ हुनक गोभक्तिः अत्यन्त पठनीय, मननीय आ अनुकरणीय पाठ

स्वाध्यायः भगवान् शंकर केर गोभक्ति (स्रोतः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) देवाधिदेव महादेव भगवान् शंकर ‘पशुपति’ कहल जाइत छथि – ‘पशूनां पतिं पापनाशं परेशं’। हुनका गाय बहुत प्रिय छन्हि जे ओ गाइयेक संग रहैत छथि। हुनक वाहन वृषभराज नन्दी थिक, ओ धर्मस्वरूप वृषभहि केँ अपन ध्वजा मे सेहो स्थान देलनि अछि, ताहि लेल ओ ‘वृषभध्वज’ भगवान् शिव आ हुनक गोभक्तिः अत्यन्त पठनीय, मननीय आ अनुकरणीय पाठ

व्याकरण सिर्फ भाषाक शुद्धता नहि जीवनक शुद्धता सेहो निर्धारित करैत अछिः मननीय बात

शुद्धताक पाठ सीखब परमावश्यक   किछु दिन पहिने परमादरणीय गुरुजीक मुख सँ किछु विशिष्ट बात सब सुनबाक अवसर भेटल छल। ओ कहि रहल छलाह जे शुद्धता आ स्वच्छताक पारस्परिक सम्बन्ध मनुष्यक रहन-सहन, स्वास्थ्य, जीवनशैली, जीवनचर्या आदि केँ उचित ढंग सँ मार्गनिर्देशन करैत छैक। एहि क्रम मे संस्कृत व्याकरण आ तेकर सूत्र सँ कठिन-सँ-कठिन इलाज केर व्याकरण सिर्फ भाषाक शुद्धता नहि जीवनक शुद्धता सेहो निर्धारित करैत अछिः मननीय बात

शिव कृपा केर अद्भुत सत्य कथा – ईश्वर सत्ता आ चमत्कारक अनुपम दृष्टान्त

स्वाध्याय आलेखः कृपानुभूति ‘स्वप्न मे देलनि महादेव किछु आदेश – जे साकार भेल’ – चन्द्रकला शर्मा   अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी   एहि घटनाक वृ्त्तान्त तऽ लगभग ४० वर्ष पहिनहि सँ आरम्भ भऽ जाइत अछि, जखन हमर समधी श्रीगोकुलचन्द शर्मा परिवारसहित हरिद्वार दर्शन लेल गेल छलाह। जाहि दिन हुनका नीलकण्ठ महादेवक दर्शन करय जेबाक छलन्हि, शिव कृपा केर अद्भुत सत्य कथा – ईश्वर सत्ता आ चमत्कारक अनुपम दृष्टान्त

भाषानीति मे सब मातृभाषाक सम्मान कयल जायतः मुख्यमंत्री लालबाबू राउत

३० जून, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! जनकपुरधाम, अषाढ १६ । मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत प्रदेशमे बाजल जायवला सब मातृभाषाक सम्मान करबाक हिसाब सँ प्रादेशिक भाषानीति अनबाक बात कहलनि अछि। भाषा आयोगद्वारा आयोजित भाषा आयोगक संवैधानिक दायित्व तथा प्रदेश एवं स्थानीय सरकारक बहुभाषिक कार्य प्रणाली विषयक संगोष्ठी मे विचार रखैत मुख्यमन्त्री राउत सब भाषाक सम्मान करबाक हिसाब सँ भाषानीति मे सब मातृभाषाक सम्मान कयल जायतः मुख्यमंत्री लालबाबू राउत

विष्णु भगवानक दशावतार मे पहिल मत्स्यावतारक संछिप्त कथा

स्वाध्याय आलेखः भगवान् विष्णुक मत्स्यावतार – भावानुवादः प्रवीण नारायण चौधरी भगवान् विष्णु केर कुल दस अवतार मे सँ एक आ पहिल अवतार मत्स्य (माछक रूप) मे भेलनि, शास्त्र उल्लेख करैत अछि। दशावतार या भगवान् महाविष्णुक दस मुख्य अवतार केर रूप मे एकर वर्णन विभिन्न पुराण सभ मे कयल गेल भेटैत अछि। संस्कृत मे माछ केँ विष्णु भगवानक दशावतार मे पहिल मत्स्यावतारक संछिप्त कथा

सिर्फ जय मिथिला सँ मिथिलाक जय कहियो हेतैक, मधुबनीक अनुकरण आवश्यक

विशेष सम्पादकीय मधुबनी सँ सीखू मिथिलाक समस्त जिलावासी *वर्तमान जिलाधिकारी मधुबनी कियैक कहाइत छथि डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सनक पुनर्अवतार *सरकारी योजनाक पैसा कतय खर्च होएत अछि *कियैक छी हमरा लोकनि एखन धरि विपन्न, कियैक पलायन रोग डसैत अछि हमर मिथिला समाज केँ अपने जागब त संसार जागल देखब, अपने जँ सूतल रहब त संसार सँ सिर्फ जय मिथिला सँ मिथिलाक जय कहियो हेतैक, मधुबनीक अनुकरण आवश्यक

मिथिलाक लोककला मे ‘सिक्की कला’ केर स्थान आ महत्व

आलेख अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी, मूलः हिन्दी आलेख, साभारः मिथिला कनेक्ट दहेज मुक्त मिथिलाक एक प्रशाखा ‘जानकी वाहिनी’ जेकर उद्देश्य मिथिलाक ग्रामीण घरेलू-कामकाजी महिला लोकनिक खाली समयक उपयोग कय मिथिलाक लोककला व अन्य दक्ष शीप सँ संभव उत्पादन बढाकय ओकर बाजार-वितरणक व्यवस्था आर एहि तरहें उपलब्ध आमदनी सँ महिला लोकनि केँ स्वाबलंबी-स्वरोजगारी बनबैत महिला मिथिलाक लोककला मे ‘सिक्की कला’ केर स्थान आ महत्व