मैथिली भाषा मे पत्रकारिता संरक्षणार्थ प्रज्ञा प्रतिष्ठानक उपक्रमः आङन वार्षिक पत्रिकाक प्रकाशन

पत्रिका परिचयः आङन

आङन – मैथिली भाषाक वार्षिक पत्रिका (नेपाल)
 
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, कमलादि, काठमाण्डू सँ प्रकाशित आङन (मैथिली भाषाक वार्षिक पत्रिका) वर्ष – ७ अङ्क – ७ माघ २०७२ मे प्रकाशित श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षिजीक कार्यकारी सम्पादकत्व मे निकलल पत्रिका हाथ मे अछि। ७ गोट महत्वपूर्ण लेख, भक्तपुर-नरेश जगत्प्रकाशमल्ल विरचित (प्रा. डा. रामावतार यादव), महामहोपाध्याय डा. सर गंगानाथ झाक मैथिली लेखन (डा. रमानन्द झा रमण), मिथिलाक कर्णाट वंश (हरिकान्त लाल दास), बहुआयामिक व्यक्तित्वक स्वामी लोकनायक दीना-भद्री (देवेन्द्र मिश्र), मैथिल कला-सौन्दर्य (एस. सी. सुमन), तराइक सम्पर्क भाषा मैथिली (जयकृष्ण गोइत) तथा सोसल मिडिया आ मैथिली-मिथिला (प्रवीण नारायण चौधरी) सहित ३ कथा (लिलि रे, वृषेशचन्द्र लाल, धीरेन्द्र प्रेमर्षि), १ नाटक खखी (रमेश रञ्जन) १२ गोट कविता-गीत-गजल आर फेर नवतुरिया भाग मे ७ गोट कविता-गजल-आदि, परदेशी आखर मे कुल १० गोट विभिन्न रचना सहितक “आङन” पत्रिका बहुत नीक लागल।
 
मूल्य मात्र ५० टका आ नेपाल सरकार द्वारा मैथिली केँ प्रोत्साहन देबाक कार्य मे पूर्व प्राज्ञ व नेतृत्वकर्ता श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर केर अग्रभूमिका मे आरम्भ ई काज काफी महत्वपूर्ण लागल। संगहि एकर सम्पादकीय “पाथरपर दूभि जनमएबाक आयास” पढिकय सेहो नीके लागल। १०० वर्षक मैथिली पत्रकारिता पर एक दिस आत्मगौरवक बोध भेल मुदा दोसर दिस कठिन चुनौती सँ पार नहि पाबि सकब, अपन लोकक बीच स्फुरणाक अभाव, राज्य केर उदासीनता आ हर तरहें स्वयं मैथिली भाषा-भाषी मे ओहेन चाव या उत्साह नहि जे एकटा बड़का बाजार अपनहि भाषा लेल स्वीकृति सँ तैयार करितय… ई सब बात मनन करबाक अवसर भेटल। श्री प्रेमर्षिजीक ई स्वीकारोक्ति जे सिर्फ अपन भाषा सँ प्रेम कयनिहार गोटेक जिवट लोक केर प्रयास सँ साहित्यिके पत्रिका मार्फत सँ मुदा पत्रकारिता केँ जीवित राखल जा सकल अछि सेहो नीके लागल। वास्तविकता सेहो यैह छैक। लेकिन हम सब हुकुर-हुकुर करिते सही जिबैत रहलहुँ अछि… बस, बेसी कि कहू। विटामीन आ ग्लुकोज पानिक आवश्यकता छैक। ताहि दिशा मे नव युवाशक्ति सोच आ सामर्थ्यक विकास करैथ। हमर यैह आह्वान रहत। आब त राज्य सेहो भेटलनि, बजट भेटलनि, करौथ विकास। अति-राजनीति सँ ई देश मुक्ति पाबि यथार्थ सरोकार पर आगाँ बढय, सब दिन खोखला जयकारा आ होहकारा सँ आगू बढि सकी जन-गण-मन, हमर शुभकामना अछि। अपन सेवा केँ निरन्तरता मे रखबे करब से वचनबद्धता अछि।
 
हरिः हरः!!