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प्रवीण नारायण चौधरी

रेप विरुद्ध कठोर कानून – २ महीनाक भीतर फैसला आ आजीवन काराबास संग मृत्युदंडक सजाय

९ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! भारत मे राष्ट्रपति द्वारा रेप (बलात्कार) संग अन्य यौन्यजन्य घटना आ हत्या-हिन्साक बढैत घटना देखैत सरकार द्वारा जारी अध्यादेश केँ कानून रूप मे परिणति देबाक स्वीकृति देल जेबाक समाचार पढल। हालहि एक अढाई वर्षक बच्ची केर वीभत्स हत्या आ बलात्कारक आशंका सँ पूरे देश व दुनिया मे एहेन अपराधी प्रति रेप विरुद्ध कठोर कानून – २ महीनाक भीतर फैसला आ आजीवन काराबास संग मृत्युदंडक सजाय

मैथिली पाछू पड़बाक कारण की? कि हिन्दीक लादल गेनाय मैथिली लेल जानलेबा भेल? – अंग्रेजी मे लेख

Why Maithili Is Lagging Behind Is Hindi’s Prominence Proving Devil?  – Pravin Narayan Choudhary  (In response to #Stop_Hindi_Imposition –#Revive_Maithili – #Language_Equality_Day –#Justice_For_Maithili on Twitter & Facebook Page) At some point of time, Hindi used as the tool to spread nationalism and there princely states in Mithila region were easily convinced by the freedom fighter leaders of India to use Hindi instead मैथिली पाछू पड़बाक कारण की? कि हिन्दीक लादल गेनाय मैथिली लेल जानलेबा भेल? – अंग्रेजी मे लेख

कहियो मनन केलहुँ जे कि कयला सँ कि भेटल – आत्मचिन्तन केर एक अद्भुत दर्शन

दर्शन – प्रवीण नारायण चौधरी उद्विग्न मोनक उद्विग्नता   ओकर मालिक जहाँ सोझाँ अबैक कि ओ एकटा देवाल पर धक्का लगेनाय शुरू करय; मालिक देखैक जे ओ काज कय रहल अछि। ड्युटीक पक्का अछि। मालिक चलि जाय। फेर किछु कालक बाद जहाँ मालिकक एबाक बेर होइक कि ओ अपन पोजिशन मे फेरो वैह देवाल पर कहियो मनन केलहुँ जे कि कयला सँ कि भेटल – आत्मचिन्तन केर एक अद्भुत दर्शन

विश्वक प्राचीनतम भाषा-संस्कृति ‘मैथिली-मिथिला’ केँ पुनर्सम्मानित करबाक लेल ई आवश्यक

निरन्तर पढू, निरन्तर लिखू   बिना पढने-लिखने कोनो समृद्धि-सम्मान दीर्घायु नहि भऽ सकैत अछि   सन्दर्भः मैथिली-मिथिलाक समृद्धि आइ सब सँ बेसी दयनीय   एक जागरुक युवा कृष्ण मिश्र व अन्य लोकनि आदरणीय कुणाल सर सहित एकटा आन्तरिक विचार-विमर्श विन्डो मे मैथिली-मिथिलाक हितचिन्तन लेल निरन्तर लेखन पर बल देबाक बात कहलनि। सच्चे, बिना निरन्तर लिखने, विश्वक प्राचीनतम भाषा-संस्कृति ‘मैथिली-मिथिला’ केँ पुनर्सम्मानित करबाक लेल ई आवश्यक

मिथिला सभ्यता परिपूर्ण, तैयो हम सब भऽ रहल छी विमुख, झेलि रहल छी संकट

विचार – डा. लीना चौधरी मिथिला संस्कार और प्रकृति मैथिल समाज में जतेक पूजा पाठ अइछ सब हमरा सब के प्रकृति से बहुत गहराई से जोड़ैत अइछ। अखन काइले बीतल वटसावित्री पूजा में उपयोग सब वस्तु हमरा सबके बतबइ अइछ की छोट से छोट चीज के अपन महत्व अइछ। बांस के बीयन और बांसक डाली मिथिला सभ्यता परिपूर्ण, तैयो हम सब भऽ रहल छी विमुख, झेलि रहल छी संकट

बिम्सटेक आ भारत – समसामयिक राजनीति आ क्षेत्रीय सहयोग पर विचार

सम-सामयिक राजनीतिक आ क्षेत्रीय सहयोग पर विचार – राजन झा बिम्सटेक आ भारत हालहि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केर शपथ ग्रहण समारोह मे बिम्सटेक देशक राष्ट्र प्रमुख सभ के बजाओल गेल रहय त आउ जानी किछ महत्वपूर्ण बात सभ बिम्सटेक केर बारे मे. कहल जाइत अछि जे अगर अहाँ सुख आ शांति सँ रहय चाहैत छी बिम्सटेक आ भारत – समसामयिक राजनीति आ क्षेत्रीय सहयोग पर विचार

विमलाक विवाहक बेर

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै गरीब जन्म लेनाय अभिशाप नहिं परन्तु गरीब भ क मैर गेनाय बहुत बड़ा अभिशाप होइछ। विमला देखैत बहुत सुंदर छलीह, और सातवीं पास सेहो, पढय के आगु मोन बड होइन परंतु आर्थिक स्थिति बहुत खराब रहैन परिवार के, ताहि कारण पढाई बीचे में छोड़य पड़लैन। पिताजी केर थोड़-बहुत विमलाक विवाहक बेर

अपन गाम सँ दूर ईद उल फित्र पर सभक बरक्कत लेल दुआ – नौमन सिद्दिकी दुबई सँ

नौमन सिद्दिकी, दुबई। ५ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ इस्लाम धर्मक बहुत पैघ पाबनि ‘ईद उल फित्र’ अछि। इस्लामिक महीना केर ९वम् महीना रमदान केर महीना होइत छै। रमदान केर नाम ठाउँ अनुसार रमजान कहिकय सेहो सम्बोधन करैत कयला जाइछ। रमजान विशेषत:  एसिया देश मे सम्बोधित होइत अछि। इस्लाम धर्मक मान्यता अनुसार कुरान केर अवतरण एहि अपन गाम सँ दूर ईद उल फित्र पर सभक बरक्कत लेल दुआ – नौमन सिद्दिकी दुबई सँ

विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

विचार-मंथन  – डा. लीना चौधरी (मूल लेख – हिन्दी मे, अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी) अहाँ केँ कोन सवाल सब सँ बेसी विचलित केलक कुंती, पहिल संतान केँ नहि अपना पेबाक पीड़ा या द्रौपदी केँ कोनो सामान जेकाँ अपन पाँचो पुत्र केँ सझिया बाँटि देबाक बात? चूँकि अहाँ स्वयं सेहो स्त्री छलहुँ, तखन द्रौपदीक पीड़ा विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)

कविता – वन्दना चौधरी बैसल छेलौं बहुत प्यासल, व्याकुल एकटा गाछ के तर में जे कखन ओ इनार स बान्हल डोरी जाहि में छै एकटा डोल बान्हल, ओ ऊपर आओत और हम अपन प्यास बुझेब। तखने आओल एक झंझावात के आवाज़, मोन त कुही भके कनेय लागल, किये त आब हम पियासल रैह जेब। ओ जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)