विश्वक प्राचीनतम भाषा-संस्कृति ‘मैथिली-मिथिला’ केँ पुनर्सम्मानित करबाक लेल ई आवश्यक

निरन्तर पढू, निरन्तर लिखू
 
बिना पढने-लिखने कोनो समृद्धि-सम्मान दीर्घायु नहि भऽ सकैत अछि
 
सन्दर्भः मैथिली-मिथिलाक समृद्धि आइ सब सँ बेसी दयनीय
 
एक जागरुक युवा कृष्ण मिश्र व अन्य लोकनि आदरणीय कुणाल सर सहित एकटा आन्तरिक विचार-विमर्श विन्डो मे मैथिली-मिथिलाक हितचिन्तन लेल निरन्तर लेखन पर बल देबाक बात कहलनि। सच्चे, बिना निरन्तर लिखने, मिथिला सुसुप्तता केँ जाग्रत करब संभव नहि देखि रहल छी। बेर-बेर संचारकर्म केँ बढावा देबाक बात हमरो मोन मे उपकरैत रहल य।
 
नीक लिखय लेल जरूरी छैक जे कोनो विषय केर गहींर जानकारी पहिने हासिल करू। जेना नव शिक्षा नीति में मैथिली केँ नकरबाक सूचना जे कियो देल से अपूर्ण अध्ययन सँ। एना गलत आ पूर्वाग्रही सूचना सम्प्रेषण करब त विश्वसनीयता घटत।
 
कुतर्क सँ अपन समझ केँ सुपर आ बाकी केँ क्षुद्र दलाल एजेंट आदि कहबाक परिपाटी में हम सब फँसल रहब त संगठन मजबूत नहि बनत। सब दिन अपने मे उलझल रहब। हम अहाँ सभक बहुत पोस्ट केँ नकारिकय अलग धार पर किछु एहि तरहक कारण सँ चलैत छी।
 
ई तरीका सब सँ नीक छैक जे हमरा बुझने ई एना छैक, जँ एहि मे कोनो कमी होइ त जरूर जानकार आ विज्ञ सँ सुधार केर अपेक्षा रखैत छी। एना कहि देला सँ एकटा रूम बचि जाइत छैक जे कोनो विज्ञजन केँ अहाँ-हमर निर्णय सँ इतर अपन विचार आ सुधारक बात, तथ्य रखबाक इच्छा हेतनि।
 
आर, मिथिला लेल कमजोर पक्ष बहुते रास छैक – जेनाः
 
१. राजनीतिक विषय पर मैथिली भाषाक संचारकर्म जीरो
 
२. राजनीतिक हित-चिन्तन पर साहित्यकारक कलम सँ आमजन अपरिचित
 
३. रजनी-सजनी मे बेसी संलग्नता
 
४. स्वाभिमान रक्षार्थ बेसी लोक येन-केन-प्रकारेण जीवन संचालन केँ प्राथमिकता सूची मे राखि अन्य बात सँ पाछाँ रहब
 
५. दोसरक तर्क मे सहमतिक भाव नहि ताकि जानि-बुझिकय अपन तर्क आ अपन बौद्धिक पेंच केँ बलजोरी घोंसियायब
 
६. नेतृत्व पर अविश्वास, नेतृत्व पर प्रहार, ओकर कमी-कमजोरी केँ बिसरियोकय ओकरा आगाँ बढेबाक कोनो समर्थन आ सहयोग नहि करब
 
७. अपन भाषा-संस्कृति सँ अपने घृणा करब वा तौहीनी मानब…
 
एहेन कतेको रास कारण छैक जाहि पर आत्मसमीक्षा करैत ईमानदार बनिकय सिर्फ अपन-अपन योगदान जँ मैथिली मिथिला लेल देल जाय त संभव अछि जे मिथिला अपन पौराणिक समृद्ध स्वरूप केँ पुनः प्राप्त कय लियए।
 
हरिः हरः!!