Search

प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन आइ २ बजे सँ दरभंगा मेः संयोजक अशोक मेहता

दरभंगा, ८ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ २ बजे सँ रातिक १२ बजे धरि महेश ठाकुर महाविद्यालय – दरभंगा मे मैथिली कथाकार लोकनिक जमघट लागत । आजुक सम्मेलन मैथिली लोकसाहित्यक पुरोधा डा. ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ केर विशेष रूप सँ समर्पित रहत। सब तुरक कथाकार लोकनि अपन कथाक पाठ करता आ ताहि पर समीक्षा सेहो कयल मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन आइ २ बजे सँ दरभंगा मेः संयोजक अशोक मेहता

मिथिलाक समग्र विकास मे प्रवासी मैथिलक योगदानः नव विकसित धारा सँ बढल अछि आशा

शाश्वत मिथिला – अहमदाबाद केर अभियन्ता आ प्रबुद्धजन श्री राजकिशोर झा केर विशेष प्रेरणा सँ वर्तमान प्रवासी मिथिला समाज लेल एक विचार – ई लेख विशेष रूप सँ प्रवासी मैथिल व हुनका लोकनिक महत्वपूर्ण योगदानक मद्देनजरि लिखल गेल अछि। श्री राजकिशोर झा संग वार्ता आ सुझावक संग-संग स्थिति-परिस्थितिक नीक समीक्षा एहि लेख केर रचनात्मकता मे मिथिलाक समग्र विकास मे प्रवासी मैथिलक योगदानः नव विकसित धारा सँ बढल अछि आशा

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

– अनिरुद्ध जोशी ‘शतायू’ (साभारः वेबदुनिया डट कम) राम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। सोलह श्रृंगार के बारे में भी आपने सुना होगा। आखिर ये 16 कलाएं क्या है? उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्‍वरतुल्य होता है। आपने कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि

मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि हे मिथिला – बेर-बेर प्रणाम – मातृभूमि स्तवन ईश्वर प्रति सम्पूर्ण आस्थावान् रहैत अपन जन्म एहि मिथिला नामक तीर्थभूमि – तंत्रभूमि -सिद्धभूमि मे होयबाक लेल पुनः-पुनः आभार प्रकट करैत छी। मिथिलाक स्तवन करब केहेन कल्याणकारी अछि से त देखू – म सँ मकार ब्रह्मा आर ताहि मे इकारान्त स्त्री यानि ब्रह्माणी (सरस्वती विराजित मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि

पुराण प्रमाणित मिथिला – रोचक जनतब सहित

लेख – संकलितः संजय सागर द्वारा ‘हम सब मैथिल छी’ फेसबुक ग्रुप सँ साभार मूल लेखकः कृष्ण कुमार झा ‘अन्वेषक’ – जनवरी २२, २०१२ – अपन ब्लौग पेज पर  पुराण प्रमाणित मिथिला…. देशेषु मिथिला श्रेष्ठा गङ्गादि भूषिता भुविः । द्विजेषु मैथिलः श्रेष्ठः मैथिलेषु च श्रोत्रियः ॥ (संशोधित श्लोकः देशेषु मिथिला श्रेष्ठा गंगादि भूषिता भुवि:। जनेषु मैथिल: पुराण प्रमाणित मिथिला – रोचक जनतब सहित

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

आश्रम चतुष्टयपर एक विहंगम दृष्टि   – स्वामी श्रीविज्ञानानन्दजी सरस्वती   (मूल आलेखः हिन्दी, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   चारि वर्ण आ चारि आश्रम प्राचीनकालिक अछि अर्थात् वैदिक कालीन अछि। एहि लेल मनुस्मृति मे कहलो गेल छैक जे ‍-   चातुर्वर्ण्यं त्रयो लोकाश्चत्वारश्चाश्रमाः पृथक्। भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं वेदात्प्रसिध्यति॥   – मनुस्मृति १२/९७   मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

मिथिलाक्षर केर सही रूप कोन – सुझाव व विचार संकलन

मिथिलाक्षर केर औचित्य आ रूप पर चर्चा मिथिलाक्षर केर प्रयोग-प्रचलन आब लगभग १३५ वर्ष सँ ऊपर सँ व्यवहार बन्द होयबाक आ जनसामान्य केर सहजता आ संस्कृत एवं हिन्दी पर्यन्त केर सुगम पाठ्य-लेखन आदिक वास्ते देवनागरी केर स्वीकृति आ प्रचलन बढि गेलाक बाद धीरे-धीरे ‘मिथिलालिपि’ (तिरहुताक्षर) उठाव जेकाँ भऽ गेल। लेकिन लिपि कोनो पहिचान आ सभ्यताक मिथिलाक्षर केर सही रूप कोन – सुझाव व विचार संकलन

राजनैतिक हिस्सेदारी मे मिथिलाक जनता-नेता सब पिछलग्गू, आगाँ रहबाक मादा कतहु नहि?

विचार-वार्ता राजनैतिक तौर पर पिछलग्गू बनब मैथिल केर नियत आ नियति दुनू   (वार्ता)   धीरेन्द्रजी (धीरेन्द्र कुमार झा, पेशा सँ चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट आ मुम्बई मे सेटल्ड) आजुक अखिलेश यादवजी द्वारा मिथिला समाज सँ जुड़बाक विषय पर एकटा बड़ा चोखगर विचार रखलनिः   “हम मैथिल सदा स राजनीति पिछुआ बनल रहलहुँ… जगन्नाथ किछु नहि करैथ राजनैतिक हिस्सेदारी मे मिथिलाक जनता-नेता सब पिछलग्गू, आगाँ रहबाक मादा कतहु नहि?

ग्रुप खोलब मैथिली-मिथिला लेल आ एडमिन बनिकय छाँटब मालिकपना – शिजोफ्रेनियाक लक्षण

मैथिली-मिथिलाक नाम पर ग्रुप आ एडमिन केर बीमारी   किछु अभिन्न मित्र लेल उचित चिकित्साक सलाह!   मित्र, अहाँक उपयोगिता सच मे मैथिली-मिथिला केँ बहुत छैक। लेकिन कथनी-करणीक संग व्यवहार मे आबि रहल अकारण फरक सँ हमरा चिन्ता भेल अछि।   कइएक बेर देखल गेल अछि जे बिना कारण सेहो हम-अहाँ अचानक भयभीत होमय लगैत ग्रुप खोलब मैथिली-मिथिला लेल आ एडमिन बनिकय छाँटब मालिकपना – शिजोफ्रेनियाक लक्षण

राष्ट्रक समृद्धि लेल पाठ्यक्रम मे संस्कृत हो अनिवार्यः संस्कृत सप्ताह समापन समारोह लोहना

राम सेवक झा, मधुबनी। २९ अगस्त, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! संस्कृत भारती केर तत्वावधान मे संस्कृत सप्ताह केर आयोजन लोहना संस्कृत विद्यापीठ मे समापन भेल । संस्कृत प्रतियोगिता मे सफल छात्र केँ कयल गेल पुरस्कृत । संस्कृतमय वातावरण सँ गुंजयमान रहल समारोह स्थल । विकसित राष्ट्र केर कल्पना साकार हेतु संस्कृत अध्ययन केर अछि आवश्यकता । राष्ट्रक समृद्धि लेल पाठ्यक्रम मे संस्कृत हो अनिवार्यः संस्कृत सप्ताह समापन समारोह लोहना