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प्रवीण नारायण चौधरी

मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

कि मधुबनी जिला सर्वाधिक ‘दहेज मुक्त मिथिला’ अछि? (सर्वे और बहस) काल्हि ‘दहेज मुक्त मिथिला सर्वे-२०२०’ केर पहिल तथ्यांक जारी कयल, जाहि मे दहेज प्रथाक विरूद्ध सब सँ अधिक जागरुकता ‘मधुबनी’ जिलाक लोक मे देखल गेल कहि सकैत छी। तथ्यांक सँ स्पष्ट अछि जे सब सँ अधिक लोक मधुबनी सँ सक्रियता देखौलनि। ईहो स्पष्ट अछि मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि २२ अगस्त २०२० दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह पर एकटा सर्वेक्षण कयल गेल। एहि सर्वेक्षण मे मिथिलाक गाम आ जिलाक लोकक बीच एकटा समन्वय स्थापित करबाक मुख्य अभिप्राय अछि। ओना आजुक समय मे मिथिला सांस्कृतिक-भाषिक तौर पर दुइ देशक सीमा मे पंजाब, बंगाल आ तमिल जेकाँ विभाजित अछि। आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

२३ अगस्त २०२०। मैथिली जिन्दाबाद!! चौरचन २०२० बीतल। भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि केँ आर कतहु चन्द्रमाक दर्शन वर्ज्य अछि, लेकिन मिथिला मे ई अदौकाल सँ चानक विशेष दर्शन लेल जानल जाइत अछि। एकरे चौरचन कहल गेल छैक। एकरा लोकपाबनि सेहो कहल गेल छैक। एहि सन्दर्भ मे लोकसाहित्यक विशिष्ट मर्मज्ञ-साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण राम सँ चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि मिथिलाक लोक-पाबनि चौरचन सम्पन्न भेल। एहि अवसर पर सामाजिक संजाल केर विभिन्न स्रोत सँ संकलित चौरचन विशेष साहित्यिक प्रसाद एतय राखि रहल छी। लेखकक नाम जाहि मे नहि पता चलि सकल अछि, ताहि लेल नहि लिखि रहल छी। बाकी जे कियो असल लेखक होइथ, हुनका नमन करैत हुनका चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद

चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

संकलनः साभार डी एन झा जी केर फेसबुक पोस्ट सँ चौठचन्द्र पूजनोत्सव के सभगोटे के मंगलमय हार्दिक शुभकामना… । पूजा के संक्षिप्त विधि ।। चतुर्थी चन्द्र पुजनः-।। स्नानोपरान्त आशन पर वैसक स्वस्ति वाचनोपरान्त गंगाजल जल मे राखि जल लकः- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा । यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।। पुण्डरीकाक्षः चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

मिथिला कर्मकांड – लोकपाबनि चौरचनक वैदिक पूजा विधान – डा. सुधानन्द झा (ज्योतिषीजी), ग्रामः राढ़ी, जिलाः दरभंगा केर हस्तलेख पर आधारित (संकलन – श्री शंकर सिंह ठाकुर, सचिव, अप्पन ब्राह्मण समाज, विराटनगर, नेपाल) पुनर्लेखनः प्रवीण नारायण चौधरी  चौरचन लोकपाबनि थिकैक। एहि मे मंत्रक प्रधानता सँ बेसी भावक प्रधानता छैक। मिथिलाक विशिष्ट पाबनि थिकैक चौरचन, जतय चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान

कविता – भारती झा दहेज प्रथा बिका गेल माय बापक घर तेँ बेटी के घर बसल, केहन अभागल प्रथा अछि ई, दहेजप्रथा जे कतेको घर केँ निगलि चुकल।   यदि बेटी किछु नै कय पायल तेँ बेटा घर बचा लितय जखन ओकर बोली लगैत रहै तखन अपन शिक्षा के महत्व देखा दितय।   ख़ालिये हाथ भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान

सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार केर चयनित कथा “हमर मधुश्रावणी”

सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार प्रतियोगिता लेल तेसर चयनित कथा हमर मधुश्रावणी – प्रियम्वदा कुमारी बात आय से पाँच बरख पहिने, 2015 के अछि। बियाहक बाद हम्मर पहिल सावन छल। मधुश्रावणी पूजय लेल हम अप्पन नैहर आयल रही। घर मे मामी, मौसी, दीदी सभक उपस्थिति सँ खूब चहल-पहल छल। हमरा सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार केर चयनित कथा “हमर मधुश्रावणी”

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिताक दोसर चयनित लेख “पहिल सासुर यात्रा’

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता, दहेज मुक्त मिथिला लेल चयनित संस्मरण आलेख पहिल सासूर यात्रा – किरण लता झा विवाह के बाद पहिल सावन छल। हम सासुर आयल रही अपना जाऊत के मुड़न में। हमरा सासुर में सावन के बुद्ध दिन केँ मात्र भगवती केर वार्षिक पूजा करबाक दिन आर ताहि अवसर टा मुड़न सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिताक दोसर चयनित लेख “पहिल सासुर यात्रा’

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता मे प्रथम चयनित लेख ‘आत्मसंतुष्टि’

#संस्मरण #दहेज_मुक्त_मिथिला #सावनक_संस्मरण – अंजू झा   अपन संस्मरण साझा करै स पहिने हम अहाँ सबसँ माफी चाहब जे एहि पोस्ट सँ हम किनको धार्मिक भावना केँ चोट नै पहुँचाबय चाहैत छी। ई हमर अपन निजी अनुभव आ विचार थिक तेँ पुनः क्षमा माँगैत हम अपन संस्मरण साझा कय रहल छी।   आत्मसंतुष्टि   बात सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता मे प्रथम चयनित लेख ‘आत्मसंतुष्टि’