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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिल साम्प्रदायिक श्रीदुर्गासप्तशती-२ः सप्तशतीन्यास एवं नवार्ण विधि

सप्तशतीन्यास अथ सप्तशतीन्यासः श्री दुर्गायाः दुर्गासप्तशतीस्तोत्रमन्त्रात्मकानां प्रथम-मध्यमोत्तरचरित्राणां ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरा ऋषयो, गायत्र्युष्णिगनुष्टुभश्छन्दांसि, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वत्यो देवता, नन्दा-शाकम्भरी-भीमाः शक्तयो, रक्तदन्तिका-दुर्गा-भ्रामर्यो बीजानि, ऐँ ह्रीँ क्लीमिति कीलकानि, अग्नि-वायु-सूर्यास्तत्त्वानि, ऋग्यजुःसामवेदा ध्यानानि सकलकामनासिद्धये महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वतीप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः॥ करन्यासः खड्गिनी शूलनी घोरा गदिनी चक्रिणी तथा। शंखिनी चापिनी बाणा भुशुण्डी परिघायुधा॥ अंगुष्ठाभ्यां नमः॥ शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्या-निःस्वनेन च॥ तर्ज्जनीभ्यां स्वाहा॥ मैथिल साम्प्रदायिक श्रीदुर्गासप्तशती-२ः सप्तशतीन्यास एवं नवार्ण विधि

मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती-१: अर्गला, कीलक तथा कवच

मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती (मैथिली भाषात्मक ‘सांगदुर्गाप्रकाशिका’ व्याख्या सहितं) व्याख्याकारः महाकवि लालदास (१८५६ ई. – १९२१ ई.) सम्पादकः पं. (डा.) शशिनाथ झा “विद्यावाचस्पति” प्रकाशकः उर्वशी प्रकाशन   भूमिकाः   अपार-संसार-महोग्रसागरा-दुपैतिपारं जडबुद्धयोऽप्यहो। पादारविन्दं मनसापि वन्दयन् यस्याश्शिवां तां प्रणतोऽस्मि सिद्धिदाम्॥   वीरयसं. तारालाही ग्राम निवासी, कर्णकुलोद्भव, देवभक्ति-परायण, शूर, औदार्य्य गुणसम्पन्न “बलभद्र” प्रसिद्ध वल्लीदास छलाह, जे श्रीमान् दिल्लीपति बादशाहक मैथिलसाम्प्रदायिक श्री दुर्गासप्तशती-१: अर्गला, कीलक तथा कवच

अपन मूल्य-मान्यताक समीक्षा कएने बिना दोसरक देक्शी सुरक्षित नहि

ई मृत्युभोज शब्द आइ-काल्हि मिथिलाक कतेको लोक केँ माथा डिस्टर्ब कएने छन्हि। वास्तव मे ई शब्द मिथिलावासीक विधान मे कतहु नहि छैक। लेकिन मिथिलाक लोक आइ अपन बहुमूल्य परम्परा केँ ‘बारीक पटुआ तीत’ बुझि ‘दूरक ढोल सोहाओन’ वाली तर्ज पर अक्सर आन-आन संस्कृतिक बात केँ अपन मिथिला संस्कृति सँ तुलना करैत फ्रस्ट्रेटेड (हताश) होइत रहैत अपन मूल्य-मान्यताक समीक्षा कएने बिना दोसरक देक्शी सुरक्षित नहि

भीड़ कतेक जुटल – देखाबा के राजनीति

भीड़ जुटाउ राजनीति चमकाउ   एहि मे कतहु दुइ मत नहि जे शिक्षा आ संस्कार केर बल पर स्वाभिमानी छी हम समस्त मिथिलावासी अर्थात् मैथिल। परन्तु ‘अहंता’ केर कारण ‘उच्चताबोधी ग्रन्थि’ तथा ‘लघुताबोधी ग्रन्थि’ केर अति सक्रिय होयबाक कारण हम सब अपन मूल्य-मान्यता आ अस्तित्व प्रति साकांक्ष कम, अपने-अपने बुद्धिक लड़ाई मे बेसी मुग्ध भेल भीड़ कतेक जुटल – देखाबा के राजनीति

भदवा के पावर – पारम्परिक प्रथाक माहात्म्य

कथा – पंडित दयानन्द झा भदबा महरानिक पावर – प्रवीण जिक विमोचन रूकि गेल गौरी कतेको बेर महादेव केँ एकटा घर बन्हबाक लेल कहलखिन्ह, लेकिन महादेव एहिपर ध्यान नहि देथिन्ह। जखन गणेश जी कने नम्हर भेला ते माइक बात रखबा लेल एक दिन बाँस काठक ओरियान कए घर बान्हए लगलाह। महादेव कतहु सँ गाम पर अएलाह भदवा के पावर – पारम्परिक प्रथाक माहात्म्य

केकरो धार्मिक आस्था या धार्मिक महापुरुष केर गलत चित्रांकन करब गलते कहल जाय

एहेन मृत्यु सँ शिक्षा लेब जरूरी   स्वीडन के कलाकार ‘लार्स विल्क्स’ जे इस्लामक पैगम्बर मोहम्मद साहेब पर आधारित निन्दित कार्टून बनेने छलाह से आइ एक सड़क दुर्घटना मे मारल गेलाह। दुर्घटना कोनो अन्य कारण सँ नहि बल्कि जाहि पुलिस सुरक्षा सहितक गाड़ी मे ओ यात्रा कय रहल छलाह से स्वयं अनियंत्रित होइत एकटा ट्रक केकरो धार्मिक आस्था या धार्मिक महापुरुष केर गलत चित्रांकन करब गलते कहल जाय

चीनक पारम्परिक विवाह पद्धति संग मिथिला पद्धतिक तुलना

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी कोन नीक, हम या ओ   विवाहक तौर-तरीका सेहो विभिन्न सभ्यताक विशिष्टता होइत छैक। हम-अहाँ मिथिला सभ्यताक लोक मे विवाहक परम्परा अति-विशिष्ट अछि। लेकिन अपने मोने मियाँ मुंह मिट्ठू भेला सँ त काज नहि चलत, एहि लेल हम सब अपन मिथिलाक वैवाहिक विध-विधान, परम्परा, तौर-तरीका, शैली, विशेषता आदि केँ कोनो चीनक पारम्परिक विवाह पद्धति संग मिथिला पद्धतिक तुलना

ई जातीय व्यवस्था सिर्फ हिन्दुस्तानहि टा मे छैक या अन्तहु

वर्ण व्यवस्था आ चीनक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी समाजक संरचना आ संचालन देखि स्पष्ट छैक जे एहि मे सभक सामुहिक योगदान रहैत छैक। सब जाति, सब धर्म, सब वर्ग, निर्बल-सबल, होशियार-जोशियार कि बकलेल-बुधियार – सभक। तखन मानव प्रकृति मे अपन जाति के नाम पर कखनहुँ श्रेष्ठताक भावना (Superiority Complex) या फेर हीन भावना (Inferiority ई जातीय व्यवस्था सिर्फ हिन्दुस्तानहि टा मे छैक या अन्तहु

वर्तमान समय परिवार मे कलह केर मुख्य कारण की?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी पारिवारिक कलह सँ बचबाक विवेक   कतेक बेर देखल गेलैक अछि जे दहेज दय कय विवाह भेल कनियाँ अपन सासु-ससुर सँ एहि बात लेल घोर घृणा आ विद्रोह बाद मे करैत छथिन, सासु किछु बजली कि टप् दय जवाब दय देल करैत छथिन पुतोहु जे कोनो हमर माय-बाप मंगनी मे वर्तमान समय परिवार मे कलह केर मुख्य कारण की?

मनक गति सँ जीवनक गति – महत्वपूर्ण दर्शन

एकटा सहज लेकिन महत्वपूर्ण दर्शन   (A Simple But Significant Philosophy) – प्रवीण नारायण चौधरी जबानीक जोश जखन माथ पर सवार रहैछ त लोक केवल इन्द्रिय केर विषय-भोग मे रमण करैत अछि। पुनः भोगक विन्यास सँ जखन जीवन यात्रा प्रभावित होबय लगैत छैक, यानि शरीर अस्वस्थ भेल या कतहु जोरदार धक्का लागल, तखन लोक के मनक गति सँ जीवनक गति – महत्वपूर्ण दर्शन