चैती छठि केर आकर्षण ,आइ डुबैत सूर्यदेवके अर्घ देल जाइत

350

 

मनीष कर्ण,जनकपुरधाम ।२,अप्रील२०१७.मैथिलीजिन्दावाद!!

      मिथिलाञ्चलक कठोर पवैनक रुपमे मनाएवाला चैती छैठ केर तेसर दिन डुबैत सूर्यदेवके अर्घ देल जाएत।हरेक साल कार्तिक आ चैत मासमे   शुक्ल षष्टीक दिन पोखरि मुहार पर भगवान सूर्य आ माता षष्टी माता श्रद्दाभक्तिभाव पूर्वक अर्घ दैत मनाओल जाइछ।चारि दिनमा चैती छठि अन्तर्गत आइ तेसर दिन डुबैत सूर्यके ठकुवा,भुसुवा,नारियल,फलफूल,कुसीयार आ मिठाइ सहितक पकवान सं अर्घ अर्पण केएल जाएत।

एतिहासिक नगरी जनकपुरधामक गंगासागर,धनुषसागर,अंगराजसर सहितक सरोवर सभ  नव कन्या जका सजाओल गेल अछि।तहिना धनुषा जिल्ला सहित ग्रामीण क्षेत्रमें हर्षोल्लासक संग मनाओल जाइत छैक।

पौराणिककालमे सती अनुसुइयाक पति बिमार परलाक बाद ओ भगवान सुर्य देवके आराधना केने छलीह।तहिना महाभारतमे पाण्डवक पत्नी द्रोपती कौरव सभके  युद्दमें पराजित कारबाक उद्देश्य सं  छठि केने बात धार्मिक ग्रन्थसभ उल्लेख रहल अछि ।छठि कएला सऽ रोग कलेश सं मुक्ति,सन्तान सुख केर प्राप्ति,चर्मरोग सं छुटकारा आ पारिवारिक सुख,शान्ति आ समृदी होएबाक जनविश्वास रहल अछि ।करिब ३६ घन्टा तक निराहार रही पवित्र तन,मन सं व्रत कर पारबाक भेला कारने एकरा आस्था, निष्ठा आ कठोर व्रत आ हिन्दु सभक महापर्व रुपके चिन्हल जाएत अछि ।मैथिलीक  संस्कृतिविद आ चर्चित गायिका रुपा झाक अनुसार छैठ पवैनक कारण जनकपुरधामक अपने अलग  पहिचान बनि रहल अछि।