हैदराबाद, ०६ मार्च, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!
मिथिला सांस्कृतिक परिषद् एवम् मिथिला मंथन केर संयुक्त आयोजन मे सुगौली संधिक २०१म वार्षिक दिवस ४ मार्च, २०१७ केँ हैदराबाद मे विभिन्न आयोजनक संग स्मृति मे आनल गेल। संस्थापक बीके कर्ण द्वारा पूर्व घोषणा अनुरूप आजुक दिवस समस्त मिथिलावासी १-दिना उपवास राखि एकटा अत्यन्त दुःखक दिन केर रूप मे स्मृति मे रखबाक कार्य करैथ से एतहु पूरा कएल गेल। उपवासक संग-संग अन्यान्य आयोजन एहि दिवसक खासियत रहल।
श्री कर्ण द्वारा अपडेट कएल गेल जनतब मुताबिक सुगौली संधि सँ मिथिला विभाजनक २०१ वर्ष (मार्च ४, १८१६ – मार्च ४, २०१७) पर
१) एक दिन केर उपवास
२) “जय मिथिला, जय जय मिथिला” पर गोष्ठी
३) गोष्ठी उपरांत मिथिलाक प्रिय भोजन चूड़ा-दही चीनी अचार सँ उपवास पूरा
ई समस्त कार्यक्रम सैकड़ों महिला एवम् सज्जनवृन्द मिथिलावासीक संग सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल।
एहि अवसरपर बहुत रास विषयपर मंथन कएल जेबाक बात सेहो श्री कर्ण अपन अपडेट्स मार्फत जनौलनि अछि। ओ कहलैन अछि जे विशेषरूप सँ सुगौली संधिक प्रभाव पर चर्चा कएल गेल जाहि मे ९ मुख्य मुद्दा पर वक्ता लोकनि विचार रखलैन। ओ ९ विन्दु एना छलः
१) विभाजनक वेदना और उपवास : मन शांति, क्षेत्र शांति, जे जतय रहय प्रसन्न रहय, विकास करय, मिथिलाक सांस्कृतिक विभाजन नहि भेल अछि, आब आरो कोनो तरहक विभाजन केँ स्वीकार नहि कएल जा सकत।
२) मार्च ०४ केँ हरेक वर्ष उपवास, हरेक मैथिल अपने-आप राखथि – स्वेच्छा सँ, ई आह्वान कएल गेल।
३) मैथिल केर अपन विशिष्ट पहिचान केँ स्थापना करबाक लेल विभिन्न आयोजन – कार्यक्रम सब होएत रहबाक चाही।
४) मिथिला ब्रांड केँ लोकप्रिय करब – हर स्तर पर निजता केँ प्रवर्धन करबाक प्रण।
५) आवासी – प्रवासी मैथिल जनमानसक बीच निरंतर सेमिनार और ओकर प्रभाव केर आकलन होएत रहबाक जरुरी पर प्रकाश देल गेल।
६) फोन पर Hello कहबाक बदला मे मैथिल सभक बीच “जय मिथिला” सँ बातचीत शुरू हो, प्रतिउत्तर मे – “जय जय मिथिला” बाजल जाय जाहि सँ अपन निजता प्रति आत्मगौरवक बोध बढत।
७) सुगौली संधि केर संग मिथिलाक इतिहासक बारे मे टेक्स्ट बुक मे स्थान हो, भारत सरकार सँ आग्रह।
८) मिथिलाक प्रवासी जो जाहि क्षेत्रक विशेषज्ञ छथि, मिथिला क्षेत्र लेल हुनका सँ ओहि क्षेत्र मे सहयोग केर अपेक्षा।
९) चुड़ा दही चीनी भोजन मिथिलाक विशेष भोजन थिक, एकर मिथिलाक बाहरो प्रचार-प्रसार कएल जेबाक चाही। आजुक फास्ट फूड संस्कृति मे एकर लोकप्रियता आ महत्व अलगे अछि, एहि विन्दुपर जन-जन धरि मिथिलाक फास्ट फूड – चुड़ा-दही-चीनी-अँचारक प्रचार कएल जेबाक चाही।
एहि ९ विन्दुपर चर्चा आ कार्ययोजनाक अतिरिक्त मैथिली ठाकुर जे कलर्स टीवी पर चलि रहल राइजिंग स्टार पर ११ मार्च केँ लाइव पर्फोर्म करती हुनका लेल वोट देबाक अपील कएल गेल, ओ मिथिलाक गर्व थिकीह, से निर्णय सब कियो एकजुट स्वर मे लेलनि।

1 Comment
मिथिला सांस्कृतिक परिषद और मिथिला मंथन द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन
————————————————————————————-
हैदराबाद की सांस्कृतिक परिषद एवं मिथिला मंथन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 4 मार्च, 2017 को सोमाजीगुडा स्थित पी.सी.आर.आइ. के प्रशिक्षण हॉल में सायं 4 बजे से एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें 201 वर्ष पूर्व ठीक आज के ही दिन (4 मार्च, 1816) ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं नेपाल के बीच प्रसिद्ध‘सुगौली संधि’ के फलस्वरूप मिथिला क्षेत्र के विभाजन की वेदना के पृष्ठभूमि में ‘जय मिथिला, जय जय मिथिला’ विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए । पं. वरुण शास्त्री द्वारा वेद मंत्रोच्चार के साथ समवेत दीप प्रज्ज्वलन के द्वारा औपचारिक उद्घातन के पश्चात् श्री बी.के.कर्णा ने गोष्ठी के विषय पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित सदस्यों का अभिनंदन किया । विनय कुमार झा ने पावर प्वाइंट के माध्यम से मिथिला के इतिहास, भूगोल आदि के पौराणिक एवं ऐतिहासिक साक्ष्यों से श्रोताओं को परिचित कराते हुए सुगौली संधि की पृष्ठभूमि एवं प्रभावों के ऊपर एक सारगर्भित व्याख्यान पकी प्रस्तुति दी । श्री संयोग ठाकुर एवं डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने मिथिला में कृषि क्रांति की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र के किसानों को आधुनिक विधि से कृषि एवं मत्स्य तथा मखाना उत्पादन जैसी लाभकारी उद्यमों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए । पं वरुण शास्त्री एवं भवकांत झा नने मिथिला के महत्व पर चर्चा करते हुए अपनी-अपनी शुभकामनाएँ व्यक्त की । श्री विकास वत्सनाभ ने नेपाल के मधेशियों की व्यथा का जिक्र करते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की । परिषद के महासचिव शशिकांत मिश्र ने अपने सम्बोधन मे मिथिला के लोगों को उद्यम की तरफ उन्मुख होने का आह्वान करते हुए स्वयं भी नवीन उद्यमों को अपनाने का संकल्प लिया । बिनय कुमार लाल ने अतीत की व्यथा-कथाओं से बाहर निकलकर वर्त्तमान मे मिथिला के विकास के लिए कार्य करने पर बल दिया । माधव झा ने अनुरोध किया कि राज्य एवं केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रियों से मिथिला के गौरवशाली इतिहास एवं वर्त्तमान सम्बंधी विषयो को पाठ्यक्रम मे शामिल करने के लिए दबाव डाला जाय । श्री अनिल कुमार झा ने सुगौली संधि विषयक जानकारी के लिए सभा का धन्यवाद करते हुए अतीत एवं वर्त्तमान के बीच समन्वयपूर्ण सम्बंध की पैरवी की । महिला सदस्यों श्रीमती साधना झा, श्रीमती किरण कर्णा, श्रीमती रेणु एवं सुश्री आयुषी ने अपने संबोधनों में मिथिला एवं मैथिली की गौरवशाली परम्पराओं का जिक्र करते हुए प्रवासी मैथिल परिवारों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने घरों में मैथिली भाषा के प्रयोग पर बल दें । साथ ही समाज में परम्परा एवं आदर्शों के नाम पर चली आ रही रूढ़ियों से संघर्ष करते हुए नारी उत्थान की आवश्यकता पर बल दिया एवं इसके लिए हर सम्भव सहयोग की पेशकश की । वरिष्ठ सदस्य श्री निर्भय नारायण दास ने नौजवानों के उत्साह का समर्थन करते हुए इस प्रकार की विचार गोष्ठियों के माध्यम से जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल दिया और भविष्य के लिए शुभकामना व्यक्त की । गोष्ठी के आयोजक श्री बी.के कर्णा ने सभा को सूचित किया कि सुगौली संधि के कारण मिथिला के विभाजन के दर्द में सहभागिता और जानकी प्रकट्य दिवस ‘जानकी नवमी’ को राष्ट्रीय महत्व का पर्व घोषित किए जाने को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखा है जिसकी पावती भी मिल चुकी है । अपने पावर प्वाइंट प्रस्तुति मे नासा के स्पेश सेटलमेंट कार्यक्रम की प्रतियोगिता मे हैदराबाद के स्कूली छात्रों द्वारा मिथिला को आदर्श स्वर्गिक ग्राम के रूप मे जिक्र किए जाने का उदाहरण देते हुए इसकी सर्वव्यापकता पर प्रकाश डाला । उन्होंने इस बात के लिए भी निराशा व्यक्त की कि एक गौरवशाली इतिहास से परिपूर्ण मिथिला राज्य आज वर्त्तमान में एक पूर्ण क्षेत्र के रूप में भी सम्मानित नहीं है जिसके लिए उन्होंने उचित नेतृत्व का अभाव,उद्यमिता के प्रति मैथिलों की उदासीनता, नवीन विचारों के प्रति अनुत्साह आदि को प्रमुख कारक बताते हुए सभी मैथिलों का आह्वान किया कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें और यथा सम्भव प्रयत्नशील हों । इस सम्बंध में उन्होंने मिथिला मंथन के तहत स्वयं के द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों की जानकारी भी दी । गोष्ठी के अंत में विनय कुमार झा ने वक्ताओं के विचारों का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि सुगौली संधि चूँकि दो सम्प्रभु राष्ट्रों की सीमाओं से सम्बद्ध विषय है अत: अति उत्साह में इसके विरोध का अर्थ अंतर्राष्ट्रीय शांति के विरोध में खड़ा होना माना जायगा । भारत स्वयं कई प्रकार की सीमा समस्याओं से अनवरत संघर्ष कर रहा है, अत: एक और समस्या के विषय मे बातें करने का औचित्य नहीं है । इसके विपरीत हम सब को मिलकर भारत की सीमा के अधीन स्थित मिथिला क्षेत्र के सर्वांगीन विकास के लिए इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के लिए संघर्ष करना चाहिए । सभा के अंत में श्री बी.के. कर्णा ने धन्यवाद ज्ञापन किया । सभा के अंत में सदस्यों ने पारम्परिक मैथिल भोजन दही-चूरा-चीनी- अँचार के सहभोज का आनंद लिया ।