नव बर्ष २०७२ के शुभ उपलक्ष्यमे सम्पूर्ण साथीसभमे उत्तरोत्तर प्रगतिक कामना सहित ई एकटा कविता …….
सम्मान जन्मभूमि केर [कविता]
आयल नवका साल देखु
लs कs एक नयाँ उत्साह
सब छथि मगन एक दोसरमे
करय हृदयसँ प्रेम प्रवाह ।।
आजु कते महत्वक दिन
एक दोसराकेँ सब जुराबय
रहय सदखनि एहने दिन
शान्ति आर समृद्धि पाबय ।।
मानवबीच सद्भाव देखल
गाछ-वृक्ष सब हरा भरा
मनोरम दृश्य आ अद्भूत परिकार
लागे जेना प्यारा-प्यारा ।।
ईर्ष्या-द्वेष त्यागब उत्सवमे
पुन: मिलि-जुलि परिवार चलायब
आमक चटनी आ दही भात
चैतक रान्हल वैशाखमे खायब ।।
छूटल ई सौभाग्य हमर
जखनहि बढलहुँ बिदेशक ओर
राति-राति भरि निन्द न आबय
भोरे आँखिसँ टपकय नोर ।।
अपनेक दुआ आ धैर्यताक आड़िमे
काममे हम प्रस्थान करैत छी
अन्तहकरणसँ हर अवसर पर
जन्म आ कर्मभूमिकेँ सम्मान करैत छी ।।


