लेख विचार
प्रेषित: दिलीप झा ललित
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- धनतेरस
आरोग्य, समृद्धि आ आत्मिक उजासक पर्व “धनतेरस”
दीप झिलमिल, घर मुसकाय,
आँगन में शुभ जोति समाय।
धनतेरस दिन आयल सन्देश,
आरोग्य, लक्ष्मी, सुखक परिवेश।
दीपावली पर्वक आरम्भ धनतेरस सँ होइत अछि। ‘धनत्रयोदशी’ अथवा ‘धनतेरस’ कहल जाएबला ई दिवस कार्तिक कृष्ण पक्षक त्रयोदशी तिथि पर पड़ैत अछि। ई दिन केवल सम्पत्ति आ ऐश्वर्यक पूजा लेल नहि, बल्कि आरोग्य, समृद्धि आ दीर्घायु लेल सेहो विशेष रूप सँ मान्य अछि।
धार्मिक मान्यताक अनुसार, समुद्र मन्थनक समय जखन भगवान धनवन्तरी अमृत कलश लऽ प्रकट भेलाह, तखन ओ आयुर्वेद आ आरोग्यक देवता रूपे पूज्य बनलाह। एहि दिन भगवान धनवन्तरी, माता लक्ष्मी आ धनदेवता कुबेरक पूजा करबाक परंपरा अछि।
लोकमानस में ई विश्वास अछि जे एहि दिन स्वच्छता, दीपदान आ नव बर्तन वा धातु किन’ सँ घर में लक्ष्मी प्रवेश करैत छथि। परंतु ई धन केवल सोना-चाँदी वा बर्तनक अर्थ में नहि, बल्कि आत्मिक समृद्धि, स्वास्थ्य आ संतोषक प्रतीक अछि।
धनतेरसक सच्चा सन्देश अछि शरीर स्वस्थ रहय, मन शांत रहय, आ परिवार में एकता आ प्रेम रहय। एहेन जीवन में भले धन कम हो, परन्तु सुखक कमी नहि रहैत छैक।
सामाजिक दृष्टि सँ ई पर्व स्वच्छता, नियमितता आ संयमक प्रेरणा दैत अछि। दीयाक उजास जेना अन्हार हटबैत अछि, तहिना सदाचारक दीप मानव जीवन सँ अज्ञान आ असंतुलन दूर करैत अछि।
आरोग्य दीप जरायबऽ सब,
मनके मलिनता दूर करब।
सच्चा धन ओहि दिन पायब,
जाहि दिन अतः मनक जोति जरत।
