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मिथिला नवनिर्माणक पहिल बैसार मधेपुरा सँ आरम्भः जनगणना मे मैथिली पर जोर देबाक संकल्प

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समाचार-साभार कुमार विक्रमादित्य । २६ अप्रैल २०२६, मैथिली जिन्दाबाद!!

काल्हि २५ अप्रैल २०२६ केँ मिथिला नवनिर्माण अभियानक पहिल बैसार टी पी कॉलेज मधेपुरा मे प्रो कुमार सौरभक संयोजकत्व मे संपन्न भेल । मधेपुरा, सुपौल सहरसा आ पूर्णिया सं ढेर रास व्याख्याता, शिक्षक, प्राचार्य आ गैर शिक्षकेत्तर कर्मी एहि कार्यक्रम मे उपस्थित रहि अपन बात रखलाह । बी एस एस कॉलेज सुपौल सं सुजीत कुमार वत्सक धन्यवाद ज्ञापनक संग भनहि कार्यक्रम समाप्त भ गेल मुदा ढेर रास काजक मसौदा सभक सोझा राखि ई संदेश देबा मे सफल भेल जे जं मैथिल अपन आँखि खुजल राखथि तं मैथिलीक झंडा सगर संसार मे फहराबैत रहत ।

तारानन्द झा तरुण अपन सम्बोधन मे बजलाह जे आगामी जनगणना मे अपन मातृभाषा मैथिली दर्ज करेबा पर विशेष जोर देल जाए । तहिना प्रसिद्ध उद्घोषक किसलय कृष्ण बजलाह जे गाम दिस जाधरि लोक नहि घुरताह ताधरि नवनिर्माण संभव नहि । लेखक आ साहित्यकार कुमार विक्रमादित्य अपन सम्बोधन मे बजलाह जे आवश्यकता छै जे सब मैथिल अपन अस्मिताक लड़ाई अपनहि सं शुरू करथि । वैचारिक मतभेद कें बिसारिकय सब कियो एकजुट होइथ आ मिथिला नवनिर्माणक एहि संकल्पना कें सफल होबय मे अपन सहभागिता सुनिश्चित करथि ।

संजीव कुमार सुमन, मनोज कुमार ठाकुर, वीरभद्र, गोविन्द प्रसाद, कुमार गौरव, बबलू कुमार, गीतांजलि, सूरज आ अशफाक़ आलमक सुंदर आ सोचनीय प्रश्न कें सफल करय लेल… प्रो धर्मव्रत चौधरी, प्रो उपेंद्र, रौशन जी, ज्योति आ अखिल आनंद जी सनक ढेर रास लोकक पीठ पर ठाड़ रहबाक आश्वासन ई आश्वस्त करबा मे सफल होयत जे घर घर मैथिली, दहेज मुक्त मिथिला, पर्यावरण चिंता, जनगणना मे मैथिली, मिथिला राज्य निर्माण, साहित्य संस्कृतिक प्रसार सन ढेर मुद्दा कें समेटय मे सफल होमय आ माँ जानकी हरेक गाम पहुँच संबल प्रदान करथि से शुभकामना ।

कुमार विक्रमादित्य केर उपरोक्त रिपोर्ट पर अनेकों महत्वपूर्ण मैथिली साहित्यकार लोकनिक प्रतिक्रिया सेहो आयल अछि जेकरा उल्लेख एहि समाचार संग करब आवश्यक अछि ।

वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार शशि बोध मिश्र शशि एहि आयोजनक प्रशंसा करैत सोशल मीडिया मे अपन प्रतिक्रिया देलनि अछि । ओ कहलनि जे एहि आयोजनक सफलताक लेल हार्दिक बधाइ । आइ प्रयोजन अछि ठाम ठाम एहेन आयोजनक ओरिआओन हो जाहिसँ मिथिलावासीक एकजुटताक सनेश देशभरि मे पसरि सकय । अपन भाषा, बोली आ मिथिलाक स्वतंत्र अस्तित्वक बोध सँ मिथिला प्रान्तक निर्माणक लेल शान्तिपूर्ण आन्दोलनक मार्ग प्रशस्त भऽ सकय । बहुत सराहनीय काज अहाँ सभ कऽ रहलहुं अछि; बहुत बहुत धन्यवाद ओ हार्दिक शुभकामना ।

तहिना अन्य वरिष्ठ साहित्यकार लेखक रमेश सेहो आयोजनक मादे अपन प्रतिक्रिया दैत कहलनि – अइ आयोजनक जतेक स्वागत आ प्रशंसा कयल जाय, कम्मे है’त ! कुमार विक्रमादित आ किसलय कृष्ण सन ऊर्जावान लोके स’ ई संभव छल । आ. ‘तरुण जीक जनगणना मे मैथिली लिखेबाक प्रसंग मे विचार’, एकदम उचित अछि । अहिना मिथिला समाज के जगाबैत रहू । सब अपन-अपन जीवन मे, साहित्यिक बनू, मैथिलीस्ट बनैत जाउ, मिथिला-मैथिलीक कार्यकर्त्ता बनैत जाउ! कोनो सरकारक भरोसें, किछु नहि है’त ! अहां लोकनिक सक्रियताक अभिनंदन !

केदार कानन, प्रमोद कुमार झा, रमण सिंह व अन्य साहित्यकार लोकनिक सेहो सराहना करैत एहि अभियानक सफलता लेल शुभकामना देल गेल अछि ।

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