एमएलएफ २०२६ मुम्बई – ३ दिवसीय सफलतम् आयोजन
मैथिली भाषा-साहित्यक सर्वोत्कृष्ट विचार-विमर्श – मैथिली नाटक एवं फिल्म पर आधारित प्रदर्शन संगहि मैथिली पुस्तक केर प्रदर्शनी समावेशित कार्यक्रम मुम्बई केर मड-आइलैन्ड मे ३-५ अप्रैल २०२६ केँ भव्य सफलताक संग सम्पन्न भेल । आउ पढ़ी, बुझी आ मनन करी जे कि होइत छैक एमएलएफ, आ ई आयोजन मैथिली भाषा-साहित्य आ विमर्श लेल कियैक मानल जाइत छैक सर्वश्रेष्ठ –
परम्परानुसार मैथिली भाषाक हाल-सालक दिवंगत साहित्यकार एवं विभिन्न विधाक स्रष्टा लोकनि केँ शब्द-श्रद्धाञ्जलि दैत कार्यक्रम ३ अप्रैल २०२६ केँ बीबी हाउस परिसय (मड आइलैन्ड, मलाड, मुम्बई) मे आयोजन आरम्भ भेल । प्रखर संचालक केदार काननक संचालन मे हिनका लोकनि केँ श्रद्धाञ्जलि देल गेलनि – उषा किरण खान, भवेश चन्द्र मिश्र शिवांशु, सुमित मिश्रा, डा. श्रीपति सिंह, शिव कुमार नीरव, शरदिन्दु चौधरी, डा. शिवेन्द्र दास, नीरजा रेणू, अग्निपुष्प, राना सुधाकर एवं डा. अमरनाथ मिश्र – श्रद्धाञ्जलि देनिहार सहभागी स्रष्टा सब मे स्वयं केदार कानन, डा. अरुणाभ सौरभ, चन्द्रेश, किसलय कृष्ण, डा. अरविन्द अक्कू, डा. तारानन्द वियोगी, रमण कुमार सिंह, डा. आभा झा, डा. विभा रानी, प्रवीण नारायण चौधरी छलाह । सम्पूर्ण दिवंगत स्रष्टा द्वारा अपन भाषाक साहित्य क्षेत्र मे कि-कतेक योगदान देल गेल आ हुनका सभक जीवन सँ वर्तमान पीढ़ी केँ कि सब प्रेरणा लेबाक चाही, ताहि पर केन्द्रित रहल ई पहिल सत्र ।
आब प्रस्तुत होइत छथि मैथिली गायक संजीव कश्यप । दिल्ली सँ एमएलएफ मे हिनक सहभागिताक महत्व बड पैघ अछि । २०१९ केर आयोजन सँ लगातार एमएलएफ मिथिला आ भारतक महान चर्चित कवि नागार्जुन यानि बैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ रचित मिथिला वन्दना – भगवन हमर ई मिथिला सुख शान्ति केर घर हो – एहि वन्दनाक गायन सँ एमएलएफ अपन आन्तरिक मनसाय जगजाहिर करैछ । एहि मे मिथिला ओ मैथिल केर उत्कृष्टता केँ निरन्तर समृद्धिक परिकल्पना निहित अछि । जखन कवि कहैत छथि – ई पाग विश्व भरि मे सब केर माथ पर हो, ताहि सँ स्पष्ट अछि जे हम मैथिल अपन शिरस्त्राण सभक माथ पर देखय चाहैत छी आर से अपन सृजनबल सँ, नहि कि बम-बारूद सँ । यैह परम्परा रहल अछि हमरा सभक जे बुद्धि-विद्याक बल सँ मानव संसार केँ आबाद देखय चाहि रहल छी, चाहैत रहल छी ।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर परिकल्पना मैथिली लेखक संघक तेजपुंज लेखक लोकनि कयने छथि । नियमावलीक एक-एक पाँति बहुत सोचि-बुझि रचल गेल अछि । एहि मे तामझाम कम आ गरिमा-मान केर आधिक्य निहित कयल गेल अछि । स्तुत्य छथि ओ सब गोटे । पटना (बिहार) सँ २०१४ सँ आरम्भ ई एमएलएफ अपन भाषाक ओज विश्व भरि मे स्थापित करय एहि उपक्रम-प्रक्रम केँ आरम्भ कएने छथि । एकर दर्शन अपने सब केँ एहि सम्पूर्ण प्रस्तुतिक सारांश पढ़ला आ बुझला मात्र सँ पता चलत ।
औपचारिक उद्घाटन संयोजक विनोद कुमार झा ‘सरकार’ केर संचालन मे आरम्भ भेल । उद्घोषण समन्वयक किसलय कृष्ण अपन शानदार अन्दाज मे सत्र-मध्यान्तर केँ बखूबी सम्हारैत रहला । उद्घाटन चेतना समितिक अध्यक्ष विवेकानन्द झाक संग मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. तारानन्द वियोगी, डा. विद्यानन्द झा, प्रवीण नारायण चौधरी, डा. विभा रानी, डा. प्रमोद झा, गोपाल जी झा, डा. कमलानन्द झा ‘विभूति’, मनोरमा मैथिली, आनन्द मोहन झा, मुकेश सिंह, दीपक झाक सहभागिता मे आयोजित भेल । कार्तिकेय मैथिल, सतीश चन्द्र झा ओ मनीष ठाकुर सेहो उपस्थित रहथि ।
मनोरमा मैथिल द्वारा स्वागत सम्बोधन एवं अन्य समस्त वक्ता लोकनि द्वारा कार्यक्रम आयोजनक महत्ता एवं उपसंहार पर केन्द्रित वक्तव्य देल गेल छल । मनोरमाजी द्वारा कार्यक्रमक प्रारूप मे २२ गोट सत्र, एआई सहित अन्य आधुनिक विधा समेटबाक आ तीन दिन धरि विमर्श कार्यक्रमक रूपरेखा प्रस्तुत कयल गेल छल । डहकन, नाटक, सिनेमा, साहित्य चर्चा आदिक संग तीन दिन धरि सहभागी समस्त विद्वान वक्ता लोकनिक संग आयोजन सफल हो तेकर कामना कयल गेल छल ।
मनोयोगपूर्वक एमएलएफ २०२६ केर आयोजन कयल गेल । आदरणीय बिनोद कुमार झा सरकार सहित हुनक दायाँ-बायाँ दीपकजी व मनोरमाजी सहित ओ सब कियो धन्यवादक पात्र छथि जे अपन मैथिली भाषाक एहि अत्यन्त प्रतिष्ठित आयोजन हेतु तन, मन आ धन सँ यज्ञ सम्पन्न करौलनि । हृदय सँ आभार । माँ भगवती पराम्बा जानकीक आशीर्वाद अपने सब पर बनल रहत से गारंटी बुझू ।
कार्यक्रम समन्वयक रूप मे मैथिली आ मराठी भाषाक चर्चित विदुषी साहित्यकार डा. ममता झा द्वारा सत्रक आरम्भ करायल गेल छल । पहिल सत्र ‘मैथिली मे एआई केर प्रभाव’ विषय पर आधारित छल । एकर संचालन भास्करानन्द झा द्वारा कयल गेल । एहि मे विमर्शीक तौर पर प्रदीप बिहारी, राजेन्द्र झा, मनीष ठाकुर, कार्तिकेय मैथिल संग कुमार विक्रमादित्य सहभागिता जनौलनि । एआई व अन्य तकनीकी केर सहयोग लैत भाषाक विभिन्न कार्य सहजता सँ कयल जेबाक चाही, परञ्च साहित्यक मौलिक विशेषता आ स्तरीयता केँ बचेबाक लेल सृजनकर्मीक निजी योग्यता मात्र सँ उत्कृष्टता बनत ताहि पर सब गोटे सचेत रहथि ई निष्कर्ष निकलल छल ।
विदित हो जे पहिल निर्धारित सत्र “समकालीन भारतीय साहित्य मे मैथिलीक वर्तमान परिदृश्य” पर आमंत्रित वक्ता लोकनि मध्य सँ श्रीधरम, कमलानन्द विभूति, कैलाश कुमार मिश्रा, डा. आभा झा, शंकर मधुपांश एवं कृष्ण कुमार अन्वेषक एवं संचालन लेल अरुणाभ सौरभ मध्य सँ श्रीधरम, कैलाश कुमार मिश्रा, शंकर मधुपांश आदिक अनुपस्थिति तथा पूर्व निर्धारित समय सँ कार्यक्रम विलम्ब सँ आरम्भ हेबाक कारणे उद्घाटन सत्र मे उपस्थित वक्ता लोकनि केँ एहि विषय पर विमर्श समावेश करैत अन्य सत्र सब केँ ससमय आरम्भ करायल गेल छल ।
“मैथिली साहित्य मे एआइ’क प्रभावः संदर्भ – लेखन, प्रकाशन आ अनुवाद” लेल आमंत्रित वक्ता प्रवीण कुमार झा, सुधीर चन्द्र मिश्र तथा संजीव सिन्हा, तहिना संचालन लेल अपेक्षित गुंजन श्री केर अनुपस्थिति मे उपरोक्त वर्णित वक्ता ओ वैकल्पिक संचालक भास्करानन्द झा भास्कर केर संचालन मे उपस्थित वैकल्पिक वक्ता प्रदीप बिहारी एवं राजेन्द्र झाक संलग्नता मे ई सत्र अत्यन्त सफल रहल एहि मे कोनो आशंका नहि ।
कतेको महत्वपूर्ण अपेक्षित आमंत्रित वक्ताक अनुपस्थिक परिस्थिति मे समयोचित समायोजन अपरिहार्य छल । संयोजक विनोद कुमार झाक निर्देशन मे समन्वयक डा. ममता झा व मध्यान्तर-उद्घोषक किसलय कृष्ण द्वारा उपयुक्त वक्ताक चयन कयल जाइत देखल गेल । एहि क्रम मे कतेको संचालक एवं प्रस्तोता लोकनिक पुनरावृत्ति विभिन्न सत्र सब मे देखल गेल । आर एहि तरहें वगैर पूर्व तैयारी, मात्र तत्काल प्रस्तुत हेबाक हिसाबे एहेन सत्र प्रभावित भेल । हालांकि प्रस्तुतिक स्तरीयता कोहुना उपस्थित वक्ता लोकनिक विज्ञ अनुभवी विचार एवं जानकारी सभक कारण तेहेन बेसी केकरो नहि खटकल, से प्रत्यक्षदर्शीक प्रतिक्रिया सँ स्पष्ट छल ।
एहि तरहें पहिल दिनक दोसर सत्र ‘मैथिली भाषाक वर्तमान स्वरूपः कथ्य आ शिल्प’ जेकर संचालन डा. विभा कुमारी आ सहभागी विमर्शीक रूप मे वरिष्ठ साहित्यकार लोकनि प्रदीप बिहारी, डा. तारानन्द वियोगी, डा. योगानन्द झा एवं दीपिका झाक सहभागिता छल । मैथिली कथाक स्वरूप मे अन्यान्य भाषाक तुलना मे केहेन स्थिति अछि, पहिनुका कथाकार आ वर्तमान कथाकार सभक लेखनक केन्द्र मे कोन तरहक कथ्य आ शिल्प पर काज होइत रहल ताहि पर विस्तृत चर्चा कयल गेल । विभा झाक संचालन मे पृष्ठभूमि, वर्तमान आ भविष्य धरिक चिन्तनयुक्त प्रश्न आ तेहने उत्कृष्ट उत्तर सँ भरल छल ई सत्र ।
एहि सत्र मैथिली कथाक वर्तमान स्वरूप : कथ्य आ शिल्प लेल आमंत्रित वक्ता मध्य सँ प्रदीप बिहारी, सुस्मिता पाठक, तारानन्द वियोगी व दीपिका झाक अतिरिक्त पंकज प्रियांशु, श्रीधरम, अजित आजाद केर अनुपस्थिति छल । पूर्व-निर्धारित (अपेक्षित) संचालक वरिष्ठ साहित्यकार दिलीप कुमार झा सेहो अनुपस्थित रहथि । तेँ संचालन डा. विभा कुमारी द्वारा करैत अन्य उपस्थित विद्वान-वक्ता सब सँ अनुपस्थित साहित्यकार लोकनिक प्रतिस्थापना होयब नियतिक खेल बुझू – समायोजनक मेल बुझू ।
पोथी विमोचनक स्वतंत्र सत्र
प्रथम बेर मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल मे पोथी विमोचन लेल स्वतंत्र सत्र राखल गेल छल । पहिल पोथी ‘कुशल क्षेम’ – लेखक केदार कानन केर विमोचनकर्ता लोकनि तारानन्द वियोगी, प्रदीप बिहारी, विद्यानन्द झा, कमलानन्द विभूति, दीपिका झा, विभा रानी, अरविन्द अक्कू, विनोद कुमार झा सरकार व प्रकाश झा रहथि ।
दोसर महत्वपूर्ण पोथी ‘आध जनम हम निन्द गमाओल’ – लेखक गंगानाथ गंगेश – विमोचक पूर्वहि मंचस्थ विमोचनकर्ताक अतिरिक्त डा. आभा झा, डा. अरुणाभ सौरभ केर सेहो उपस्थिति छल ।
तेसर पोथी – संस्मरण स्वरूप ‘कोसिकन्हाक चिठ्ठी’ – विमोचन लेल उपरोक्त अतिथि लोकनिक संगहि सिनेमा क्षेत्रक प्रसिद्ध नाम अविनाश दास एवं कोशीपुत्र सिनेकर्मी राहुल सिन्हाक उपस्थिति छल ।
चारिम पोथी – मैथिली-हिन्दीक सुपरिचित युवा लेखक अरुणाभ सौरभक नव कृति ‘निहितार्थ’ केर विमोचन कयल गेल । एकर विमोचन मे डा. तारानन्द वियोगी, केदार कानन, रमण कुमार सिंह, सुस्मिता झा, डा. कमलानन्द विभूति, प्रदीप बिहारी, विभा रानी एवं अविनाश दास केर सहभागिता छल ।
पाँचम पोथी – नेपाल विराटनगर केर चर्चित कथाकार राना सुधाकर केर एकमात्र प्रकाशित कथासंग्रह ‘दीयरि’ केर विमोचन राजेन्द्र झा, बिनोद कुमार झा सरकार तथा केदार कानन द्वारा कयल गेल । पुस्तक उपलब्धता अनुरूप केवल ३ गोटेक नाम रहितो एहि महान साहित्यकार कृतिक विमोचन मे अन्य समस्त अतिथि लोकनिक उपस्थिति सेहो छल ।
छठम पोथी – प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा अनुवादित कांची कामकोटि पीठक शंकराचार्य द्वारा लिखल गेल ‘द वेदाज’ (अंग्रेजी) केर मैथिली अनुवाद ‘वेद’ केर विमोचन डा. आभा झा, विनोद कुमार झा सरकार, डा. विभा कुमारी, केदार कानन, तारानन्द वियोगी, प्रदीप बिहारी, विभा रानी द्वारा कयल गेल छल । उद्घोषक किसलय कृष्ण द्वारा एहि पुस्तकक प्रकाशन सन्दर्भ अपन विशेष उद्गार व परिचय सेहो राखल गेल छल । लेखकक अपन काजक अन्दाज मे ‘वेद’ केर प्रकाशन केँ महत्वपूर्ण मानैत भाषान्तरणक कार्य पर ओ प्रकाश देने रहथि ।
तहिना सातम पोथी दीपिका झा द्वारा लिखल गेल बाल उपन्यास ‘चिनगी’ केर विमोचन डा. कमलानन्द झा ‘विभूति’, डा. विभा कुमारी, केदार कानन, विनोद कुमार झा सरकार, मेनका मल्लिक तथा रमण कुमार सिंह द्वारा कयल गेल ।
आठम पोथी रूप मे कथासंग्रह ‘सिमरिया’ – लेखक प्रदीप बिहारी – विमोचक डा. अरविन्द अक्कू, डा. तारानन्द वियोगी, केदार कानन, डा. विद्यानन्द झा, डा. योगानन्द झा, अविनाश दास एवं दीपिका झा द्वारा कयल गेल ।
नवम पोथी रूप मे डा. विभा कुमारीक लिखल ‘मैथिली साहित्य मे अस्मितामूलक विमर्श’ केर विमोचन मे सेहो प्रदीप बिहारी, केदार कानन, डा. योगानन्द झा, डा. विद्यानन्द झा, डा. कमलानन्द विभूति, डा. अरविन्द अक्कू, डा. विभा रानी, डा. तारानन्द वियोगी एवं अविनाश दास द्वारा कयल गेल ।
पुनः दसम पोथी रूप मे दीपिका झाक लिखल ‘रेड लाइट’ केर विमोचन मे सिनेमा क्षेत्रक राजीव गजराज, कुणाल ठाकुर, राहुल सिन्हा सहित अन्यान्य विद्वान् लोकनि उपस्थित रहथि ।
तदोपरान्त मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर सह-संयोजक संगहि मैथिली दर्पण पत्रिकाक प्रकाशक दीपक झा द्वारा प्रकाशित ‘मैथिली दर्पण’ केर नव अंक केर विमोचन बिनोद कुमार झा सरकार, कृष्ण कुमार झा अन्वेषक, केदार कानन, रमण कुमार सिंह, चन्द्रेश, मनोरमा मिश्रा झा, राजेश कुमार झा, प्रवीण नारायण चौधरी, विमल जी मिश्र, मनीष ठाकुर, पंकज झा व धर्मेन्द्र कुमार झा द्वारा कयल गेल ।
एहि तरहें कुल १० गोट पोथी व १ गोट पत्रिकाक विमोचन संग प्रथम दिनक आधा दिवसक आयोजन पूर्ण भेल ।
भोजनावकाश उपरान्तक सत्र
पहिल दिनक भोजनावकाश उपरान्तक पहिल आ आयोजनक तेसर सत्र “मैथिली नाट्य-लेखन रंगमंच सँ कतेक लग, कतेक दूर” प्रस्तुत भेल । एहि सत्र केर संचालन मैलोरंग केर संस्थापक डा. प्रकाश झाक संचालन मे उपस्थित वक्ता डा. अरविन्द अक्कू, सोनी नीलू झा, जीतेन्द्र नाथ जीतू, दीपिका झा तथा अनुपस्थित महत्वपूर्ण वक्ता रमेश रंजन झा केँ प्रतिस्थापित करैत डा. कमलानन्द झा ‘विभूति’ केर संलग्नता मे विशद विमर्श प्रस्तुत कयल गेल । तहिना उपस्थित अभिनेत्री रेखा सिंह सेहो एहि सत्रक आमंत्रित अतिथि वक्ता रूप मे अपन विचार व मैथिली नाटक सँ पटना प्रवासक समय जुड़ल रहबाक अनुभव सब साझा कयल गेल रहय ।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर एकटा खासियत ई छैक जे हरेक सत्र केर अन्तिम चरण मे दर्शक दीर्घा सँ प्रशन लेल जाइछ, जाहि वक्ता सँ जेहेन सवाल से पुछल जा सकैछ । नाटकक सत्र मे चेतना समितिक अध्यक्ष विवेकानन्द झा द्वारा अपन जिज्ञासा आ सुझाव साझा कयल गेल छल । नाटकक अबधि कम हो, पात्र केर संख्या कम हो, आदि विभिन्न सुझाव मैथिली नाटकक वर्तमान स्वरूप मे होयब आवश्यक अछि ओ विचार देलनि ।
पुनः नाटकहि सन्दर्भित एक गोट प्रस्तुति साहित्यकार-लेखक अरुणाभ सौरभ द्वारा स्वयं लिखित नाटक “अश्वत्थामा संवाद” केर मंचन कयल गेल छल । ई एकल नाटक छल । एहि मे संगीत सुनील पवन केर छलन्हि ।
नाट्य विधाक एक अनुपम छटा सँ पहिल दिनक अन्तिम कार्यक्रम छल “डहकन – सोनाक तार, रूपाक हार: अतीत सँ भविष्य धरिक यात्रा” जेकर प्रस्तुति विभा रानी कएने छलिह । एहि मे ढोल-तबला आ हारमोनियम पर दुइ स्थानीय सहयोगी कलाकार हैदर अब्बास (तबला) आ महबूब भाइ (हारमोनियम) केर सहभागिता छल । विभा रानी ‘डहकन’ संग सहकार्य कयनिहार मराठी युवा रिसर्च स्कौलर सन्देश ‘ईशनिन्दा’ मे सेहो ईश्वर पर्यन्त केँ गारि पढ़ि मनायल जेबाक रीत केर वर्णन कयलनि । संगहि मराठी भाषाक स्वरचित दुइ गोट रचना सेहो प्रस्तुत कयलनि । मिथिला लोक परम्परा मे गारि पढ़बाक, हँसी-चौल करबाक आ से सब गीत गाबिकय करबाक विन्दु पर स्वयं संकलित विभिन्न पारम्परिक गीत सभक कोलाज रूप मे ‘डहकन’ शीर्षकक प्रस्तुति लगभग डेढ़ घन्टा चलल छल । एहि तरहें पहिल दिनक आयोजन रात्रि भोजन संग सम्पन्न भेल छल । अन्त मे प्रस्तोता विभा रानी प्रस्तुति उपरान्त अपन सदिच्छा प्रकट करैत कहलनि जे गायन मे सिद्ध नहि रहितो गायन करबाक उद्देश्य डहकन केर सन्दर्भ समस्त भारत व विश्व धरि सूचनाक प्रसार करब अछि । हुनक प्रस्तुति मे दर्शक दीर्घा मे मौजूद विभिन्न हस्ती सब केँ नाम लय-लय केँ गारि पढ़बाक घड़ी सब गोटे गुदगुदाइत आ विहुँसैत रहल छलाह । एहि आनन्दक संग सब गोटे रात्रि भोजन लेल प्रस्थान कयलनि आ पहिल दिनक कार्यक्रम सम्पन्न भ’ गेल ।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२६ः दोसर दिन
दोसर दिनक आयोजन मे सत्र समन्वयक केर भूमिका धर्मेन्द्र झा द्वारा निभायल गेल छल । कार्यक्रम निर्धारित समय सँ आरम्भ भेल ।
दोसर दिनक पहिल सत्र डा. भास्कर ज्योतिक संचालन मे “मैथिली यात्रा वृतान्त, आत्मकथा, संस्मरण – मैथिली साहित्य मे स्थिति आ सम्भावना” विषय पर वक्ता केदार कानन, रमण कुमार सिंह, कमलानन्द झा विभूति, डॉ. आभा झा, जयन्ती कुमारी (निर्धारित वक्ता) केर अतिरिक्त राजेन्द्र झा एवं विवेकानन्द झा केर उपस्थिति छल । एहि सत्र मे मैथिली साहित्यकार लोकनि कोन तरहें यात्रा वृत्तान्त, आत्मकथा व संस्मरणादि केँ लिपिबद्ध कयलनि ताहि पर सोदाहरण चर्चा प्रस्तुत भेल छल । मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल मे विषय, वक्ता आ संचालकक चयन अनुसार एहि सत्र मे काफी रास गम्भीर विमर्शक विषय सब प्रस्तुत भेल बुझायल, कारण संचालक पूरा तैयारी कय केँ वक्ता अनुरूप सवालक सूची आ निज अध्ययन अनुसार भिन्न-भिन्न कालखंड मे लिखल गेल मैथिली साहित्य पर व्योरा सहित प्रस्तुत भेल रहथि ।
दोसर दिवसक दोसर सत्र “डिजिटल कंटेंट क्रिएटर (कथ्य सर्जक)क दायित्व आ मैथिली भाषाक विस्तार मे भूमिका” – अपेक्षित वक्ता लोकनि अभिकाष झा, विजय झा, आशुतोष मिश्र, प्रियांशा, कुन्दन आ संचालन अक्षय आनन्द सन्नी मध्य सँ विजय झा, प्रियांशा तथा संचालक अक्षय मात्रक उपस्थितिक स्थिति मे शाश्वत मिथिलाक अध्यक्ष मिथिलानुरागी राजकिशोर झा एवं कार्तिकेय मैथिल संग मनोरमा मैथिली केर सहभागिता सँ सत्र विशद विमर्श कयलक । मैथिली भाषा मे कथ्य सर्जक लोकनिक दायित्व पर विज्ञ सुझाव सेहो देल गेल । हालांकि सेशन एकलौती रील्स जेहेन कंटेंट मात्र पर विशेष केंद्रित रहल । परञ्च राजकिशोर झा द्वारा समग्र सम्बोधन संग विज्ञ सुझाव काफी महत्वपूर्ण रहल । संचालक सन्नी मैथिली कंटेंट क्रिएटर्स बीच आपसी प्रतिस्पर्धा मे गारागारीक नौबत पर सेहो सवाल उठायल गेल छल । साहित्य मे गुट, संगीत मे गुट, नाटक मे गुट – लेकिन सार्वजनिक कियो नहि लड़ैछ; लेकिन कंटेंट क्रिएटर्स बीच सरेआम सामाजिक संजाल मे गारागारी जेहेन विषय चिन्ताजनक अछि । युवा क्रिएटर्स प्रियांशा आ विजय द्वारा भोगल यथार्थ आ क्रिएशन आइडिया सब पर सुन्दर अनुभव संग एहि फिल्ड मे आर लोकक जुड़बाक वास्ते प्रोत्साहन सेहो कयल गेल छल ।
तेसर सत्र “मैथिली साहित्य मे स्त्री स्वर: देह, देश आ लोकतंत्र” विषय पर छल । एकर संचालन डा. विभा कुमारी कयलनि, वक्ताक रूप मे डा. विभा रानी, दीपिका चन्द्रा, मुन्नी कामत, शशि दम्भारे संगहि डा. आभा झा केर सहभागिता छलन्हि । एहि सत्रक विषय सम्भवतः पेंचिला या उलझल छल तेँ वक्ता सब भिन्न-भिन्न डार्हि-पात धरैत अपन-अपन विचार रखलनि । हालांकि मुन्नी कामत, आभा झा व विभा रानी विभिन्न लेखक-साहित्यकार सभक कृतिक नाम लैत ताहि मे वर्णित स्त्रीक स्वर आ देह, देश व लोकतंत्रक सन्दर्भ पर अपन विचार रखैत सत्रक मर्यादा रखलनि । तैयो कतेको बात विषय सँ दूर आ मैथिली साहित्य सँ इतर केर विषय-सन्दर्भ जोड़िकय प्रस्तुत होइत नजरि आयल । मात्र विषय मे प्रयुक्त शब्दावली केँ बलजोरी जोड़ि-जोड़िकय विचार रखबाक कारण कतहु न कतहु दर्शक दीर्घा मे निराशाक स्थिति छल, एना हमरा लागल ।
भोजनावकाश उपरान्त – दोसर दिवसक सत्र
चारिम सत्र “समकालीन मैथिली कविता – प्रेम, प्रतिरोध आ प्रयोग” – वक्ता तारानन्द वियोगी, विद्यानन्द झा, रमण कुमार सिंह, डा. आभा झा, विकास वत्सनाभ, किसलय कृष्ण तथा संचालनक भूमिका अजित आजाद पर निर्धारित रहितो दुइ महत्वपूर्ण सहभागी विकास वत्सनाभ व संचालक अजित आजाद केर अनुपस्थिति देखल गेल । तेहेन स्थिति मे एहि सत्र मे एक बेर फेर सँ अभरैत छथि अरुणाभ सौरभ – आ संचालकक भूमिका मे आबि जाइत छथि रमण कुमार सिंह । विषय मे प्रयुक्त शब्दावली केँ विभिन्न कवि लोकनिक कविता सभक सन्दर्भ सँ जोड़िकय वक्ता लोकनि अपन विचार रखलनि । पूरे सत्र मे प्रेम, प्रतिरोध आ प्रयोग शब्दक बरखा होइत रहल । डा. आभा झा अधिकतर कवयित्री सभक नाम लैत अपन विचार देलिह । विभिन्न वक्ता लोकनिक चिन्ता जे वर्तमान समयक कवि-कवयित्रीक सृजित कविता मे एहि तीन महत्वपूर्ण सन्दर्भक प्रयोग कम भ’ गेल अथवा उत्कृष्टता-स्तरीयताक ध्यान नहि रखैत अछि, मुदा अरुणाभ सौरभ एकर खंडन करैत पूर्वक स्थिति आ वर्तमान स्थिति मे कोनो फर्क नहि रहबाक बात रखलनि आ समस्त सृजन प्रति स्वीकार्यता बढ़ेबाक आग्रह कयलनि ।
पाँचम सत्र “मुम्बइ साहित्यिक बैसार मे मैथिली – प्रवासी अनुभव आ सांस्कृतिक पुनर्सृजन” – संचालन पंकज झा कयलनि । संचालक झा द्वारा मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर मुम्बई उपक्रमक संयोजकक इतिहास सँ वर्तमान धरिक प्रयास आ तेकर मुम्बई प्रभाव उपर संछिप्त प्रकाश देलनि, संगहि हुनका प्रति कृतज्ञताक ज्ञापन सेहो कयलनि । एमएलएफ २०२३ केर आयोजन उपरान्त मुम्बई मे साहित्यिक गतिविधिक तीव्रता आ एहिठाम नहि सिद्धहस्त त प्रारम्भिक स्तरक साहित्यिक योगदानक शुरुआत ‘मनोहर पोथी’ जेकाँ बुझल जेबाक सुन्दर उदाहरण रखैत दर्जनों नवोदित मैथिली कवि सब सँ कविताक वाचन कराओल गेल । कविता वाचन लेल चिर-परिचित कवि-शायर सदरे आलम गौहर सँ आरम्भ भेल । पुनः कृष्ण कुमार झा अन्वेषक, संतोष खाँ, अरविन्द झा, नविता ठाकुर, दीपक झा, धर्मेन्द्र झा, प्रमोद झा, राजेश राय, भास्करानन्द झा, पंकज पाठक, अम्बिका झा, अर्चना झा, प्रभु मिश्रा, सन्तोष झा, रामेश्वर झा, सुनील पवन, शशिकान्त पाठक, प्रज्ञा मिश्रा, कुणाल ठाकुर, पल्लवी झा, प्रतिभा झा उन्मेषा संगहि संचालक पंकज झा एवं अध्यक्षता कय रहला कृष्ण कुमार झा अन्वेषक द्वारा कविता-गीत सभक बेजोड़ मिश्रण सहितक शानदार सत्र प्रस्तुत भेल । सच कहू त एमएलएफ केर प्रभावोत्पादनक सुन्दर प्रमाण छल ई सत्र ।
छठम सत्र छल “मैथिली आन्दोलन – बौद्धिकताक आधिक्य, मुदा नेतृत्व आ बजट मे विपन्न”, लेकिन संचालक प्रवीण कुमार झा मंच पर प्रस्तुत हेबाक समय ई सत्र “मिथिला राज्य आन्दोलन – ताहि मे बौद्धिक आधिक्य व बजेट सन्दर्भित” विमर्शक सत्र रूप मे संचालन आरम्भ कयलनि । सहभागी वक्ताक रूप मे उपस्थित धनाकर ठाकुर, प्रवीण नारायण चौधरी, उमेश मिश्र, मनीष ठाकुर, पंकज वर्मा, राजकिशोर झा, संतोष मिश्रा, मिलन कुमार सिंह एवं राजेश कुमार झाक सहभागिता छल । पूर्व निर्धारित वक्ता मध्य सँ अखिल भारतीय मिथिला संघक अध्यक्ष विजय चन्द्र झा तथा हैदराबाद सँ वरिष्ठ मैथिल चिन्तक संजोग ठाकुर केर अनुपस्थिति छल । निर्धारित १ घन्टाक समय मे विषय-द्वन्द्वक बीच वक्ता लोकनि अपन-अपन विचार रखलनि । कियो मैथिली भाषा सन्दर्भित आन्दोलन त कियो मिथिला राज्य आन्दोलन – एहि पर अपन-अपन विचार आ आन्दोलनक अवस्था पर विचार रखलनि ।
दोसर दिनक अन्तिम सत्र छल कवि सम्मेलनक । पूर्व निर्धारित संचालक विकास वत्सनाभ रहथि अनुपस्थित । हुनक अनुपस्थिति केँ फेर सँ पूर्ति करबाक लेल संचालक रूप मे प्रस्तुत भेलाह अक्षय आनन्द सन्नी । ई छन्दमुक्त कविताक वाचन लेल निर्धारित सत्र छल । एहि सत्र मे कवि विद्यानन्द झा, तारानन्द वियोगी, रमण कुमार सिंह, विभा रानी, अविनाश दास, अरुणाभ सौरभ, विभा कुमारी, सुखदेव राउत, विनोद कुमार झा ‘सरकार’, शुभ कुमार वर्णवाल, जयन्ती कुमारी, सोनी नीलू, आभा झा, कुमार विक्रमादित्य, भास्कर ज्योति, दीपिका चन्द्रा, भास्कर झा, ज्योति रामनरेश शर्मा, मनीषा मृडाणी, किसलय कृष्ण, परमानन्द शर्मा, मुन्नी कामत, सुखदेव राउत एवं कमलेश प्रेमेन्द्र केर सहभागिता छल । एहि सत्रक अध्यक्षताक भार वरिष्ठ कवि विद्यानन्द झा वहन कयलनि ।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवलः तेसर दिनक सत्र
तेसर दिनुक कार्यक्रमक समन्वयक पुनः डा. ममता झा उपस्थित रहथि । संयोजक विनोद कुमार झाक सम्पूर्ण निर्देशन, सत्र-मध्यान्तर समन्वयक-उद्घोषक किसलय कृष्णक तत्परता, सुपरिवेक्षक मनोरमा मैथिलीक ससमय उपस्थिति आ सबटा रेखदेख, संगहि सह-संयोजक दीपक कुमार झा संग सह-समन्वयक धर्मेन्द्र कुमार झा व समस्त मुम्बईवासी एमएलएफ २०२६ केर भव्य सफलता लेल जी-जान एक कय देने छलथि । कतेको सेख-सम्पत्ति सँ परिपूर्ण मैथिल लोकनि एहि कार्यक्रम केँ अपन भाषाक गरिमासम्पन्न आ मुम्बई मे रहनिहार मैथिल लेल प्रतिष्ठाक विषय मानि भोर सँ राति धरि कार्यक्रम स्थल मड आइलैंड मे सवाहन-सांगोपांग उपस्थित रहथि । बाहर सँ आयल अतिथि लोकनि हुनका सब सँ परिचय आ परस्पर प्रेमक बढ़ोत्तरी करैत रहलाह । तहिना ओहो लोकनि मे सँ कियो टेक्सटाइल इंजीनियर, कियो फिल्म प्रोड्यूसर, कियो बिल्डर, कियो इन्स्योरेन्स एडवाइजर, कियो कस्टम हाउस एजेन्ट, आदि अनेकों स्तर पर प्रसिद्धि प्राप्त कयनिहार व्यक्तित्व सभक जबर्दस्त भीड़ लगैत रहल छल ।
“अनुवाद: भाषा सँ भाषा धरि सेतु – भारतीय भाषा सँ मैथिली आ मैथिली सँ विश्व धरि” विषय पर केन्द्रित विमर्श लेल आमंत्रित संचालक डा. कैलाश कुमार मिश्राक अनुपस्थिति केँ डा. शैलेन्द्र मिश्र द्वारा पूर्ति कयल गेल । वक्ता रूप मे केदार कानन, मेनका मल्लिक, योगानन्द झा, चन्द्रेश व सदरे आलम गौहर केर उपस्थिति-सहभागिता मे तेसर दिनक पहिल सत्र सम्पन्न भेल । मैथिली भाषाक सामग्री सभक अनुवाद आन भाषा मे आ आन भाषाक विभिन्न सामग्री सभक मैथिली मे अनुवादक कियैक आ कतेक आवश्यकता छैक ताहि सब विन्दु पर चर्चा कयल गेल । मैथिलीक कथावस्तु सभक अनुवाद करैत हिन्दीक विभिन्न पत्र-पत्रिका सब मे प्रकाशित कयल जेबाक कार्य बहुत पहिनहुँ कयल जेबाक व्योरा केदार कानन द्वारा राखल गेल । तहिना विमर्शक सत्र सँ मैथिली भाषा-साहित्यक समृद्धि मे अनुवादक पैघ भूमिकाक वकालत सेहो कयल गेल । कतेको रास मैथिलीभाषी विद्वान् सब दुइ-चारि भाषाक जानकार छथि, तेँ अन्य भाषा सँ मैथिली मे आ मैथिली सँ अन्य भाषा मे अनुवादक आधिक्यता पर सब कियो जोर देलनि । एहि सत्र मे भास्करानन्द झा भास्कर, तारानन्द वियोगी एवं प्रदीप बिहारी द्वारा प्रश्नोत्तरीक समय मे महत्वपूर्ण आ छूटल बात सब पर प्रकाश देल गेल छल ।
“मैथिली साहित्य मे दलित स्वर: इतिहास आ समकाल” विषयक दोसर सत्र मे वक्ता प्रीतम निषाद, तारानन्द वियोगी, शशि दम्भारे उपस्थित भेलथि, रवीन्द्र कुमार चौधरी एवं रामकृष्ण परार्थीक अनुपस्थिति केँ डा. कमलानन्द झा विभूति, मुन्नी कामत एवं एक भोजपुरीभाषी स्रष्टा डा. सागर केर सहभागिता मे सम्पन्न भेल । डा. वियोगी अत्यन्त तार्किक ढंग सँ मैथिली भाषा वास्तव मे सामान्यजन द्वारा बाजल जायवला भाषा रूप मे ब्राह्मणेतर समुदायक भाषा हेबाक दावी कयलनि ।
एकर पक्षपोषण करैत डा. वियोगी ब्राह्मणेत्तर समाज आ विशेष रूप सँ दलित वर्गक विभिन्न जातीय समुदाय लोकनिक धर्मक भाषा पर्यन्त मैथिली (जनबोली) हेबाक तथ्य पर प्रकाश देलनि । संगहि आधुनिक मैथिलीक आयु केवल १२५ वर्षक आसपास हेबाक, ताहि सँ पूर्व अत्यल्प लिखित साहित्य उपलब्ध हेबाक आ विद्यापति जेहेन महाकवि जे ब्राह्मण रहैत मैथिली (अवहट्ट) मे रचना कयलनि त हुनका उपर ब्राह्मण विद्वान् समाज द्वारा काफी अवहेलना कयल जेबाक उदाहरण सेहो रखलनि । तखन आधुनिक कालखंड मे मैथिली लेखन मे ब्राह्मण व अन्य सवर्ण समाजक आगू अयबाक आ ताहि मे दलित वर्ग – वंचित-शोषित वर्ग केर आवाज उठेबाक लेल मैथिली भाषा सर्वसुलभ साहित्य बनल । ब्राह्मण व सवर्ण समुदायक भाषा संस्कृत सँ मैथिली मे परिवर्तनक मुख्य उद्देश्य वंचित-शोषित वर्गक उत्थान कयल जेबाक बेजोड़ तर्क रखने छलथि । मैथिली भाषाक प्रयोग बौद्ध साहित्य सँ आधुनिक कालखंड धरिक साहित्य सभक सन्दर्भ जोड़ैत डा. वियोगीक तर्कपूर्ण विमर्श काफी सारगर्भित छल । हालांकि किछु लोक एहि तर्क सँ भिन्न मत रखैत प्रश्नोत्तरीक प्रतीक्षा करैत रहि गेलाह, परञ्च समयक अभाव मे ई प्रश्नोत्तरी व्यक्तिगत तौर पर वक्ता संग प्रत्यक्ष बातचीत करबाक सुझाव दैत सत्रक अन्त कयल गेल छल । अन्य वक्ता लोकनि मैथिलीक विभिन्न कथाकार, उपन्यासकार आ लोकसाहित्यक सृजन मार्फत दलित-उपेक्षितक आवाज उठेबाक विन्दु प्रकाश देने रहथि ।
तेसर आ अन्तिम दिनक तेसर सत्र “बहुभाषा विमर्श: सह-अस्तिव आ संवाद (विभिन्न भाषाक लेखक)” मे आमंत्रित वक्ता: डॉ सागर (भोजपुरी), सुशील गजवानी (सिंधी), दुष्यंत (राजस्थानी), शशि दम्भारे (मराठी), परमीता सारंगी (उड़िया), गणेश चन्द्र शिवे (मराठी), डा. भूमा वासी (गुजराती), डा. सहस्रबुद्धे (गुजराती) आ एहि सत्रक संचालन कयनिहाइर स्वयं एक विदुषी संग-संग अनेकों कला मे सम्पन्न व्यक्तित्व डा. विभा रानी रहथि । सच पुछू त पहिल बेर लागल जे प्रासंगिकता व सान्दर्भिकता सँ भरल विमर्श जे मैथिलीभाषी सर्जक लोकनि लेल विशेष आवश्यक त छलहे, समाजहु केर लोक लेल आ समस्त मिथिला लेल अनुकरणीय विमर्शक ई सत्र छल । विभा रानीक संचालन मे विभिन्न उपस्थित वक्ता सब सँ हुनका सभक भाषा मे सृजनक अवस्था, अनुवाद, स्त्री विमर्श, दलित विमर्श आ भाषा-साहित्य सँ आम-समाजक सम्बन्ध आदि पर केन्द्रित उच्चस्तरीय विमर्श कयल गेल ।
मुंबई मे एमएलएफ-२०२६ दोसर बेर आयोजित छल । एहि वर्ष आम समाजक संग सिनेकर्मी लोकनिक उल्लेख्य उपस्थिति सेहो देखल गेल । विमर्शक ऐगला सत्र – यानि तेसर दिनुक चारिम सत्र भोजनावकाश पछाति “मैथिली साहित्य सँ सिनेमा : संभावना आ संकट” विषय पर छल । एकर संचालन सेहो भास्करानन्द झा भास्कर कयलनि । वक्ता रूप मे तत्काल उपस्थित विभिन्न सिनेकर्मी लोकनि मे सागर झा, रूपक शरर, किसलय कृष्ण, तुषार झा, अमित कुमार झा एवं राजीव सिंह ‘गजराज’ केर सहभागिता छल । वक्ता सब मैथिली साहित्यक समृद्धि रहितो मैथिली सिनेमाक दर्शकक उदासीनता प्रति चिन्ता व्यक्त कयलनि । हालांकि आजुक बदलल परिवेश मे सिनेमा घर मे टिकट कीनिकय दर्शक नहि पहुँचबाक समस्या सँ आनो-आन भाषा समस्या भोगबाक परिस्थिति मे वैकल्पिक माध्यम यूट्यूब, ओटीटी आदिक माध्यम सँ दर्शक धरि सिनेमाक उत्पादन-प्रदर्शन करबाक स्थिति बनि जेबाक बात पर सेहो ओ लोकनि प्रकाश देलनि । अलग-अलग वक्ता, अलग-अलग क्षेत्र मे अनुभव, कियो उत्साहित, कियो हतोत्साहित – मुदा सभक मन मे निजभाषा मे फिल्मकर्मक एकटा सुन्दर उत्साह आ चिन्तन सुस्पष्ट देखायल । दिन नीक हेतैक मुदा कहिया आ केना – ताहि मे बहुते रास पक्ष सब पर गम्भीरता आ फिल्म मेकिंग मे क्राफ्ट केर ज्ञान, नव तकनीक आ कलाकार, कथा, आदिक चयन मे सावधानी बरतबाक सुझाव सहितक निष्कर्ष एहि सत्रक खासियत रहल ।
फेर ऐगला (पाँचम) सत्र “मैथिली सिनेमा: कथ्य, कलाकार आ कैंचा” विषयक छल जेकर संचालक रहथि प्रसिद्ध फिल्म इतिहास लेखक-समीक्षक किसलय कृष्ण आ एहि सत्र मे वक्ता रूप मे सहभागिता देलनि – वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज, निर्माता-अभिनेत्री मनोरमा मैथिली, अभिनेता संजीव पूनम मिश्र, अभिनेता राहुल सिन्हा, निर्माता-निर्देशक प्रभाकर झा, फिल्मकर्मी जीतेन्द्र नाथ जीतू, कुणाल ठाकुर, सागर झा एवं तुषार झा । एहि सत्र मे मैथिली सिनेमाक दुर्दशाक कारण मे कमजोर कथ्य, अदक्ष कलाकार आ कैंचा (पूँजी) केर अभाव – नाम अनुरूपक विमर्श कयल गेल । चूँकि वक्ता सब विभिन्न क्षेत्र मे अनुभव प्राप्त कएने, मुंबई महानगरीक प्रसिद्ध बौलीवूड सँ जुड़िकय अनेकन फिल्म क्राफ्ट विषयक जानकारी व कार्यानुभव हासिल कयल व्यक्तित्व सब रहथि, सभक चिन्तन मैथिली सिनेमाक बेहतरी लेल पूर्वक कमी-कमजोरी केँ बाकायदा उदाहरण दैत नव कार्य मे बेहतरी अनबाक कामना करय जाय गेलाह । कुणाल ठाकुर द्वारा मैथिली फिल्मक प्रोडक्शन मे जे सब व्यावहारिक कमजोरी सब छैक तेकर समाधान सहित सुन्दर खाका प्रस्तुत कयल गेल छल ।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर डिजाइन मे अन्तिम दिनक दोसर अधबेला बुझू फिल्म लेल समर्पित छल । आर से बहुत जरुरियो छल । कारण कोनो पैघ महोत्सव फिल्म लेल प्रसिद्ध महानगर मे हो आ ताहि मे मैथिलीभाषी फिल्मकर्मी लेल विशेष समर्पण नहि हो त एमएलएफ-२०२३ जेकाँ किछु कमजोर प्रदर्शन मात्र होइतय । धन्यवाद आयोजक जे एहि तरहें सत्र व्यवस्थापन रखलनि । तेसर दिनक छठम सत्र “फिल्म प्रदर्शन” लेल निर्धारित छल । एहि अन्तर्गत मैथिली लघुफिल्म “रसनचौकी” निर्माता-निर्देशक प्रभाकर झा आ सागर झा अभिनीत फिल्म, “विद्यापति” निर्माता सुनील झा एवं निर्देशक श्याम भास्कर तथा तुषार झा-शिवानी शांडिल्य अभिनीत फिल्मक ट्रेलर, अंजनी कुमार निर्देशित मनोरमा झा एवं पूजा प्रियदर्शिनी अभिनीत घरेलू हिन्सा पर केन्द्रित लघुफिल्म केर प्रदर्शन कयल गेल ।
एमएलएफ २०२६ केर आखिरी दिवसक आखिरी सत्र “गीत-गजल” केर छल । एहि सत्र मे प्रीतम निषाद केर अध्यक्षता तथा किसलय कृष्णक संचालन मे कवि-गीतकार लोकनि उमेश मिश्र, कमलेश प्रेमेन्द्र, डा. विभा कुमारी, दीपिका चन्द्रा, सदरे आलम गौहर, विमलजी मिश्र संग आमंत्रित गायक-गीतकार-संगीतकार सुनील पवन (आशीष अन्चिन्हार) अतिथि तथा विश्वचर्चित गायिका प्रिया मल्लिक विशिष्ट अतिथिक रूप मे अपन प्रस्तुति देने रहथि । जेतय सदरे आलम गौहर द्वारा सच कहै छी अहाँ केँ अहीँ प्राण हमर छी केर प्रस्तुति देलनि, ओतहि विमलजी मिश्र ‘हमरो मोन करइ य फोर-जी सेट मंगबितहुँ’ स्वरचित गीत केर प्रस्तुति देलनि । चेतना समितिक उपाध्यक्ष सेहो रहल व्यक्तित्व उमेश मिश्र गामक विम्ब पर आधारित सुन्दर गीत “रे भैया गाम भेलइ सुनसान’ केर प्रस्तुति कयलनि जाहि मे गाम सँ भेल विस्थापन आ लोकपलायनक दर्द सुस्पष्ट छलकि रहल छल । कमलेश प्रेमेन्द्र द्वारा ‘चमचम चमचम चमकि रहल छय’ चारिपँतिया प्रस्तुति करैत मुम्बई केँ मान-मनौव्वैल करैत अपन हास्य-गीत ‘कनियाँ केँ गोर लागिकय आयल छी’ प्रस्तुत कयल गेल जे सब केँ गुदगुदेलक । युवा कवयित्री दीपिका चन्द्रा द्वारा ‘सौभाग्य जे हम मिथिलानी छी, कोयली सन कुहकैत वाणी छी’ तथा ‘सुन गे सखिया गे बहिना किछु बात सुनाबय छी, हम सोचय छी हम चलबय हम बढ़बय उड़बय हम आसमान मे’ केर सुन्दर सन प्रस्तुति देल गेल । डा. विभा कुमारी द्वारा बहिन-भाइ बीचक प्रेम केँ भरदुतिया पर आधारित सुन्दर आ भावपूर्ण गीतक प्रस्तुति देल गेल छल । अतिथि गीतकार सुनील पवन द्वारा आशीष अन्चिन्हार रचित एकटा सुन्दर सन गजल प्रस्तुत कयल गेल छल । तहिना विशिष्ट अतिथि एवं प्रसिद्ध गायिका प्रिया मल्लिक द्वारा सेहो एहि सत्र मे विशेष प्रस्तुतिक तौर पर महाकवि विद्यापतिक रचना व बैद्यनाथ मिश्र यात्रीक ‘अन्तिम प्रणाम’ अपन सुमधुर स्वर मे गाबिकय प्रस्तुत कयल गेल छल । आर अन्त मे अध्यक्ष प्रीतम निषाद द्वारा अत्यन्त शानदार गीत “त्रिवेणी तिरहुत हिमाल झाँकी, खिस्सा-पिहानी कहइ य’ मिथिला – अदौ स’ ग्रन्थक सुबुद्धि समटैत, जुगत जुवानी गहइ य’ मिथिला” केर प्रस्तुति सँ जय-जय कय देल गेल छल ।
एहि तरहें “सम्मान सह समापन: मैथिलीक घोषणा पत्र” नाम्ना समापन सत्र मे संयोजक विनोद कुमार झा, सह-संयोजक दीपक कुमार झा, सुपरिवेक्षक सह प्रायोजक शुभ सीता फाउन्डेशनक अध्यक्षा मनोरमा मैथिली, वरिष्ठ मैथिली अभियानी संजीव सिन्हा एवं प्रवीण नारायण चौधरी सहित सहभागी समस्त अतिथि-सहभागी लोकनि केँ दीपक-मनोरमा-सरकार द्वारा संयुक्त रूप सँ प्रेमक प्रतीकचिह्न प्रदान करैत आयोजनक विशेष पक्षपर संछिप्त प्रकाश दैत आयोजक सभक मनोबल केँ उच्च राखि आगामी वर्ष मे फेर सँ मुम्बई मे आयोजन कयल जेबाक घोषणाक संग एमएलएफ २०२६ केँ अन्त-विश्राम देल गेल ।
हरिः हरः!!
