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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२६ – मुम्बई मे छठम आयोजन – कि सब होयत

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मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल – ३ सँ ५ अप्रैल २०२६ – मड आइलैंड, मलाड, मुम्बई मे ६म संस्करण होबय जा रहल अछि । एहि वर्षक थीम अछि “लोक सँ वैश्विक – मैथिलीक नवयुग” । आउ एक नजरि मे देखी कि सब होइछ एमएलएफ मे –

पहिल दिन ३ अप्रैल २०२६ केँ भोरे ९ बजे सँ पंजीकरण आ जलपान कार्यक्रम सँ आरम्भ होयत । लगभग १ घन्टा मे पंजीकरण सम्पन्न भेला उपरान्त औपचारिक कार्यक्रम आरम्भ होयत । सर्वप्रथम बैद्यनाथ मिश्र यात्री केर लिखल ‘भगवान हमर ई मिथिला सुख शान्ति केर घर हो’ एहि प्रार्थना सँ समस्त सहभागी अपन मैथिल पहिचान व मिथिला सभ्यता दीर्घायु होयबाक आत्मविनय करता । एहि प्रार्थनाक तुरन्त बाद मे मैथिली भाषा-साहित्य मे योगदान देनिहार अनेकों व्यक्ति लोकनि जे हाल मे स्वर्गीय भ’ गेलाह अछि, हुनका सब केँ मोन पाड़ल जायत ।

एहि क्रम मे कीर्तिनारायण मिश्र, अग्निपुष्प, उषाकिरण खान, भवेशचन्द्र शिवांशु, श्रीपति सिंहम डा: शिवेन्द्र दास, शरदिन्दु चौधरी, सुमित मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, शिव कुमार नीरव, कृष्णचन्द्र झा रसिक आदि केँ स्मरण कयल जेतनि । एहि क्रम मे राम नारायण सुधाकर जेहेन कथाकार केँ सेहो नहि बिसरत एमएलएफ से आकांक्षा ।

“मोन पड़ैत छथि” शीर्षक मे दिवंगत स्रष्टा सब केँ शब्द-श्रद्धाञ्जलि सत्रक संचालन वरिष्ठ साहित्यकार अजित आजाद करता, श्रद्धाञ्जलि हेतु प्रदीप बिहारी, अरुणाभ सौरभ, चन्द्रेश, तारानन्द वियोगी, बालमुकुन्द, गुंजन श्री, आदिक प्रस्तुति रहत ।

“भारतीय भाषिक परिदृश्य मे मैथिलीक स्थान आ परिदृश्य” विषय-सन्दर्भ पर केन्द्रित औपचारिक उद्घाटन सत्र होयत । एहि सत्र मे आगन्तुक अतिथि लोकनिक स्वागत मनोरमा मैथिली करती । वक्ता रूप मे चेतना समितिक अध्यक्ष विवेकानन्द झा संगहि वरिष्ठ साहित्यकार लोकनि प्रदीप बिहारी, केदार कानन, तारानन्द वियोगी, विद्यानन्द झा संगहि मैथिली अभियानी प्रवीण नारायण चौधरी, साहित्यकार विभा रानी एवं करुणा झाक प्रस्तुति रहत । एहि सत्रक संचालन संयोजक सह मैथिली लेखक संघ केर महासचिव विनोद कुमार झा ‘सरकार’ स्वयं करता तथा धन्यवाद ज्ञापन सह-संयोजक दीपक कुमार झा द्वारा कयल जायत ।

“समकालीन भारतीय साहित्य मे मैथिलीक वर्तमान परिदृश्य” नाम्ना विमर्श-सत्र मे वक्ता श्रीधरम, कमलानन्द विभूति, कैलाश कुमार मिश्रा, डा. आभा झा, शंकर मधुपांश, कृष्ण कुमार अन्वेषकक प्रस्तुति रहत । संचालन अरुणाभ सौरभ द्वारा कयल जायत ।

“मैथिली साहित्य मे एआइ’क प्रभाव; संदर्भ – लेखन, प्रकाशन आ अनुवाद” – एहि सत्रक वक्ता रूप मे प्रवीण कुमार झा, कार्तिकेय मैथिल, सुधीर चन्द्र मिश्र, कुमार विक्रमादित्य, मनीष ठाकुर एवं संजीव सिन्हा केर उपस्थिति रहत । एकर संचालन गुंजन श्री/भास्करानंद झा भास्कर द्वारा कयल जायत ।

“मैथिली कथाक वर्तमान स्वरूप : कथ्य आ शिल्प” विषयक सत्र केर वक्ता प्रदीप बिहारी, सुस्मिता पाठक, तारानन्द वियोगी, पंकज प्रियांशु, श्रीधरम, अजित आजाद व दीपिका झा छथि – संचालन : दिलीप कुमार झा द्वारा कयल जायत ।

तदोपरान्त हालहि लिखल गेल विभिन्न मैथिली पोथी सभक लोकार्पण कयल जायत । पुस्तकक सूची आ प्रस्तुतिक प्रारूप पंजीकरण अवधि सँ तय कयल जेबाक नियार कएने छथि आयोजक लोकनि ।

“मैथिली नाट्य-लेखन रंगमंच सँ कतेक लग, कतेक दूर” विषय पर विमर्श लेल वक्ता रूप मे वरिष्ठ साहित्यकार एवं नाट्यविधा विशेषज्ञ रमेश रंजन संग मैथिली नाटक मे कलम चलौनिहार अनेकों वरिष्ठजन सँ कनिष्ठजनक सहभागिता निर्धारित अछि । अरविन्द अक्कू, सोनी नीलू झा, जीतेन्द्र नाथ जीतू, दीपिका झा, सोनल झा एवं भास्कर झा केर प्रस्तुति रहतनि । एकर संचालन मैलोरंग केर संस्थापक एवं नाट्यविधाक प्रखर चेहरा प्रकाश झाक सहभागिता रहतनि ।

“एकल नाटक : अश्वत्थामा संवाद” मे प्रस्तोता अरुणाभ सौरभ रहता । एकर संगीत सुनील पवन देने छथि । एकदम सटीक समय पर प्रस्तुति निर्धारित अछि से हेब्बे करत, जनकपुर जेकाँ एहि सत्र केँ सौरभ मिस नहि करता, टाइमिंग ताहि तरहक देखि रहल छी ।

“डहकन ‍- सोनाक तार, रुपाक हार: अतीत सँ भविष्य धरिक यात्रा” – प्रस्तोता विभा रानी । विदित हो जे रंगविधा संगहि फिल्म अभिनय लेल मशहूर नाम छथि ‘विभा रानी’ आ शोधवृत्ति, लेखनवृत्ति संगहि आलोचना विधा मे सेहो प्रतिष्ठित छथि विभा रानी । एहि विशिष्ट प्रस्तुति सँ पहिल दिनक मैराथन आयोजन विराम पाओत ।

मुम्बई महानगर मे रंगविधाक विभिन्न रूप अनुरूप समय-सारिणी बनल बुझाइत अछि । रंग विभिन्न प्रकारक होइत छैक । मड आइलैंडक रंग अपना आप मे अलगे छटा साँझ होइत देखबय लगैत छैक । बगल मे समुद्र आ ताहि मे तरंगक अठखेली, कतेको मनचलाक मन मे हिलकोर स्वाभाविक छैक । मुम्बई मे एमएलएफ अपन पहिल दिनक रंगविधा सँ विराम पाओत ।

दोसर दिन ४ अप्रैल २०२६ केँ फेर सूरज उदय होइत आ हल्का आँखिक भौं तक चढ़िते फेर सँ मैथिली भाषा-साहित्यक विभिन्न विमर्श अपन रंग पकड़ि लेत ।

“मैथिली यात्रा वृतान्त, आत्मकथा, संस्मरण – मैथिली साहित्य मे स्थिति आ सम्भावना” ‍- वक्ता: केदार कानन, रमण कुमार सिंह, कमलानन्द झा विभूति, डॉ. आभा झा आ जयन्ती कुमारी । हिनका लोकनि केँ सुनब हमरा लोकनि । सब किछु लाइव रहत । अपने सब रुचि रखनिहार सेहो सुनबे करब । संचालन: डॉ: भास्कर ज्योति जेहेन उदीयमान मैथिली साहित्यकार रहता । छवि-छटा आ बौद्धिकताक प्रयोग सहित ई सत्र एतेक रास विषय-वस्तु केँ १ घन्टा मे एना समेटत जेना गागर मे सागर । मुम्बइया समुद्र उछलिकय मानू लोटा मे पिबय जोग बनि जायत, तखन अगस्त्य मुनि रूप मे हम-अहाँ ध्यानस्थ रहब तखने टा ।

“डिजिटल कंटेंट क्रिएटर (कथ्य सर्जक)क दायित्व आ मैथिली भाषाक विस्तार मे भूमिका” ‍- एहि सत्र मे युवा क्रिएटर अभिकाष झा, विजय झा, आशुतोष मिश्र, प्रियांशा आ कुन्दन केर सहभागिता निर्धारित भेल अछि । एकर संचालन करता डिजिटल क्रिएशन संगहि मैथिली भाषा-साहित्य मे निरन्तर कलम चलबयवला युवा – अक्षय आनन्द सन्नी । ताड़ सँ खसब आ खजुर पर अटकब – मैथिली भाषा-साहित्य मे पूर्व मे नकल टा देखल गेल, भविष्य मे स्थिति केहेन होयत तेकर संकल्प अभरत एहि सत्र मे ।

“मैथिली साहित्य मे स्त्री स्वर : देह, देश आ लोकतंत्र” – जेकर वक्ता छथि – विभा रानी, विभा झा, दीपिका चन्द्रा, मुन्नी कामत, शशि दम्भारे । संचालन : विभा कुमारीक रहतनि । फेसबुक पर जारी आमंत्रित अतिथि लोकनिक पोस्टर देखि आरो गोटेक हस्ती सब समेटल जेबाक सम्भावना स्पष्टे बुझा रहल अछि । मुदा जे-जतेक नाम छथि से कम नहि । विषय मे सेहो अलंकारिक रूपक पर स्वर प्रस्फुटित होयत त डंका पर चोट पड़ले बुझू ।

“समकालीन मैथिली कविता – प्रेम, प्रतिरोध आ प्रयोग” – वक्ता तारानन्द वियोगी, विद्यानन्द झा, रमण कुमार सिंह, डा. आभा झा, विकास वत्सनाभ, किसलय कृष्ण आ संचालन रहतनि चर्चित लिरिसिस्ट अजित आजाद केर । अहु सत्र मे प्रयुक्त अलंकारिक रूपक आ सहभागी वक्ता – कवि लोकनिक अनुभव सहितक वक्तव्य सँ प्रेम, प्रतिरोध आ प्रयोगक विधा जोरदार होयत से तय बुझू ।

“मुम्बइ साहित्यिक बैसार मे मैथिली – प्रवासी अनुभव आ सांस्कृतिक पुनर्सृजन” – वक्ता तय नहि भेल छथि, कारण मुम्बई मे २०२३ मे सम्पन्न एमएलएफ आयोजन उपरान्त कतेको रास ‘मिसिरजी, पाठकजी, झाजी, आदि’ साहित्य मे रुचि लय-लय आकाश तर बैसकी, झुग्गी-झोपड़ी मे बैसकी, साहित्यिक चौपाड़ि आदिक नव इतिहास सृजित कय चुकल छथि । ताहि मध्य सँ एक-पर-एक व्यक्ति सभक सहभागिता तय अछि । आयोजक पूर्व निर्धारित नहि कय सकलाह एखन धरि, संख्या ततबे बुझू । संचालक धरि तय छथि, अनुभवी व्यक्तित्व पंकज झा ।

“मैथिली आन्दोलन: बौद्धिकताक आधिक्य, मुदा नेतृत्व आ बजट मे विपन्न” विषयक सत्र मे वक्ता डा. धनाकर ठाकुर, प्रवीण नारायण चौधरी, विजयचन्द्र झा, उमेश मिश्र, मनीष ठाकुर, पंकज वर्मा, राजकिशोर झा, संजोग ठाकुर, संतोष झा, मिलन कुमार, राजेश कुमार झा केर नाम निर्धारित सूची मे पड़ल अछि । लेकिन एमएलएफ २०२६ केर अत्यधिक लोकप्रियता केँ देखैत आरो कतेक लोक संस्था आ आन्दोलन चलौनिहार सब पहुँचि जाइथ से नहि कहि सकैत छी । संचालन: प्रवीण कुमार झा छथि । समय १ घन्टा निर्धारित अछि । आब के कतेक बजता आ केहेन होयत ई सत्र से हम अनिश्चयक स्थिति मे छी । तथापि, विषय गम्भीर अछि । बजट मे विपन्नताक मुख्य सवाल अछि । विजयचन्द्र झा बेर-बेर बजितो छथि – पैसा मगन्तम् त ढुन द’ पदन्तम् ! देखू कि होइछ एहि बेर । या त आरे नहि त पारे !!

“कवि सम्मेलन” – कवि/कवयित्रीक सूची रिक्त राखल गेल अछि । कारण यैह एकटा एहेन सत्र होइछ जाहि मे सब केँ समेटल जा सकैछ । भले संचालक पहिनहिं सर्टिफिकेट बाँटि देथि जे एखन तक जे सब एला/एली से सब ठीकेठाक कविता लिखैत-पढ़ैत छथि, मुदा आब जे सब अओता/अओती से सब अत्यन्त उत्कृष्ट स्तरक कवि/कवयित्री सब छथि । आब अपन सामर्थ्य आ सृजनबल स्वयं लजाकय वा छाती उगाकय गानैत रहय जाउ । खैर – एहि वर्षक संचालनक जिम्मा युवा कवि विकास वत्सनाभ लग छन्हि जे धीरता-गम्भीरता मे आवाज मद्धिम राखल करैत छथि, से मुम्बई मे भव्यतम् प्रस्तुति अवश्य करताह ।

आर, दोसर दिन एहि काव्यगोष्ठी सँ सम्पन्न होयत एमएलएफ-२०२६ डे-टू इवनिंग सेशन । शनि दिन रहतैक । वीकेन्ड । भीड़ बहुते रहतैक एहि दिन ।

आब चलू तेसर दिन यानि ५ अप्रैल २०२६

“अनुवाद : भाषा सँ भाषा धरि सेतु – भारतीय भाषा सँ मैथिली आ मैथिली सँ विश्व धरि” – विमर्शक सत्र मे वक्ता: डा: शैलेन्द्र मिश्र, केदार कानन, मेनका मल्लिक, परमिता साऱगी, योगानन्द झा, चन्द्रेश, प्रभु मिश्रा आ संचालनकर्ता रहता डा. केके यानि डा. कैलाश कुमार मिश्रा । भगवान् करथि सत्र सफल हो । कारण बेसी सत्र मे हमरा लोकनि निज-निज विद्वता केँ ततबे बघारैत छी जे मूल विषय मैथिली भाषा-साहित्यक सरोकार छुटि जाइछ पाछाँ आ बाहरी सन्दर्भ सब कनाडा-अमेरिका, लैटिन-फ्रांसिस आदि धरि पहुँचा दैछ । आर एहि सत्रक परिकल्पना मे पहिनहिं सँ अधिकार निहित कय देल गेल छैक ई कहिकय – ‘विश्व धरि’ । देखब, कतय धरि जेता वक्ता लोकनि । अहाँ सब एहि सत्र पर सेहो विशेष ध्यान देबैक । लाइव रहत सबटा ।

“मैथिली साहित्य मे दलित स्वर: इतिहास आ समकाल” – वक्ता छथि प्रीतम निषाद, तारानन्द वियोगी, शशि दम्भारे, रविन्द्र कुमार चौधरी, रामकृष्ण परार्थी
आ संचालक छथि अविनाश दास । आइ-काल्हि ‘दलित’ शब्द राजनीतिक स्तर पर समावेश अनिवार्य छैक । वियोगी सर बड नीक कहल करैत छथिन जे मैथिली दलित केर ‘धर्मभाषा’ थिकैक । आर बहुत बात सब सुनय लेल भेटैछ । एकदम विचारोत्तेजक सत्र होइछ इहो । आनन्द लेब सब गोटे ।

“बहुभाषा विमर्श : सह अस्तिव आ संवाद (विभिन्न भाषाक लेखक)” ‍- वक्ता: डॉ सागर (भोजपुरी), सुशील गजवानी (सिंधी), दुष्यंत (राजस्थानी), शशि दम्भारे (मराठी), परमीता सारंगी (उड़िया), गणेश चन्द्र शिवे (मराठी), डा. भूमा वासी (गुजराती), डा. सहस्रबुद्धे (गुजराती) – संचालन: विभा रानी । मैथिलीक प्रतिनिधित्व स्वयं संचालिका करती बुझाइछ । पैछला बेर एकटा जोशीजी रहथि । नीक भेल छल । उपयोगी सत्र छल । अहु बेर होयत । देखब आ सीखब ।

“मैथिली साहित्य सँ सिनेमा : संभावना आ संकट” – एहि सत्रक वक्ता सब सेहो फिल्मी संसार सँ आबद्ध लोकक उपस्थिति अनुसार कयल जाय या फेर कि-केना, ताहि लेल कार्यक्रम समन्वयक एखन मुम्बई पहुँचबाक इन्तजार मे लम्बित अछि । धरि संचालन: भास्करानन्द झा करता से सूचना भेटल अछि ।

“मैथिली सिनेमा : कथ्य, कलाकार आ कैंचा” – इहो सत्र सिनेमा पर आधारित हेबाक कारण उपस्थिति अनुसार आ समन्वयक जीक मुम्बई पहुँचबाक इन्तजार मे लम्बित अछि । संचालक धरि तय छथि – से अपना सभक सुपरस्टार समन्वयक किसलय कृष्ण छथि ।

“फिल्म प्रदर्शन” – आर तखन देखाओल जायत मैथिली सिनेमा । से कोन – से एखन नहि पता ।

“गीत-गजल” – कवि/कवियित्री: बुद्धिनाथ मिश्र, दीपिका चन्द्रा, मुन्नी मधु, प्रीतम निषाद, जयंती कुमारी, शंकर मधुपांश । बस कि आरो ? से बाद मे पता चलत ।

त आबय जाउ – एमएलएफ २०२६ केँ अपार सफलता दियाबय जाउ ।

हरिः हरः!!

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