समाचार साभार – रामबाबू सिंह, मैथिली कवि व लेखक
काल्हि १८ जनवरी २०२६ दिल्ली मे ८२म साहित्यिक चौपाड़िक आयोजन सम्पन्न भेल । सामान्यतया ई आयोजन खुल्ला आकाश तर सेन्ट्रल पार्क या अन्यत्र होइत आबि रहल छल, परञ्च २६ जनवरी गणतंत्र दिवसक तैयारी भ’ रहल स्थिति मे खुल्ला आकाश तर कोनो कार्यक्रम करबाक मनाक चलते ई ८२म आयोजन संस्कार भारतीक सभागार मे कयल गेल । एकर अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री डा. आभा झा कयलनि, तहिना समीक्षक रूप मे मणिकान्त झा ‘आमारुपी’ केर उपस्थिति छल । संचालन कवयित्री सान्त्वना मिश्रा द्वारा कयल गेल । दर्जनों कवि लोकनि एहि आयोजन मे सहभागिता देलनि ।
रामबाबू सिंह केर सम्पादित लेखः साभार फेसबुक
हम संस्कार भारती भवन, आईटीओ दिल्लीसँ बाजि रहल छी
बेरासीम् साहित्यिक चौपाड़िक आइ दिल्ली एनसीआर मे आईटीओ लगिच संस्कार भारती सभागारमे सफल समापन भेल । ओना आयोजन इंडिया गेट वा कर्तव्य पथ कही ओतय होइत रहल अछि आ आगुओ होइत रहत । एखन गणतंत्र दिवस केर अवसर पर ओतय कोनो तरहक बैसकी संभव नहि छल । चारुदिसि गणतंत्र दिवसक परेड केर तैयारी हेतु सुरक्षा कर्मीक जमघट अछि तें कोनो तरहक आबाजाहीक साफ मना छैक । ऐगला मास फेर हम सब एहिना कर्तव्य पथ केर हरियर घास पर बैसि चौपाड़िक आनन्द लेब ।संस्कार भारती सभागार एकदम स्वच्छ, सुन्दर आ साकारात्मकतासँ भरल आजुक चौपाड़िक आयोजन केर गबाह बनल । हम ओतय निर्धारित समयसँ पहिनहिं पहुँचल छलहुँ । तेकर बाद मुकेश जी पहुँचलाह । बैनर संगे अनने छलाह । झट दय हम दुनू गोटे मिलिकय बैनर टाँगि अन्य तैयारी करय लगलहुँ । ता धरि आरो सुधी श्रोता व कवि लोकनिक आगमन होमय लागल । समयक सङ्ग सभागारमे लोकक उपस्थिति देखबा जोग भ’ गेल छल । तात्पर्य उमीद सँ बेसी ।
चूँकि सभागारमे समयक सीमा बान्हल रहैत छैक आर नव-नव कवि संग पुरान अजोध कवि लोकनिक तीन दर्जनसँ बेसी जेतय उपस्थिति होइ तँ बुझि सकैत छी जे नियति समयमे समापन करबाक कतेक हड़बड़ी होयत छै । तें शुभारम्भ बिना कोनो समय गमौने बाबा नागार्जुन रचित मिथिला वर्णन “भगवन हमर इ मिथिला” सँ विधिवत कएल गेल । मंचीय संचालन सान्त्वना मिश्रा कय रहल छलीह आ डॉ आभा झा संग मणिकांत झा दूनू गोटे समीक्षा क रहल छलथि ।
तँ पहिल क्रममे वरिष्ठ कवयित्री बंदना मिश्र कें बजौलनि आ ओ एकटा समसामयिक सुन्दर कविता प्रस्तुति कयलथि, कविताक शब्द संयोजन आ प्रवाह श्रोताक उत्साहवर्धन कयलक । फेर एलाह रोशन झा अपन कथा “बरजतिया भार” सङ्ग आ अपन भाव-भंगिमा, भाषा-शैली व प्रवाहसँ अन्त धरि पकड़ बनेने रहलाह जे सभागारमे उपस्थित लोककें बेस पसिन पड़लनि ।
फेर एलीह प्रेम चौधरी एकटा निक कविता ‘पद्मश्री’ संग, हुनकर सेहो सुन्दर प्रस्तुति रहलनि । फेर Akhila Nand Jha Raman अपन कथा ‘दू कौर’ संग एलाह । हुनकर कथामे पात्र चयन आ ताहि बीचक संवाद शैलीक प्रवाह सदैव जकाँ सनगर रहल । फेर एलाह मैसाम केर नव निर्वाचित अध्यक्ष Hemant Jha अपन श्रृंगार रसक गीत “मोन होइए” संग, मधुर स्वरमे गाबिकय प्रस्तुति सँ श्रोता खूब अह्लादित भेलथि ।
फेर Binay Thakur जी केँ बजाओल गेलनि आ ओ अपन कथा “कोठाक पीड़ा ” सङ्ग अपन यात्रा वृतांत केर प्रस्तुति देलाह । फेर अवसर हमरा स्वयं भेटल हम चारि गोट ‘चारि पतिया’ जेकर शीर्षक छल “बदलत की” । फेर बिहिन कथा “विद्यालय बनौलनि मैया” संग Nivedita Jha जी एलीह । फेर Mukesh Anand जी अपन कविता “तरकारी आ गुलाब” संग एलाह । फेर कविता पाठक झा अपन कविता “नव वर्षक आगमन” संग एलीह ।
फेर बंदना स्वाभिमानी “अनुरोध पाहुनसँ”, गीत संग एलीह । फेर रजनीगंधा जी अपन कविता “शिव विवाह” संग एलीह । फेर सांत्वना मिश्र अपन कविता “अप्पन मचान ” संग एलीह । फेर मनोज कर्ण अपन चीर परिचित अंदाजमे बिहिन कथा लाइव इन्फेक्शन केर पाठ कएलनि! फेर नीरज झा अपन गीत “करिआही” संग एलाह आ सुन्दर सुरेवगर प्रस्तुति सँ सभकें आनंदित कएलाह । फेर Jayanti Kumari जी केर समसामयिक विषय संग आजुक समयमे कवि भोगल सत्य पर आधारित सुन्दर प्रस्तुति छलनि ।
फेर Kashi Mishra अपन नेनपनक दिन कविता संग एलाह । अखिलेश मिश्र दाऊ जी व्यंग्य कविता “लव विवाह” संग एलाह । फेर सुशीला ठाकुर जी अपन कविता “लाइ तिल” संग एलीह । फेर वरिष्ठ कवि डॉ बद्रीकान्त झा सरस्वती गीत संग एलाह । फेर युवा कवि शुभम वत्स अपन कविता “गरीब बर” संग एलाह । हिनकर पहिल प्रस्तुति छलनि मुदा आत्मविश्वास सँ कविता प्रस्तुति सुन्दर रहलनि । फेर प्रिया झा “सरस्वती वंदना” कविताक पाठ कयलनि ।फेर Kailash Kumar Jha अपन गीत “हमर गाम निक अछि” संग एलाह । फेर वंदना झा अपन कथा “सौराठ सभा” संग एलीह । फेर सुबोध कुमार दास अपन कविता “गुमसुम हृदय मे उमरैत अछि मोनक भाव” केर पाठ कएलनि । फेर आभा झा “सौर्य गाथा”क गान कएलनि । फेर रमेश चंद्र झा अपन कविता “यैह गुड़ खेने कान छेदेने” सङ्ग एलाह । आ फेर डॉ आभा झा “काजी जी दुबराएल छथि”, संग एलीह । आ फेर समापन भेल Manikant Jha जीक गीत “एक रत्ती मुस्की जे छोड़ू” सँ । आ एहि तरहे साँझक 7.30 बजे एहि भव्य आयोजनक समापन भेल । एकर उपरान्त चाह, मोतीचूरक लड्डू, घरक बनल कचौरी, तिलक मिठाई आदि-इत्यादि सबहक अहगर बेबस्थाक पान कय सब गोटे विदाह भेल ।
आजुक चौपाड़ि बेस सफल, सुन्दर संगहि यादगार रहत । एहि आयोजन मे सहभागी समस्त सुधीजन केर एकबेर एकहि संग आभार – धन्यवाद संग जय मिथिला !
