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मैथिली भाषाक कवि-गीतकार-कथाकार ‘रा. ना. सुधाकर’ लेल शब्द-श्रद्धाञ्जलि सन्देशः मैथिली एसोसिएशन नेपाल

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श्रद्धाञ्जलि सन्देश

राम नारायण दास उर्फ रा. ना. सुधाकर
(जन्मदिनः २००१-१२-०६ पुण्यतिथिः २०८२-०९-२३ विक्रम संवत साल)

हे मैथिली कविश्रेष्ठ-कथाकार ‘रा. ना. सुधाकर’ जी,

सर्वप्रथम अपनेक रचित अमर ‘काव्य’ केर किछु विशेष भाष गबैत छी । मोन पाड़ैत छी एक पूर्ण निरपेक्ष ‘कवि’ केँ जे सब दिने सर्वतंत्र-स्वतंत्र मानल जाइत छथि । जिनका परमात्मा सेहो कोनो भय, त्रास या पूर्वाग्रह सँ मुक्ति एहि जीवनकालहि मे दय देने रहैत छथि, जे कथमपि लिखयकाल कल्पनाक संसार मे रहितो निरपेक्ष सत्य मात्र लिखैत छथि, ताहि कविश्रेष्ठ – मैथिली भाषा-साहित्यक चिर सारथि ‘राम नारायण दास’ उर्फ रा. ना. सुधाकर केँ प्रणाम करैत हुनक स्वर्गारोहण पर ई शब्द-श्रद्धाञ्जलि अर्पण करैत छी ।

“बस कथा-पिहानी जीवन अछि
सुख-दुःख दर्दक गठबंधन अछि

ककरो सँ अपेक्षा राखब नहि
बिल्कुल पतझड़ केर मौसम अछि

अपनत्वक मतलब आइ कतऽ
सभक सम्बन्ध मे अनबन अछि

अछि गंधहीन अनुराग हमर
किनको आंगन नहि अरिपन अछि

आकृति मनोहर बिला गेल
चनकल असमय मे दर्पण अछि

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फैसला ई आइ हो मैथिली के वास्ते
हौसला ई भाइ हो मैथिली के वास्ते

हेमनि मे जनमि गेल रावण आ कंस फेर
राइ-छाइ हो ओकर मैथिली के वास्ते

एना बिमरियाह बना राखू नहि अस्मिता
लिअ किछु दबाइ यौ मैथिली के वास्ते

स्वर्ग उत्सर्ग भाव हो अगर मोन मे
तऽ हेतय भलाइ किछु मैथिली के वास्ते

अपन अछि धरती आ अपने आकाश अछि
अन्तिम लड़ाइ हो मैथिली के वास्ते

झंडा उठाउ चलि कूदी मैदान मे
गुंजत विजय बधाइ मैथिली के वास्ते

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किछु देखबा ल केकरो कहाँ छै मना
ऐ हमर चन्द्रमा! ऐ हमर चन्द्रमा!!

कियो देखलक अहाँ के – अहाँ के टिकुली
ई बुलकी झुलैत आ हँसैत हँसुली
कियो देखैत रहल केस कुन्तल घना
ऐ हमर चन्द्रमा! ऐ हमर चन्द्रमा!!

एक मिसिया भरि मुस्कीक जादूगरी
एना चमकत कखन धरि नयन के छुड़ी
दम सधने रहब हम कखन धरि एना
ऐ हमर चन्द्रमा! ऐ हमर चन्द्रमा!!

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नहुँ नहुँ मेंही चंचल चितवन दैत रहल आभास
अधर भरल मधु मुस्की मधुवन करैत रहल परिहास

जे दिवाना सदति रहल ओइ चानक आइ ने चर्च कोनो
चर्चा छै जे चन्द्रमुखी के अछि श्रृंगार किछु खास

महुआ फूलक गंध कात मे आर हाथ मे यौवन किसलय
मन मे रहल सदति ई गुनधुन के उन्चास पचास

हँसैत बिछैत अछि गोइठा करसी करिलुठिया के होश कहाँ
आ मुरेर पर बैसल कोयली कुचरति रहल खखास

ललित गीत मंडित मुख मण्डल निरखति रहल चकोर ओना
बितैत रहल जुग जिनगी अहिना बढैत रहल बस पियास

‌**

अइ पनिघट पर पानि भरैले आब ने आबथि राधा कहियो
चन्दन सन गमगम कदम आ कृष्णक मिथिला आइ कहाँ

विद्यापति के ललित गीत के भूत-प्रेत सब नाचि रहल
धरती जरलय मंडन के आ राम-लखन सन भाइ कहाँ

नाच तमाशा टीवी पर सब भाषा मे देख रहल
कहू बटोही साँच-साँच छथि हमर मैथिली आइ कहाँ

कहाँ उठैयऽ टीस मोन मे बाध-बोन मे टेर कोनो
बाजि रहल अछि बोली सुगबा डोरी कतौ लटाइ कहाँ

गंगा के एहि माटि सँ होइतै सीता जन्म एक बेर ओहिना
पुनः राम पाथर केँ छुबितथि से सौभाग्य आब आइ कहाँ

**

हे महामना,

अपने आब एहि लोक मे भले सदेह नहि छी, मुदा अपनेक साहित्यिक रचना सँ पुष्ट हमरा सभक मैथिली भाषाक करोड़ों लोकक हृदय मे अपने ओहिना विराजित रहब जेना स्वयं परमात्माक निवास हृदय मे भेल करैछ ।

मैथिली एसोसिएशन नेपाल केर प्रत्येक सदस्य आ शुभेच्छुक तरफ सँ अपनेक देहावसानक घड़ी विशेष स्मरण करैत ई श्रद्धाञ्जलि सन्देश अपनेक सुपुत्र आशीषजी केँ सौँपि रहल छी । हम सब सदैव अपनेक संग रही, आगुओ सन्तति ओ परिजनक संग रहबाक वचनबद्धता सहित अपने सन पुण्यात्माक चिर शान्ति आ सुखद नव लोक जेतय स्वयं परमात्मा निवास करैत छथि ताहिठाम अलौकिक आनन्द सँ अपने आगामी समय बिताबी, यैह मनोभाव अछि ।

आजीवन अपनेक अनुहार पर एकनिष्ठ भाव देखल । निश्छल आ निश्चल व्यक्तित्वक साक्षात् मूर्ति रही अपने । जीवन मे अमीरी आ दिखाबाक नाटक बहुते देखल, मुदा गरीबी मे सुख आ शान्तिक जिबन्त चेहरा मात्र अहाँक पास छल एना ‘प्रवीण मन’ कहि रहल अछि । अहाँक सद्गुण आ सार्थक चिन्तनक लेशमात्रो जँ हमरा सब मे आबि जायत त निश्चय जीवन साधना सफल मानब ।

पुनः प्रणाम – पुनः शान्तिक कामना – शोकक घड़ी मे सदिखन परिजनक संग होयबाक संकल्पक संग ई श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पित करैत छी ।

सादर,

प्रवीण नारायण चौधरी
अध्यक्ष, मैथिली एसोसिएशन नेपाल
एवं समस्त कार्यकारिणी आ परिवार
विराटनगर-१२, मोरंग, कोशी प्रदेश, नेपाल

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