दरभंगा, २४ जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!!
मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा १४ जनवरी २०२२ तिला संक्रान्ति उपरान्त सदस्यता मुहिम चलायल जा रहल अछि । एहि क्रम मे सेनाक महासचिव सहित विभिन्न पदाधिकारी लोकनि द्वारा सोशल मीडिया मार्फत सचेतनामूलक तथ्य सब सार्वजनिक कयल जा रहल अछि । आइ महासचिव राजेश झा लिखलनि अछि –
“विजेता द्वारा लिखल बात इतिहास कहाय छय। देश के स्वतंत्रता पश्चात मिथिला कहियो विजेता नय भ सकल। ओकरे फलाफल छय जे हमर अहाँक भूत-वर्तमान आ इतिहास-भूगोल सब उपेक्षित रहि गेल। कम बुद्धि बला कमजोर कुंठित हौइ छय। मिथिला के प्राचीन गौरव के समक्ष भारतीय गणराज्य के कोनो सांस्कृतिक-भौगोलिक समूह कमजोरे जानल जेतय। यैह ‘इंफीरियर कॉम्प्लेक्स’ जनित कुंठा के कारण केंद्र आ राज्य सत्ता-प्रतिष्ठान द्वारा मिथिलाक वैभव नुका रखबाक षड्यंत्र कयल गेल। मिथिलाक राज-परिवार अखंड भारतक मुकुट में जड़ित कौस्तुभ मणि छल। ओई कौस्तुभ मणि’क पहिचान तक समाप्त कय देल गेल। हमर सबके स्वाभिमान के चौर्य प्रवृत्तिक समूह द्वारा नीचा देखाओल गेल।आइ धरि हमर सबके स्वाभिमान अपहृत अछि बिहार लग। अपहर्ता कथमपि अपहृत केँ अपन कब्जा स बाहर नय निकलय देबाक चेष्टा करत। सैह मगध क’ओ रहल अछि। तैं जा धरि मिथिला राज्य के स्थापना नय हैत ता धरि कि राजा आ कि महाराजा आ कि प्रजा आ कि अगड़ा आ कि पिछड़ा! बैरी लेल सब मैथिल छथि। ओइ बैरी के नष्ट करबाक लेल चाही मिथिला राज्य। MRNS-मिथिला के सेना के गठन यैह लेल भेल। ले जान कि दे जान।”
उपरोक्त आह्वान मे मिथिला ऊपर बिहारी उपनिवेश आ एहि विशिष्ट सभ्यताक दुइ देशक सीमा मे चलि गेलाक केन्द्रक नीति मे सेहो कोनो तरहक समर्थनक कमीक कारण मिथिला नष्टनाबूत होयबाक अवस्था मे आबि जेबाक नीयति स्पष्ट कयल गेल अछि। विभिन्न तरहक खरात आ जातिवाद, अगड़ा-पिछड़ा आ अन्यान्य राजनीतिक झगड़ा मे लोकक दिमाग ओझराकय अपन मौलिक सभ्यता सँ दूर कयल जेबाक जे पीड़ा अछि ताहि पर आधारित वक्तव्य महासचिव झा द्वारा देल गेल अछि। विदित हो जे मिथिलाक लोक मे सेहो शनैः शनैः लेकिन अपन राज्य वास्ते जनचेतना बढि रहल छैक। आगामी चुनाव २०२४ मे लोकसभा आ २०२५ मे विधानसभा मे मिथिलाक मुद्दा पर चुनावी संग्राम मे उतरबाक घोषणा सेहो मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा कयल जा चुकल अछि। संगहि मिथिलाक हरेक जिला मे घुमि-घुमि मिथिला पुनर्जागरण यात्रा करैत ‘जनगणना मे मैथिली, संविधान मे मिथिला राज्य’ लेल सेहो जनचेतना जागरण कयल जा रहल अछि।
