रंजना दहेज हत्याकाण्ड दरभंगा – रंजनाक अपने लिखल चिट्ठी मे छुपल अछि ओकर हत्याक राज

दरभंगा, २१ अगस्त, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

दरभंगा मे घटल वीभत्स दहेज हत्याकाण्ड मे मृतका रंजना झा केर अन्त्येष्टि सिमरियाघाट मे हुनक पिता, भाइ व नैहर-परिजन द्वारा संपन्न कयल गेल अछि। एहि बीच डीएमसीएच दरभंगा सँ पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे गंभीर चोट सँ मृत्यु होयबाक बात कहल गेल अछि। पति केर गिरफ्तारी होयबाक समाचार सेहो मीडिया मे आयल अछि। पुलिस प्रशासन द्वारा एहि घटना मे हत्याक आशंका केँ नकारल नहि जा सकैछ कहल गेल अछि। मधुबनी जिलाक जरैल गामक भूप नारायण झा केर पुत्री रंजना झा केर हत्याक विरोध मे पूरा समाज हत्यारा परिवार केँ कठोर सजा लेल मांग कय रहल अछि। एहि दिशा मे दहेज मुक्त मिथिला तथा मिथिला स्टुडेन्ट यूनियन द्वारा सेहो पीड़ित परिवार केँ संग दैत हैश-टैग जस्टिस फोर रंजना नामक मुहिम चलायल जेबाक समाचार अछि।

रंजना झा केर लिखल चिट्ठी सँ हत्याक आशंका बढल

दहेजक कारण पहिने प्रताड़णा आ अन्त मे रंजना झा केर हत्या जेकरा ‘सड़क दुर्घटना’ सिद्ध करबाक कुत्सित प्रयास कयल जा रहल अछि, एहि घटना मे स्वयं रंजना झा द्वारा लिखल अपन भाइ केँ एक चिट्ठी मे ओकर मृत्युक पटकथा ओर रुआबदार दरोगा ससूर अजय झा आ तेकर हत्यारा बेटा प्रभात कुमार झा, झगड़ालू आ दहेज लोभी सासु तथा ननदि आदिक केहेन भूमिका रहल छैक तेकर पूरा जिकिर भेटल अछि। अपन भाइ शंकर केँ संबोधित एक चिट्ठी मे रंजना लिखने अछिः

शंकर तुमने जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की है जो यह शादी होने दिया यहां पर जो दिखता है वैसा कुछ भी नहीं है। हमको यहां पर एक जानवर सब समझते हैं, यह लोग सोचते हैं कि इसको तकलीफ देंगे तो यह अपने मां बाप से रिश्ता तोड़ लेगी। इनकी मझली बेटी सब मिलकर एक प्लान बनाए हुए है। मेरी सास उनकी छोटी बेटी के साथ जो हुआ वह तरीका मेरे साथ कर रही है। उन्होंने पहले काम करने वाली को निकाल दिया फिर जानबूझकर हर वक्त यह कहती है कि हमारे बेटा के सब ठईग लेलक, नई लड़की सुंदर भेटल आ नय बुलेट गाड़ी के रुपैया तिलक और नई समान ही मिलल। जे की गाड़ी के रुपैया तिलक में 7 लाख लेलखिन वो ई सब अपने चाईट गेलखिन।”

आगू रंजना लिखने अछि जे कल बड़ी चाची और उनका बेटा दीपक आया था।.. आगूक बात में रंजना कोनो फॉर्म केर बारे मे जिक्र कयने अछि जेकर अंतिम तारीख आदि होयबाक बात कहल गेल छैक। एहि केँ लय केँ रंजना अपन पति केँ फोन केलक से बात पत्र मे लिखल गेल छैक जे “हम उनको (पति) फोन किए तो यह अपने ताव में कहें की हम यहां पर मर रहे हैं और तुमको अपनी पड़ी है। तुम मेरे बारे में क्या सोचोगी तुम तो किसी और के बारे में सोचती रहती है और बहुत बात कहने लगे। यह सुनकर हमको रोना आ गया। और जब मां जी आई तो दुर्गा जी की मूर्ति को छूकर कसम खाएं कि हम लड़का के चक्कर में कभी नहीं पड़ें तो मेरी सास जो पहले से प्लान करके बैठी थी एक में दो लगाकर पूरे चिल्लाने लगी कि इसने दुर्गा जी कि मूर्ति को छू कर कसम खाया है इसीलिए मेरे बेटे का तबीयत खराब हो गया है और वह हॉस्पिटल में भर्ती है। जबकि मौसम के कारण उनका थोड़ा सा पेट खराब था और वह नाचने लगी हल्ला करने लगी। उसके बाद हमारे ससुर हमें खूब डांटे।

इसके बाद रात में 9:00 बजे तक बेटा आया तो मां बहन से मिलकर फिर अपने बेटे का कान भरना शुरू कर दिया। इसके बाद उनका बेटा मुझे सुनाना शुरू कर दिया तुम्हारी मां उल्टा लिखती है। वह कुत्ता तुम्हारा दोगला भाई सब बोलते हुए मुझे बहुत अपमान किया वो लोग मेरे पैर के धूल के बराबर नहीं है। फिर इसी बात को दोहराने लगा चक्कर आने लगा इतने में फोन कट गया गया फिर हम सोचे कि दुबारा फोन करेंगे तो गुस्सा करेंगे यह सोचकर हम नही किये। फिर फोन कट गया जब हमने पापा जी से पूछा तो हम बोले कि उनको चक्कर आ गया तो वह हमको और जोर-जोर से डांटना शुरू कर दिए। फिर बोले कि तुम्हारी वजह से हमारे बेटा के तबीयत खराब है और माँ को गंदा गंदा गाली देकर शुरू कर दिया और बोली कि उस भूटिया को हम जरैल से उठवा लेंगे उसका टुकड़े-टुकड़े करके हम रोड पर फेंक देंगे और पापा को भोसड़ी वाला कहकर कहें कि उसको बर्बाद कर देंगे दोनों बेटे को हम काट देंगे कहकर खूब हमको गाली देने लगे फिर बेटा ने शांत किया तो यहां पर रात बीत गई हमको उनके बाद से रोना आ रहा था जिससे आंख पूरा फुल गया था। सुबह में सास बोलने आई कि आधार कार्ड को लेकर जाना है।

उनका फोन आया तो हम बोले कि आज नहीं जा सकते हैं फिर बोलें मां को फोन काट दी जब जब मां जी ने फोन दिया तो वह चिल्लाकर बोलने लगी। इतना डांट खाने के बाद कोई क्या रो भी नहीं सकता जिस लड़की के सामने उसके मां बाप भाई को जान से मारने की धमकी और गाली दिया जाए इसके बाद पापा जी आए अपने मझले दामाद को फोन लगाकर फिर धमकी देने लगे कि ई हमरा घर में काल हम अपन अपन बेटा के दोसर लड़की साथ शादी करबेब। एकरा हम घर के नौकरानी बनाकs राखब। या फेर एकरा हम जान सs माईर देबय। हमरा पकड़ा वला के यय हम एकरा 10 दिन के अंदर पागल के सर्टिफिकेट नकली बनाकs हम अपन बेटा के एकरा सामने में दोसर शादी करबेब।

फिर बेटा का फोन आया तो बेटा से बोले कि बेटा तू चिंता मत कर आय के बाद हम लड़की के मां-बाप से बात नय करs देबय, हम लड़की के सुधार देबय नय त पागल साबित कs दोसर शादी करबा देबउ तू चिंता नय कर। ई लड़की के मैथिली बाजs नय आबय छय ओर हमर एकर मां-बाप के सोईध जेबय। आई के बाद ई लड़की सs कियो बात नय करतई एकर मां-बाप कहय छलो जे एकरा सूरत ले जाते तब ई घर में मचबय छौ ताकि पति के साथ बाहर रहब हरम एकरा पूरा जिंदगी यही ठाम राखब इ क़तs जाय या हम देखय छि। एकरा हम मां-बाप सs मिलs तs देबय नय ओर यही घर में हम एकरा मारबई के हमरा की करा वला हम बड़ा बाबू छलउ ओकरा स हमरा ज्यादा पंहुच यय। हम ई लड़की के बरबाद क देबय। जब बेटा स बात भ गेलैन फेर पापा जी हमरा खूब डांट देबs लगलखिन। बेटा के तबीयत खराब एक जगह से दूसरे जगह बदल के कारण खराब है और रात सब मिलकर हमरा पर गाली दे रहे हैं और हम आंसू भी नहीं बहा सकते हैं। हमर सास भी हमरा खूब डांट लगेलखिन। जब हमर ससुर बाहर गेलखिन त हम मांजी सs कहलियन जे मां जी हम की करु जे सब खुश रहथिन। त मां कहलखिन जे हमर बेटा खुश रहत तहन हम रहs देब नय तs हम अहां के माइर देब ओर घर सs बाहर निकाल देब। तब हम बोले कि मांजी हिनका बुलेट गाड़ी चाही यदि हमर पापा द देथिन तs खुश भ जेथिन त वो बोली हां, हमर बेटा तs शुरु सs ही गाड़ी कहै छलै अहां के पापा हमर बेटा के गाड़ी नय देलखिन। तब हम बोले कि वो गाड़ी कते में देतै? जवाब 2 लाख रुपया जो उसका दाम है। उसके बाद बोली अहां के पापा नय देथिन। तब हम बोले कि हम कहबई त द देथिन। उसके बाद से वह शांत हो गई। गाली देना भी बंद हो गया और हंस कर खुश हो गई। ससुर भी उसके बाद गाली देना बंद कर दिए हैं मतलब कितना ललचाई और गिरे हुए है समझो। शंकर तुम हमसे मिलने के लिए आ जाना मुझे तुम्हारी अब आगे मदद चाहिए…रंजना”

एखन धरिक प्रगति पर संचारकर्मी तथा मिथिला स्टुडेन्ट यूनियन केर अभियन्ता बीजे विकास लिखलनि अछिः

रंजना मर्डर केस में ताजा अपडेट यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुका है। हम लोग लगातार इस मामले पर घटना के बाद से ही नजर बनाए हुए थे। कल घटना के एक दिन बाद मृतका रंजना का शव पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच दरभंगा लाया गया था। जिसमें आज सुबह 10 बजे तक डीएमसीएच प्रबंधन द्वारा पोस्टमार्टम का रिपोर्ट देने की बात कही गई थी। जिसके इंतजार में परिजन रंजना का शव पोस्टमार्टम परिसर में रखकर रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे। समय बीतने के साथ ही पूर्वानुमान के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने में प्रबंधन व पुलिस प्रशासन विलंब कर रही थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि आज सुबह 10:00 बजे तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट परिजनों की मौजूदगी में प्रशासन को सुपुर्द कर दिया जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसकी खबर हमलोगों को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छेड़खानी की आशंका को देखते हुए हम लोग सुबह 11 बजे के करीब दरभंगा के लिए विदा हुए।

लेकिन जब तक हम लोग दरभंगा डीएमसीएच पहुंचते तब तक पोस्टमार्टम हाउस के पास मौजूद कर्मी व अधिकारियों ने मृतका के शव के साथ मौजूद परिजनों पर दबाव बनाकर एंबुलेंस में रखे गए रंजना के शव को संस्कार के लिए सिमरिया ले जाने पर मजबूर कर दिया। तर्क के रूप में कर्मियों ने परिजनों से यह झूठ कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट 4 दिन बाद आएगा। जब हम लोग पोस्टमार्टम हाउस के पास पहुंचे तो पता चला कि कुछ देर पहले ही स्थानीय कर्मियों के कहने पर परिजन शव लेकर सिमरिया के लिए निकल चुके हैं। जिसे सुनते ही हम लोग परेशान हो गए। आनन-फानन में हमलोगों ने कॉल करके वापस एंबुलेंस और परिजनों को डीएमसीएच पोस्टमार्टम हाउस के पास बुलाया। सबसे संपर्क किया गया जहां स्थानीय कई सामाजिक संगठनों व लोगों का मदद मिला। मौके पर बालेंदु भैया, लड्डू भैया संगठन के साथी प्रसून, अभिषेक, अमित व कई साथी पंहुचें। हम लोगों का एक ही मांग था कि रंजना के शव का पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रशासन को डीएमसीएच प्रबंधन द्वारा परिजनों के सामने सौंपा जाए ताकि रिपोर्ट में किसी प्रकार की छेड़खानी की संभावना खत्म हो सके।

हम लोग लगातार डीएमसीएच में एक बिल्डिंग से दूसरे बिल्डिंग तक दौड़ते रहे। लेकिन कोई जवाब देने वाला नही था। इसी क्रम में जब हम लोग पोस्टमार्टम हाउस के अधिकारी के चैम्बर में पहुंचे तो उनसे यह जानने की कोशिश की क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट बन चुका है ? इस पर उन्होंने अप्रत्यक्ष सहमति जताते हुए बताया कि रिपोर्ट बन चुकी है लेकिन यह रिपोर्ट आपको नहीं दिया जा सकता है। रिपोर्ट प्रशासन को दिया जाएगा। जिसके बाद हम लोग प्रशासन से संपर्क साधने में लग गए कि जल्द से जल्द पोस्टमार्टम रिपोर्ट वह रिसीव करें और शव को संस्कार के लिए ले जाया जाय। लेकिन इस दौरान किसी भी प्रकार का सहयोग प्रशासन से मिलता हुआ नजर नहीं आया मामले के आईओ से जब हम लोगों ने बात किया और बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार है आप ले जाएं हम लोग यहीं पर खड़े हैं। इस पर जवाब आया कि प्रशासन अपने हिसाब से काम करेगी आप एसपी साहेब से बात कीजिए। लगातार डीएमसीएच के दफ्तरों की दौड़ लगाने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की इस तरह के बयान से हम लोगों के मन में कई तरह के सवाल आ रहे थे। मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो रहे थे सड़क जाम कर दिया जाए प्रशासन खुद-ब-खुद वार्ता करने के लिए आएगी। लेकिन मृतका के पिता भूप नारायण झा जो कि बिहार पुलिस में कार्यरत हैं वह इस बात पर अप्रत्यक्ष असहमति जता रहे थे, वह नहीं चाह रहे थे की विधि व्यवस्था भंग हो।

जिसके बाद हमलोगों ने सोशल साइट्स के माध्यम से अपील कर दरभंगा SP व प्रशासन पर दबाव बनाने का काम शुरू किया। देर होता देख पोस्टमार्टम हाउस के करीब जुटे लोगों में काफी आक्रोश पनप रहा था। प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश इतना बढ़ रहा था कि सभी लोग सड़क जाम करने पर उतारू थे। इस बीच Facebook पोस्ट पर SP दरभंगा का नंबर वायरल करने के बाद लगातार उन्हें फोन आना शुरू हो गया।एसपी साहेब ने कॉल उठाना बंद कर दिया। लेकिन इसी बीच एसपी साहेब ने मेरा फोन उठाया तो मैनें वास्तुस्थिति से अवगत कराया। जब मैनें उन्हें बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट बन गया है और हमलोग चाह रहे हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द रिपोर्ट अपने हाथ में लें। इस बात वह चौंक से गए कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट बन गया ? और इसके साथ ही कॉल कट गया जिसका ऑडियो मैनें पोस्ट भी किया है। एसपी साहब का चौंकना सकारात्मक था या कुछ और यह भगवान जानें। इधर लगातार फोन कॉल्स आ रहे थे उनके पास। कुछ समय बिता तो उन्होंने लोगों का कॉल भी उठाना बंद कर दिया। हमलोगों ने निर्णय लिया कि एसपी साहेब को 30 मिनट का समय दीजिये मैसेज करके नही तो कर्पूरी चौक जाम कर देंगे। हमलोगों ने उनको मैसेज भेजा कि 30 मिनट में आप एक्शन में आएं तो ठीक अन्यथा हमलोग सड़कों पर होंगे। आनन फानन में दबाव में आता देख पोस्टमार्टम हाउस के पिछले दरवाजे से थाना के बड़ा बाबू पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर चले गए जिसकी भनक भी हमलोगों को नही लगने दिया गया। हमलोग इंतजार में कई घंटों तक खड़े रहे कि कोई अफसर आएगा और हम लोग के सामने पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेकर के एसपी के पास या थाना पहुंचेगा। लेकिन अब इंतजार बढ़ता जा रहा था। ऐसे में हम लोग एक बार पुनः पोस्टमार्टम हाउस के अधिकारी के पास पहुंचे तो वहां पर पुलिस विभाग के एक इंस्पेक्टर मौजूद थे जो की पोस्टमार्टम रिपोर्ट डीएमसीएच से ले जाने के लिए आए हुए थे। लेकिन उनको रिपोर्ट नहीं मिल सका। पूछताछ में पता चला कि घंटों पहले कोई अफसर यहां आकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ले जा चुके हैं। इस बात की जानकारी मिलते ही सभी आक्रोशित हो गए हैं कि आखिरकार जो भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए डीएमसीएच पहुंचे थे, उन्होंने परिजनों या यहां पर मौजूद लोगों को जानकारी क्यों नहीं दी। जो इंस्पेक्टर डीएमसीएच के पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने पहुंचे थे उससे बार-बार इस बात को लेकर हम लोगों के साथ झड़प होती रही कि आखिरकार आप के अधिकारी यहां पर आकर रिपोर्ट ले गए हैं और हम लोगों को क्यों नहीं बताया गया ? बीच बचाव करते हुए पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर बड़ा बाबू एसपी साहेब के पास गए हैं।

इसके बाद हम लोग व परिजन रंजना के शव को लेकर एसपी कार्यालय पहुंचे। जहां काफी देर तक हंगामा हुआ जिसके बाद 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को एसपी से मिलने की अनुमति दी गई। जिसमें मैं खुद, अजय शशि झा, मैथिल विवेक, मृतका के भाई शंकर झा व मृतका के बहनोई प्रतिनिधिमंडल के रूप में एसपी कार्यालय कक्ष में पहुंचे। जहां SP महोदय से सारी बातों की जानकारी हम लोगों ने साझा की। घटना के बाद से हुई गतिविधियों व आज तक की गतिविधियों पर हम लोगों ने SP साहब से काफी देर तक बात की SP साहब से हम लोगों ने अनुरोध किया कि मामले को लड़के पक्ष द्वारा एक्सीडेंटल केस बना कर के सामान्य केस बनाने की साजिश की जा रही है। जबकि पहले दिन के पुलिस इन्वेस्टिगेशन में पुलिस को मृतका के दरभंगा स्थित ओझौल गांव में कमरे से टूटी हुई पायल, लहठी इत्यादि मिले हैं जो कि बयान करता है कि मृतका रंजना के साथ पहले तो खूब मारपीट की गई उसके बाद उसे मौत के घाट उतार दिया गया। वही घटना को दूसरा रूप देने के लिए मृतका के पति प्रभात झा ने षड्यंत्र रच कर के मृतका के शव को घर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर सड़क पर रखकर ईइस बात की अफवाह फैलाई की उसका दुर्घटना हुआ है। जिसमें वह बाइक से सवार था और वह खुद से गाड़ी को ड्राइव कर रहा था लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस स्क्रिप्टेड घटना में ना तो बाइक में कहीं खरोच आई ना ही गाड़ी को ड्राइव कर रहे मृतका के पति प्रभात झा के शरीर में किसी प्रकार की चोट या खरोंच देखी गई है। प्रशासन को ध्यान भटकाने के लिए मृतका के पति प्रभात झा ने पैसे के बल पर खुद को अस्पताल में भर्ती करवा लिया है। वह फिलहाल आईसीयू में भर्ती है। अस्पताल के कर्मी भी दबे जुबान कह रहे हैं कि अस्पताल में भर्ती प्रभात झा को ना तो किसी प्रकार की चोटे हैं ना ही किसी भी एंगल से यह प्रतीत हो रहा है किया दुर्घटना के शिकार हुआ है।रंजना के ससुराल वालों के प्री स्क्रिप्टेड इस प्लान में यह बताया गया है कि किसी बड़े वाहन से टक्कर होने के बाद रंजना की जान गई जिसमें गाड़ी से रंजना के कुचले जाने की बात कही गई गई। घटना के दिन ही जब लड़की पक्ष से कुछ लोग मौके पर पहुंचे थे तो कई सारी बातें सामने आई थी। मृतका के पति ने यह बताया था कि रंजना का शव घटनास्थल से ऑटो से लाया गया था जबकि मृतका के ससुर ने पूछने पर बताया कि रंजना का सब Bolero से लाया गया था। पति व ससुर के बयानों में काफी अंतर देखा जा रहा है मृतिका रंजना के द्वारा लिखे गए खत जो कि उसके भाई शंकर के नाम था उसमें साफ यह प्रतीत हो रहा है कि रंजना को ससुराल पक्ष के द्वारा काफी प्रताड़ित किया जा रहा था जिसके बाद इतने बड़े षड्यंत्र को मौत के रूप में परिणत कर घटना का रूप दुर्घटना का रूप देने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। आगे एसपी कार्यालय में वार्ता के दौरान SP ने हमलोगों को बताया कि हमारे पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया है। जिसमें चार जगह इंज्युरी पाई गई है। इंज्यूरी में एक जगह काफी गंभीर चोटे हैं जो कि यह मामले को गंभीर बना रहा है। अप्रत्यक्ष उन्होंने स्वीकार किया कि यह दुर्घटना नही है। वहीं उन्होंने बताया कि मृतका के पिता हमारे विभाग के कर्मी है अन्याय नही होगा विश्वास रखें।

इस दौरान मृतका की मां भी एसपी साहेब से मिलकर आंचल फैलाकर अपनी बेटी के लिए इंसाफ की गुहार लगाई। एसपी साहब से मिले आश्वासन के बाद हम लोगों ने SP साहब से आग्रह किया कि सर हम लोगों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखा दिया जाए। तो उन्होंने इस बात को सकारात्मक रूप में लेते हुए कहा कि हमने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखा है फिलहाल हमारे पास पोस्टमार्टम कॉपी नहीं है। लेकिन आप लोगों को यह मुहैया करा दिया जाएगा। उसके बाद हम लोग एसपी कार्यालय से बाहर निकलें और मृतका के शव को परिजनों के साथ सिमरिया अंतिम संस्कार के लिए रवाना किए। इसके बाद हम लोग लहरिया सराय थाना पहुंचे जहां पर हम लोगों ने थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों व घटना के पहले दिन इन्वेस्टीगेशन में पहुंचे पुलिसकर्मी से बातचीत की तो उन्होंने भी साफ शब्दों में कहा की यह घटना दुर्घटना नहीं बल्कि मर्डर प्रतीत हो रहा है हालांकि जो भी साक्ष्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट आए हैं उस आधार पर आगे की अनुसंधान चलेगी।

इसके बाद हम लोग दरभंगा के औझौल गांव पहुंचे जो कि मृतका का ससुराल है। वहां पहुंचने के बाद हम लोगों ने देखा कि घर के सामने काफी भीड़ लगी हुई है। लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। हम लोग गाड़ी से उतरकर लोगों से बात करने की कोशिश की लेकिन वहां के लोग पहले हम लोगों से बात करना नहीं चाह रहे थे। फिर हम लोगों ने जब उन लोगों से बात करने की शुरुआत की तो कुछ लोग इसे दुर्घटना बता रहे थे। वही इस मामले को मर्डर के रूप में देखने वाले लोगों की भी संख्या कम नहीं थी। दबी जुबान लोग इस परिवार के खिलाफ काफी आक्रोशित होकर कई तरह की बातें कर रहे थे। जब हम लोगों ने ग्रामीणों से कहा कि आप लोग इस परिवार की मदद कर इस कलंक को बढ़ाने का काम कर रहे हैं तो ग्रामीणों ने बताया कि पहले दिन तक हम लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि दहेज प्रताड़ना का मामला है। जब फेसबुक पर मृतका रंजना द्वारा भाई को लिखे हुए पत्र को हम लोगों ने पढ़ा है, कई सारी बातों की जानकारी मिली है तो पता चला है कि हम लोगों ने गलती की है हम लोग पहले दिन परिवार के साथ इसलिए खड़े थे क्योंकि हम लोग को यह बताया गया था कि यह दुर्घटना है। लेकिन अब जब वास्तविकता सामने आने लगी है तो हम लोग इस मामले में परिवार के साथ कतई भी साथ नहीं है। और हम लोग चाहते हैं इस परिवार को कठोर से कठोर दंड मिले वहीं कई लोग इस परिवार को सामाजिक बहिष्कार करने की बातें कर रहे थे।

क्रमशः #Justice4Ranjana पोस्ट शेयर करें।