फिल्म समाज लेल आईना होएत छैक, सन्दर्भ नेपाली-मैथिली फिल्म ‘भोर’

नेपाली-मैथिली सिनेमा भोर भेल रिलीज

सन्दर्भ फिल्म – भोर

नेपाल मे मैथिली कथानक पर बनल फिल्म ‘भोर’ पर व्यर्थ विवाद कियैक?
 
एखन नेपाल मे एकटा सिनेमा रिलीज भेल अछि ‘भोर’। एहि मे कहाँ दिन दहेज लोभी सभक चरित्र सब बड़ा बेवाकी सँ देखायल गेलैक अछि। सामाजिक संजाल पर एहि सिनेमाक कथानक पर बहुत तरहक चर्चा देखि रहल छी। एखनहि एक फिल्मकर्मी ‘भोर’ सिनेमाक निर्देशक संग एहि लेल शिकायत दर्ज करबैत एकटा पोस्ट कयलन्हि अछि जे हुनका अपन मातृभूमि ‘मधेश’ मे कोनो ससूर अपन पुतोहु केँ बलात्कार करबाक बात एहि सिनेमा मे देखायल जेबाक बात अव्यवहारिक आ आपत्तिजनक बुझेलनि। नेपाली आ मैथिलीक मिश्रण सँ बनल ई सिनेमा समाजक यथार्थ विषय केँ पकड़ि पूरे देश मे एकटा सन्देश दय रहल छैक। एहि मे जानल-मानल मैथिली अभिनेता-अभिनेत्रीक संग कौलीवूड (काठमांडू स्थित फिल्म उद्योगक) एक सँ बढिकय एक कलाकार, लगानीकर्ता निर्माता आ निर्देशक सभक संयोग जुड़ल अछि। फिल्म काफी चर्चा मे अछि। असगरे मैथिली फिल्मक ‘अच्छे दिन’ तऽ आब आओत, तब आआोत मे एखनहुँ आबय सँ बाधिते अछि – लेकिन नेपाली आ मैथिली बीच नीक समन्वय होएत नेपालदेश मे मैथिली जिन्दाबाद होमय लागल अछि। कतेको रास गीति-एल्बम यैह नेपाल भूमि मे तैयार एतेक लोकप्रियता हासिल केलक जे हिन्दुस्तान सन महान राष्ट्र मे महानतम् बाजार पाबि रहल अछि।
 
भारदह केर सपुत मे जेना उदित नारायण झा बम्बई पकड़ि हिन्दी सिनेमाजगत केर गायक बनिकय नाम कमेलनि, तहिना एहि गामक एक दोसर सपुत भेलाह अछि ‘भागवत मंडल’। एखनहुँ अपन माटि-पानि मे कलाकार केर जीवन जिबैत रोजी-रोटी कमाइत छथि, आर हुनकर एकटा गीत ‘दिल मे बसलौं अहाँ धड़कन मे बसा लियऽ’ एतेक प्रसिद्धि पाबि गेल अछि जे आइ उदित नारायण केँ टक्कर देनिहार मैथिली गायक केर रूप मे हुनकर नाम लेला सँ कोनो अतिश्योक्ति नहि होयत। नेपाल भूमि सँ मैथिली केँ एक सँ बढिकय एक सपुत – सुच्चा सेवक सब भेटल अछि। एहि सूची मे बहुत रास नाम अछि। हम कहैत आबि रहल छी जे बौलीवूड मैथिली केँ जे नहि दय सकल से चीज मिथिलाक मौलिक भूमि पर ई बेटा सब स्वयं देत। ‘बिकल दूल्हा मौगी के गुलाम’ – बहुत कम पाइ मे निर्मित सिनेमा जँ महीनों-महीना कोनो सिनेमा घर मे देखल जा सकैत छैक तऽ हमर दाबी कोनो अर्थ मे गलत नहि लगैत अछि। हालहि राजकुमार महतो द्वारा एहिना दहेजहि केर विषय पर बनल एकटा नेपाली चलचित्र केँ मैथिली मे डबिंग कय प्रदर्शन सँ काफी उत्साहजनक परिणाम भेटल। आगामी समय मे ‘सल्हेस – द पिपुल्स हिरो’ सहित अनेकों सिनेमा निर्माणाधीन अछि जे मैथिली सिनेमाक ‘अच्छे दिन’ जरूर देखाओत। एक सँ बढिकय एक बेटा सब मैथिली गीति एल्बम मे मनोयोग सँ काज कय रहल अछि। समय-समय पर मैथिली जिन्दाबाद मे एहि सब सृजनकर्ताक बारे मे लिखैत आबि रहल छी।
 
अन्त मे फेरो चर्चा करब ‘भोर’ पर। निराजन मेहताजीक असन्तोष जे एहि फिल्म मे मधेशक चेहरा केँ जानि-बुझिकय कुरूप देखाओल गेल, एतुका पिता केँ पुतोहु संग जबरदस्ती करणी करैत फिल्म मे देखायल गेल… आदि पर। एहि मे कतहु दुविधा नहि जे मिथिला समाज मे एखनहुँ एहेन कतेको समुदाय अछि जे दहेज केर लोभ सँ ग्रसित अपन बेटाक विवाह मे अनाप-शनाप मांग करैत अछि। ताहि मांग केँ लड़की परिवार – खास कय गरीब माय-बाप पर्यन्त जेना-तेना पूरा करय लेल प्रयास करैत अछि। जमीन बेचि दैत अछि, गहना बन्हकी राखि दैत अछि, अपन जीवनक समूचा कमाई लगा दैत अछि… तैयो दहेज लोभी लड़काक पिता-माता आदिक मांग केँ पूरा करय मे कमजोर पड़ि गेला सँ ओकर बेटीक जीवन पर बहुत तरहक खतरा मंडराइत रहैत छैक। लड़का परिवार मे ओहि लड़कीक आगमन सँ शुरू महिला हिंसा आ शोषण कहिया ससूर-पुतोहु बलात्कार मे परिणति पाबि जाएत छैक एकरा हम सब कोनो हिसाबे गलत सिद्ध नहि कय सकैत छी। समय-समय पर एहेन समाचार सुनबाक लेल भेटिते टा अछि। तखन यदि एहि सिनेमाक निर्देशक एक पहाडी समुदायक छथि आर ओ मधेशक विषय पर आधारित सिनेमा बनौलनि तैयो हमरा लोकनि एकरा सिर्फ मधेशक बदनामी लेल कयल जेबाक समझ सँ नहि जोड़ि सकैत छी। सिनेमा केँ समाज केँ एकटा नीक दिशा मे आगू बढेबाक लेल एकटा सार्थक माध्यमक रूप मे स्वीकार करी, ई समूचा देश लेल संवाद थिकैक।
 
निराजनजी केँ कहल किछु वाक्यांशः
 
The film always depicts true picture of our society, let us not bifurcate it as Madhesh and Pahar. There are lot of such incidences due to illiteracy, drug abuse, dowry abuse, violence against rural women. And, this is not just the story of Madhesh, rather in all ethnic people of Nepal, India, and many other countries. Let us not take it as a down show on face of Madhesh, please. Take care of what Singer Pooja Karn and Kishan Aryal have said above.
 
Why are you adamant on your point and repeating just the Madhesh and Madhesh again? Correct your understanding and know that the film represents all societies where women do not get proper respect. The illiterate societies, the backward people and those under greed of dowries that they demand on marriage of their male children show them such atrocities on women.
 
निराजनजी, हमरे टा जय नहि अहाँक जय सेहो हो। एखन अहाँक प्रोफाइल देखिकय पता लागल जे स्वयं एक फिल्मकर्मी छी आ हमरा सँ बेसी अनुभव फिल्मक कथानक, प्रस्तुति आदिक सम्बन्ध मे जरूर रखैत होयब। लेकिन भोर केर सन्दर्भ मे अहाँ जेना मधेश आ पहाड़ वला मुद्दा केँ माथ मे स्थान दय रहल छी से नहि दैत सिम्पली एकटा फिल्म जे समाजक यथार्थ केँ देखबयवला माध्यम होएत छैक तेनाकय मानि ली।
 
अहाँ सप्तरी सँ छी त ई मानय मे कतहु दिक्कत नहि होयत जे एखनहुँ एहेन अनपढ आ गँवार समाज छैक जे दहेजक कारण महिला हिंसा मे लगैत छैक। एहेन बहुतो समुदाय आ परिवार छैक जे अपन घरक इज्जत केँ घरक चहारदिवारी भीतर शोषण करैत छैक। दहेज माँग पूरा नहि करबाक नाम पर बेटाक अनुपस्थिति मे पुतोहु संग अबैध संबंध बनबैत छैक। ओ असगर स्त्री जे कोनो दोसर घर सँ केकरो घरक इज्जत बनिकय आयल छैक ओ एहेन प्रताड़णा सहय लेल बाध्य छैक। ओकर माय-बाप ओकर विवाह पर जतेक सकैत छैक से देबे करैत छैक, लेकिन…. ओतेक सँ दहेज लोभीक मोन नहि भरैत छैक। आर फेर शुरू होएत अछि ई हिंसाक क्रम, शोषणक क्रम। एकरा सहजता सँ स्वीकार करय मे कोनो हर्ज? या त अपन समाज मे बदलाव लेल काज करू, दूर करू एहि तरहक शोषण आ प्रताड़णा।
 
हरिः हरः!!