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प्रवीण नारायण चौधरी

शिक्षा आ संविधान मे मैथिली भाषाः गीतिका देव (क्राइस्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ, बंगलुरु) केर शोध

ई शोध आलेख इंटरनेशनल जर्नल फॉर मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च, वोल्यूम ५, इश्यू ५, सितम्बर-अक्टूबर २०२३ केर अंक मे शोधार्थी गीतिका देव द्वारा कयल गेल शोध पर आधारित – प्रकाशित लेख साभार आईजेएफएमआर केर वेबसाइट सँ हूबहू उतारल गेल अछि । एकर सन्दर्भ केर सम्पूर्ण विवरण तथा भाषा सन्दर्भित संवैधानिक एवं सरकारक कामकाज सम्बन्धी विज्ञजन सभक राय शिक्षा आ संविधान मे मैथिली भाषाः गीतिका देव (क्राइस्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ, बंगलुरु) केर शोध

बाबा-पोताक ओ खिस्सा

खिस्सा-पिहानी – प्रवीण नारायण चौधरी बाबा-पोताक ओ खिस्सा (प्रवीण स्मृति मे सिखल एक अद्भुत नैतिक कथा) काल्हि कहने रही न जे खिस्सा कहब… से सुनू ! गीता एक बेर पढ़िकय अथवा बेर-बेर पढ़िकय पर्यन्त पूर्ण रूप मे हम मानव समुदाय स्मृति मे अक्षरशः नहि राखि सकैत छी । विरले कियो सुपर स्मृति (बेजोड़ स्मरण शक्ति) बाबा-पोताक ओ खिस्सा

Mahabharata: Chapter II – Bhishma’s Vow

MAHABHARATA – CHAPTER II by C. Rajagopalachari Book Published by: Bharatiya Vidya Bhawan, Mumbai, India. BHISHMA’S VOW WITH joy the king received to his heart and his kingdom the resplendent and youthful prince Devavrata and crowned him as the yuvaraja, the heir apparent. Four years went by. One day as the king was wandering on Mahabharata: Chapter II – Bhishma’s Vow

स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वतीक भाष्य सहित गीताक अंग्रेजी अनुवाद

ॐ श्री परमात्मने नमः !! ŚRĪMAD-BHAGAVAD-GĪTĀ ॥प्रथमोऽध्यायः॥   धृतराष्ट्र उवाच । धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ॥ मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥१॥ Dhṛtarāstra said: Tell me, O Sañjaya! Assembled on Kuruksetra, the centre of religious activity, desirous to fight, what indeed did my people and the Pandavas do? True it is that the two parties were स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वतीक भाष्य सहित गीताक अंग्रेजी अनुवाद

अंजनी कुमार चौधरी संग साक्षात्कारः गाम सँ सिंगापुर धरि निजत्वक रक्षार्थ समर्पित व्यक्तित्व

साक्षात्कारः अंजनी कुमार चौधरी संग मैथिली जिन्दाबाद सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरीक वार्ता अंजनी कुमार चौधरी मूल रूप सँ दरभंगा जिलाक हयाघाट प्रखंड अन्तर्गत बसहा मिर्जापुर गामक निवासी छथि । वर्तमान में सिंगापुर में एगो मल्टीनेशनल बैंक में वाईस प्रेसिडेंट केर रूप में कार्यरत छथि । पूज्य पिता श्री माया शंकर चौधरीक संस्कार, साहित्यिक चेतना आ अंजनी कुमार चौधरी संग साक्षात्कारः गाम सँ सिंगापुर धरि निजत्वक रक्षार्थ समर्पित व्यक्तित्व

आखिर नेपाल-भारत मैत्री केकरा खटैक रहल छैक आ कियैक ?

नेपाली राजनीति आ भारत ‘भारतवर्ष’ अन्तर्गतक अनेकों देश मे आइ अपना – अपना भूगोल अनुसारक अनेकों दावी आ गाथा सब पर आधारित बात-विचार सब सुनि-देखि रहल छी हम सब । कहल जाइत छैक – भारत बीच मे, आजू-बाजू विभिन्न देश । उत्तर नेपाल, पूब बंगलादेश, पच्छिम पाकिस्तान आ दक्षिण म्यांमार । सीमा सँ जुड़ल आरो आखिर नेपाल-भारत मैत्री केकरा खटैक रहल छैक आ कियैक ?

Mahabharat: Chapter 1 – Devavrata

Mahabharata – by C. Rajagopalachari  Chapter 1 Devavrata “You must certainly become my wife whoever you may be.” Thus said the great king Santanu to the Goddess Ganga who stood before him in woman form, intoxicating his senses with her superhuman loveliness. The king earnestly offered for her love, his kingdom, his wealth, his all, Mahabharat: Chapter 1 – Devavrata

सम्पूर्ण वेदक अनुवाद – आरम्भ मे स्रोत अनुवादकक कृतिक प्रस्तुति

ऋग्वेद – संहिता ॥ अथ प्रथमं मण्डलम् ॥ [ सूक्त – १ ] ऋषि मधुच्छन्दा वैश्वामित्र । देवता – अग्नि । छन्द – गायत्री । १. ॐ अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम् । होतारं रत्नथातमम् ॥ १ ॥ हम अग्निदेव की स्तुति करते हैं । (कैसे अग्निदेव ?) जो यज्ञ (श्रेष्ठतम पारमार्थिक कर्म) के पुरोहित (आगे सम्पूर्ण वेदक अनुवाद – आरम्भ मे स्रोत अनुवादकक कृतिक प्रस्तुति

Mahabharat: Ganapati, The Scribe

Mahabharat – by C. Rajagopalachari Ganapati, The Scribe Bhagavan Vyasa, the celebrated compiler of the Vedas, was the son of the great sage Parasara. It was he who gave to the world the divine epic of the Mahabharata. Having conceived the Mahabharata he thought of the means of giving the sacred story to the world. Mahabharat: Ganapati, The Scribe

बलिराजगढ़ मे पुरातात्विक उत्खनन सन्दर्भित साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण रामक प्रतिवेदन

बलिराजगढ परिभ्रमण – डा. महेन्द्र नारायण राम बलिराजगढ, बाबूबरही जिला-मधुबनी, बिहार केर खुदाइ ऐतिहासिक ओ पुरातात्विक दृष्टि सं अत्यंत महत्वपूर्ण रहल अछि । मार्च, 2026 मे एकर दोसर चरणक खुदाइ फेर सं आरंभ भेल अछि, जे एहि क्षेत्रक प्राचीन गौरव कें उजागर करबा मे पैघ भूमिका निबहा रहल अछि । एकर पुरातात्विक महत्व पर विचार बलिराजगढ़ मे पुरातात्विक उत्खनन सन्दर्भित साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण रामक प्रतिवेदन