भाइ-भाइ मे फूट, आजुक विडंबना
स्वाध्याय-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ठीक छैक, मानि लेलहुँ… हम सब कलियुगी जीव छी। मुदा कल्याणक मार्ग जाहि स्वाध्याय सँ भेटैत अछि तेकर आनन्द-परमानन्द मे डूबय सँ कतहु मना नहि अछि। हम मानैत छी, जानैत छी, देखैत आ भोगैत छी – भाइ-भाइ मे स्नेह खत्म भऽ रहल अछि। विरले कतहु कोनो भाइ अपन भाइ … भाइ-भाइ मे फूट, आजुक विडंबना









